Friday, September 1, 2017

फरीदाबाद में राष्ट्रीय पोषाहार सप्ताह 2017 के उपलक्ष्य में राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ



फरीदाबाद 1 सितम्बर,2017(abtaknews.com)महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, खादय एवं पोषण बोर्ड, भारत सरकार की फरीदाबाद ईकाई द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग फरीदाबाद के सहयोग से 1 सितम्बर 2017 को राष्ट्रीय पोषाहार सप्ताह 2017 के उपलक्ष्य में राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ  कमलेश भाटिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग फरीदाबाद द्वारा विरोहन इंस्टिटयूट फरीदाबाद के सभागार में किया गया। इस अवसर पर कमलेश भाटिया ने कहा कि हमें स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार की जरूरत होती है। पौष्टिक तत्वों की गुणवत्ता व संरक्षण की भी उचित जानकारी नहीं होना भी कुपोषण का एक कारण है। हमारा  देश कृषि प्रधान होते हुए भी कुपोषण देश की काफी विकट समस्या है।  कार्यशाला में जिला फरीदाबाद, पलवल से 50 सीडीपीओ, सुपरवाईजर, स्कूल टीचर, एलएचवी, एएनएम,व विरोहन इस्टीटयूट के कांउसल आदि ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
इस अवसर पर नरेश कुमार निर्दशन अधिकारी, खादय एवं पोषण बोर्ड ने उपस्थितजनों को सम्बोधित करते हुए कहा क देश के बच्चे ेस्वस्थ नहीं होंगे तो हमारे देश का भविष्य भी कमजोर हरेगा। एनएफएसएस-04 की रिपोर्ट के अनुसार देश में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चो की मृत्यु दन 50 और शिशु मृत्यु दर 41 है।
इस अवसर पर श्रीमती नीलम रानी, सहायक प्रोफेसर सरकारी महिला कालेज फरीदाबाद ने किशोरी बालिकाओ, गर्भवती व दूध पिलाने वाली माताओ के आहार एवं स्वास्थ्य सम्बंधित देखभाल के बारे में वक्तव्य  दिया और कहा कि बालिकाओं को उचित व पर्याप्त आहार मिलना चाहिए क्योकि तभी स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है। गर्भावस्था में 350 किलो कैलोरी अतिरिक्त ऊर्जा व 23 ग्राम प्रोटीन तथा माता को 600 किलो कैलोरी ऊर्जा व 19 ग्राम प्रोटीन की अतिरिक्त आवश्यकता होती है।
इस अवसर पर डा. प्रशांत चिकित्सा अधिकारी फरीदाबाद ने बताया कि शिशु के जन्म के एक घंटे के अंदर जितना जल्दी हो सके मॉं का दूध पीला देना चाहिए, 6 माह तक केवल मॉ का दूध व 6 माह बाद उचित व पर्याप्त अर्ध ठोस पूरक आहार शुरू कर देना चाहिए, मॉ का दूध कम से कम 2 वर्ष तक अवश्य पिलाना चाहिए।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डा. संगीता कुलश्रेष्ठ सहायक प्रोफेसर के.एल.मेहता कालेज फॉर वूमेन ने बताया कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चो, किशोरी बालिकाओ, गर्भवती व धात्री महिलाओ में अक्सर खून की कमी पाई जाती है हमारे देश में 5 वर्ष से कम उम्र के 58.4 प्रतिशत बच्चो में खून की कमी है जिसका मुख्य कारण खुराक में लौह तत्व की कमी व कृमि संक्रमण है।विभाग द्वारा पोषाहार प्रदर्शनी भी लगायी गयी जिसमें संतुलित आहार, गर्भवती व धात्री माताओं का आहार, कम कीमत पर पोष्टिक व्यंजन, बालाहार आदि को प्रदर्शित किया गया।


loading...
SHARE THIS

0 comments: