Saturday, September 16, 2017

विनय प्रताप सिंह, जिला उपायुक्त गुरुग्राम होंगे रेयान स्कूल के प्रशासक, सरकार ने संभाला मोर्चा


चंडीगढ़(abtaknews.com ) हरियाणा सरकार का रेयान स्कूल को लेकर बड़ा फैसला अब सरकार की निगरानी में चलेगा स्कूल , विनय प्रताप सिंह, जिला उपायुक्त गुरुग्राम रेयान स्कूल को कार्यभार सौंपा है। तीन महीने हरियाणा सरकार की निगरानी में चलेगा स्कूल। शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने कहा कि हरियाणा के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से संबंधित नियमों में आवश्यक संशोधन करने के लिए आगामी विधानसभा सत्र के दौरान एक्ट में संशोधन किया जाएगा। शर्मा ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव  के.के खंडेलवाल, अतिरिक्त निदेशक विरेंद्र सिंह सहरावत भी उपस्थित थे।शर्मा ने बताया कि रेयान स्कूल के छात्र प्रद्युम्र की दुखद मौत के मामले की जांच सीबीआई को दे दी गई है तथा वर्तमान में हालातों को देखते हुए सरकार ने तीन माह के लिए गुरूग्राम के उपायुक्त को रेयान स्कूल का प्रशासक नियुक्त किया गया है, इसके तीन माह बाद इस स्कूल में नियमों व स्थिति की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से गंभीर है और उनकी सुरक्षा बारे किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अगर किसी भी स्कूल प्रबन्धन ने विभाग द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया तो उस स्कूल को सरकार द्वारा टेक ओवर किया जा सकता है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जाएगी।
स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के खंडेलवाल ने इस अवसर पर बताया कि सरकारी,अनुदान प्राप्त व गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर नियम बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा स्कूल,तहसील व जिला स्तर पर सुरक्षा कमेटियां बनाई गई हैं। इनमें जिला स्तरीय कमेटी उपायुक्त द्वारा,तहसील स्तरीय कमेटी एसडीएम द्वारा तथा स्कूल स्तरीय कमेटी स्कूल मुखिया द्वारा संचालित की जाएगी। उन्होंने बताया कि बच्चों को बस से छोडऩे के मामले में सुरक्षा के मापदंड तय किए गए हैं। जब बच्चा रास्ते में हो, तब बस में इनके साथ महिला कर्मचारी का साथ होना,प्रशिक्षित व विश्वसनीय स्टॉफ, सुरक्षित बच्चे को घर से ले जाना व छोडऩा,कैमरे द्वारा दुरूस्त निगरानी, वाहन में आग से सुरक्षा,प्रथम उपचार किट, गति मापक,उचित दृश्यता होनी आवश्यक है।
उन्होंने आगे बताया कि जब बच्चा स्कूल में पहुंच जाए तो उसके बाद के लिए भी मापदंड तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्कूलों को स्कूल के मुख्य द्वार पर आवाजाही का रिकार्ड रखना आवश्यक होगा तथा बच्चे का उपस्थित व अनुपस्थित होने की रिपोर्ट भी स्कूल शुरू होने के 5 मिनट बाद माता-पिता को भेजनी है। स्टॉफ व बच्चों के सभी सदस्यों के लिए पहचान पत्र आवश्यक किया जा रहा है। इसके अलावा स्कूल के संवेदनशील स्थान सुरक्षित पहुंच में होने चाहिए। स्कूल समय के दौरान कोई भी निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए तथा शौचालय सुरक्षित होना चाहिए जिसमें केवल महिला जमादार ही हो।
खंडेलवाल ने बताया कि दिव्यांग बच्चों का खास ध्यान दिया जाना चाहिए तथा स्कूल में परामर्शदाता पैनल होना चाहिए। बच्चों के मामले में शिकायतों का समय पर निपटान किया जाना चाहिए तथा अपराधी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों में बच्चों को सुरक्षा,कानूनी ज्ञान तथा इंटरनेट के नुकसान से भी अवगत करवाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि विभाग के निर्देशों का उल्लघंन करने वाले निजी स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है तथा उसका नियंत्रण प्रशासक को दिया जा सकता है। यही नहीं उल्लंघना के मामले में पुलिस केस भी दर्ज किया जा सकता है।

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