Friday, September 15, 2017

भारत और जापान प्राचीन सभ्यताएं एवं जीवंत लोकतंत्र हैं; नरेंद्र मोदी


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गुजरात (abtaknews.com )भारत में निहि‍त व्यापक सम्भावनाओं और कुशल हाथों से जापान काफी हद तक लाभान्वित हो सकता है। वास्तव में भारत का समस्त विकास एजेंडा जापानी कंपनियों के लिए प्रासंगिक है। पूंजी और प्रौद्योगिकी का प्रवेश सुनिश्चित करने के उद्देश्‍य से हमने अपनी अर्थव्यवस्था को खोलने के लिए अथक प्रयास किए हैं। हम प्रतिदिन भारत में निवेश एवं कारोबार करने में सुगमता के लिए प्रयास कर रहे हैं। हमने कारोबारियों और कंपनियों के समक्ष मौजूद कई नियामकीय और नीतिगत मुद्दे पहले ही सुलझा लिए हैं। इन प्रयासों के अत्यंत अच्छे नतीजे सामने आए हैं। मैं कुछ हालिया वैश्विक कदमों का उल्लेख कर रहा हूं : विश्व बैंक के ‘कारोबार में सुगमता से जुड़े सूचकांक’ में भारत कई पायदान ऊपर चढ़ गया है। विश्व आर्थिक फोरम के वैश्विक प्रतिस्पर्धी सूचकांक में  भारत पिछले दो वर्षों के दौरान 32 पायदान ऊपर चढ़ चुका है। यह किसी भी अन्य देश की तुलना में बेहतर उपलब्धि है। पिछले दो वर्षों के दौरान भारत विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन (विपो) के वैश्विक नवाचार सूचकांक में भी 21 पायदान ऊपर चढ़ चुका है। इसी तरह भारत विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्‍स प्रदर्शन सूचकांक में भी 19 पायदान ऊपर आ गया है। भारत अंकटाड अर्थात व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र  सम्मेलन द्वारा सूचीबद्ध किए गए शीर्ष 10 एफडीआई गंतव्यों में तीसरे स्थान पर है। भारत के सबसे बड़े कर सुधार अर्थात जीएसटी को हाल ही में लागू किया गया है। इसके साथ ही हम एक ऐसी अत्याधुनिक कर व्यवस्था की ओर अग्रसर हो चुके हैं, जो पारदर्शी, स्थिर और पूर्व अनुमान योग्य है। 
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आज दुनिया की सर्वाधिक उदार एफडीआई व्यवस्थाओं में भारत को भी शुमार किया जाता है। 90 प्रतिशत से ज्यादा एफडीआई मंजूरियां स्वतः रूट के जरिये दी जा रही हैं। हमने विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड को समाप्त कर दिया है। इस उदारीकरण के परिणामस्वरूप भारत का एफडीआई पिछले वित्त वर्ष में 60 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। जापान से एफडीआई का प्रवाह पिछले तीन वर्षों में लगभग तिगुना हो गया है। नई दिवाला एवं दिवालियापन संहिता से निवेशकों के लिए अपने कारोबार से बाहर निकलना आसान हो जाएगा। हम वाणिज्यिक अदालतें और वाणिज्यिक प्रभाग स्थापित कर रहे हैं, ताकि वाणिज्यिक मसलों का निपटारा जल्द से जल्द हो सके। मध्यस्थता संबंधी कार्यवाही अब तेजी से हो सकेगी, क्योंकि मध्यस्थता कानून में संशोधन कर दिया गया है। हमने एक नई बौद्धिक संपदा अधिकार नीति की भी घोषणा की है। ये तो सिर्फ कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जो यह दर्शाते हैं कि हम इस दिशा में अग्रसर हैं। हम इस दिशा में अधिक से अधिक, बेहतर से बेहतर और त्वरित से भी त्वरित कदम उठाएंगे।

भारत और जापान प्राचीन सभ्यताएं एवं जीवंत लोकतंत्र हैं। हम यह जानते हैं कि प्रगति और समृद्धि के फलों का वितरण आम आदमी के बीच किस तरह से किया जाता है। भारत में ऐसे किफायती समाधानों और प्रक्रियाओं की जरूरत है, जिससे देश के नागरिकों तक सरकारी सेवाओं को आसानी से पहुंचाया जा सके। जापान को ऐसे अवसरों की जरूरत है, जहां वह बड़ी मेहनत से अर्जित अपने ज्ञान और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर सके। मैं यह बात कहता रहा हूं कि 21वीं सदी एशिया की सदी है। मैं यह भी कहता रहा हूं कि भारत और जापान एशिया के अभ्युदय में अहम भूमिका निभाएंगे। रणनीतिक और आर्थिक मसलों पर भारत एवं जापान के बीच बढ़ती सामंजस्यता में वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करने की क्षमता है। मुझे पक्का विश्वास है कि सुदृढ़ भारत और सुदृढ़ जापान से एशिया एवं विश्व में स्थिरता भी आएगी। इस पारस्परिक और वैश्विक लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मैं प्रधानमंत्री आबे और जापान को एक सटीक भागीदार होने के लिए धन्यवाद करता हूं। अपनी मित्रता की ताकत और पारस्परिक विश्वास को ध्यान में रखते हुए मैं ज्यादा से ज्यादा जापानी लोगों एवं कंपनियों को भारत आने, ठहरने और काम करने के लिए आमंत्रित करता हूं। मैं आपके प्रयासों में आपकी सफलता की कामना करता हूं। मैं जरूरत पड़ने पर अपनी ओर से हरसंभव सहायता देने का आश्वासन देता हूं।

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