Friday, September 8, 2017

अडानी, अंबानी के अच्छे दिन लाने के लिए किसानों की हो रही हत्या ; डा. रामनिवास कुंड

farmer-convention-nit-faridabad


फरीदाबाद, 8 सितम्बर,2017(abtaknews.com) चैधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक  डा. रामनिवास कुंड ने कहा है कि देश की सरकार आक्रामक तरीके से नवउदारवादी नीतियों पर चलते हुए अडानी, अंबानी जैसे पूंजीपतियों के अच्छे दिन लाने के लिए किसानों तथा खेतीहर मजदूरों के हितों की बलि चढ़ा रही है और किसानों को कंगाल बनाने तथा जमीनों से बेदखल कर उन्हें खेती छोड़ने पर मजबूर करने की सोची समझी नीति पर काम कर रही है।  उन्होंने प्रदेश के किसानों को आगामी 3 अक्टूबर को हिसार में होने वाली विशाल किसान रैली में बढ़-चढ़ कर भाग लेकर सरकार की कृषि व किसान विरोधी नीतियों का मुंहतोड़ जबाब देने का आह्वान किया।  इस रैली को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार संबोधित करेंगे।
 अखिल भारतीय किसान सभा के आगामी 3 से 6 अक्टूबर तक हिसार में होने वाले 34वें राष्ट्रीय सम्मेलन के सिलसिले में आज यहां एन.एच. 3 में ”वर्तमान दौर का कृषि संकट और वैकल्पिक नीतियां” विषय पर आयोजित एक सेमिनार को सम्बोधित करते हुए डा. कंुडू और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विकास रावल ने यह उदगार व्यक्त किये। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार, सीटू के जिला सचिव कामरेड निरंतर पाराशर, नहरपार किसान संघर्ष समिति के नेता सत्यपाल नरवत और रिटायर्ड कर्मचारी संघ के नेता नवल सिंह की संयुक्त अध्यक्षता में हुए इस सेमिनार में फरीदाबाद, जिले के अनेकों गांवों के किसानों ने भाग लिया।  , प्रोग्रेसिव किसान फोरम के प्रधान सतबीर डागर, निगम पार्षद दीपक चैधरी, ब्लाक समिति सदस्य सतपाल चंदीला, जिला पार्षद जगदीश और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लाम्बा, मुख्य संगठनकर्ता वीरेंद्र डंगवाल व वरिष्ठ उपप्रधान नरेश कुमार शास्त्री भी इस सेमिनार में विशेष तौर से उपस्थित थे। इस अवसर पर रिटायर्ड कर्मी संघ के नेता नवल सिंह व लज्जा राम के नेतृत्व में 31 सदसीय स्वागत समिति का गठन भी किया गया।
 डा. कुंडू व प्रो. रावल ने यह भी कहा कि देश में कृषि की भारी उपेक्षा हो रही है और देश के किसानों को बाजार के हवाले कर दिया गया है।  विकसित देशों में किसानों को मिल रही सुविधाओं के चलते भारतीय किसान विश्व बाजार से मुकाबला करने की सोच भी नहीं सकता है, जिसका खाम्यिजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है और किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर  किया जा रहा है।  उन्होंने कहा कि खेती की वृद्धि दर में भरी गिरावट हुई है और यह दर 2014 के 3.7 फीसद से घटकर सिफर 1.1 फीसद पर आ गई है।  2014 के अगस्त से अब तक किसान आत्महत्याओं का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। बैमौसमी बारिस और ओलावृष्टि से देशभर में करीब 2 करोड़ हैक्टेयर में खड़ी फसलों का भारी नुकसान होने और सरकार के इस संकट के प्रति उदसीन बने रहने के चलते किसानों की आत्महत्याओं में और तेजी आई है।  उन्होंने अतीत के आंकडों का हवाला देते हुए कहा कि उदारीकरण की नीतियों के चलते कृषि योजनाओं में सरकारी निवेश में भारी कमी, कृषि हितैषी नीतियों का अभाव, प्राकृतिक संसाधानों को विकसित न करना, नोटबंदी के कुप्रभाव, कृषि मूल्यों के निर्धारण पर अतार्किक अंकुश, सिंचाई सुविधाओं का भारी अभाव, फर्टिलाईजर उद्योग के प्रति सरकारी उदासीनता, सिंचाई के लिए मानसून पर आश्रित रहना, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए समुचित मुआवजा नीति न होना, बिचैलियों को किसानों को लूटने की खुली छूट देना, जमीनों की जैविक गुणवता में कमी आने के कारण देश का किसान तबाह हो गया है और किसानों को इसी दुर्दशा से निकालने के लिए हिसार में होने वाले उक्त राष्ट्रीय सम्मेलन में पहले से ही चल रहे देशव्यापी किसान आंदोलन को तेज करने का एलान किया जायेगा।  
 सेमीनार को अन्य के इलावा लाल बाबू, कामरेड बेचू गिरी, युद्धवीर खत्री, किसान नेता धर्म चंद, श्रीपाल भाटी, डा. रघुबीर सिंह, प्रकाश चंद, जगत सिंह, जवां के पूर्व सरपंच रण सिंह, हीरापुर से मोहर सिंह, दयालपुर से अमरनाथ आदि ने भी सेमिनार में अपने विचार व्यक्त किये।

loading...
SHARE THIS

0 comments: