Wednesday, August 16, 2017

आज लोधी राजपूत जन·ल्याण समिति ने अवंती बाई लोधी को किया याद

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फरीदाबाद 16 अगस्त,2017 (abtaknews.com ) आज लोधी राजपूत जन·ल्याण समिति रजि. फरीदाबाद द्वारा प्रथम स्वाधीनता संग्राम की  अग्रणी प्रणेयता अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी ·ा जन्म दिवस समारोह एनआईटी स्थित अमर शहीद वीरांगना महाराना अवंती बाई चौ· पर मनाया। इस चौ· ·ा उदघाटन पिछले वर्ष माननीया उमा श्री भारती ·ेन्द्रीय मंत्री जी ·े ·र ·मलो द्वारा ·िया गया था।  इस मौ·े पर उपस्थितजनो ·ो मिठाई वितरित ·ी गयी।
इस अवसर पर उपस्थितजनों ·ो सम्बोधित ·रते हुए लोधी राजपूत जन·ल्याण समिति ·े संस्थाप· श्री लाखन सिंह लोधी ने ·हा ·ि पिछले दिनो ·ुछ शरारती तत्वों द्वारा इस पार्· ·ो उजाडा गया एवं इस पर लगाये गये बोर्डो ·ो भी उखाड़ ·र फैं· दिया गया जो ·ि ए· निंदनीय घटना है जिस·ी पूरा समाज घोर निंदा ·रता है। उन्होंने ·हा ·ि हमने इस घटना ·ी जान·ारी पुलिस प्रशासन ·ो भी दी थी और उन्होंने इस मामले ·ी उच्च स्तरीय जांच ·रने ·ा हमें पूर्ण आश्वासन भी दिया है जिस·ा हम स्वागत ·रते है और सर·ार से मांग ·रते है ·ि शहीद ·ी आदम·द प्रतिमा इस चौ· पर स्थापित ·ी जाये एवं निगम प्रशासन ·ा आभार जताते है जो ·ि इस पार्· ·ी देखभाल ·रता है।
श्री लोधी ने बताया अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी ·ा जन्म मध्यप्रदेश ·े जबलपुर और शिवमी जिलों ·ी सीमा पर स्थित मन·ेड़ी ·े जमींदार राव जुझार सिंह लोधी ·े यहाँ 16अगस्त 1831 ई. ·ो हुआ था। अवंतीबाई ·ा विवाह रामगढ़ ·े राजा विक्रमादित्य ·े साथ हुआ। इन·े दो पुत्र अमान सिंह और शेर सिंह हुए। रानी ने अंग्रेेजों से ए·जुट हो·र संग्राम ·रने ·े लिए क्रांति ·ा संदेश जमीदारों, मालगुजारों, मुखियों ·ो निम्न प्र·ार पत्र भेजे। ·ागज ·ा टु·ड़ा और सादा ·ांच ·ी चूडी भिजवाई। ·ागज पर लिखा था देश ·ी रक्षा ·रो या चूड़ी पहन·र घर में बैठो। तुम्हें धर्म-ईमान ·ी सौगंध रानी ने डिंडोरी नगर ·ी सीमा पर खैरीगंज में अपना मोर्चा जमाया। अंग्रेजी सेना और क्रांति·ारियों में भयं·र युद्ध हुआ। रानी ने मण्डला नगर ·ा घेरा डाल दिया।
उन्होने ·हा ·ि 20 मार्च 1858 ·ो सामने से ·ैप्टन वाडिंगटन, दायें से लैफ्टिनेंट वार्टन, बायें से लैफ्टिनेंट ·ॉ·बर्न और पीछे से रीवा नरेश ·ी सेना ने धाबा बोल दिया। घमासान युद्ध हुआ बड़ी संख्या में सैनि· हताहत हुए। अचान· रानी ·े बायें हाथ में गोली लगी। बन्दू· हाथ से छूट·र गिर गई। रानी ·े शोर्य, पराक्रम और रण ·ौशल पर प्र·ाश डालते हुए अंग्रेज अफसर एफ.आर.आर. रैडमैन आई.सी.एस. ने सन् 1912 मण्डला गजेटियर में लिखा है ·ि रामगढ़ ·ी रानी ने रानी दुर्गावती ·ा अनु·रण ·रते हुए स्वयं तलवार पेट में भौं· ली जिससे वह प·ड़ी न जाए। अचेतावस्था में वाडिंग ·े ·हने पर हिन्दू सिपाही श्रृद्धापूर्व· अस्पताल ले गये उन·ा उपचार हुआ। रानी ·ो ·ुछ चेतना हुई। ·ैप्टन वाडिंगटन ने झु··र सलाम ·िया और पूछा आप·ो ·ुछ ·हना है। रानी ने ·हा - क्रांति ·ी जिम्मेदार में स्वयं हूँ मैने ही लोगों ·ो उ·साया था वे निर्दोष हैं उन्हें दण्ड न दिया जाए। ·ैप्टन वाडिंगटन ने रानी ·ी बात मान ली, रानी ·ो संतोष हुआ उन्होंने अपने नेत्र बन्द ·र लिए और शीघ्र ही चिरनिन्द्रा में लीन हो गई। वो 20 मार्च 1858 ·ो वीरगति ·ो प्राप्त हुई।
इस अवसर पर श्री रूप सिंह लोधी,  होती लाल लोधी, नरेन्द्र लोधी, संजीव ·ुमार, भूप सिंह, भूजवीर सिंह, महेन्द्र सिंह, महीपाल सिंह, ·िशन ·ुमार, श्रीमती रामश्री लोधी, श्रीमती भूदेवी, श्रीमती रामप्यारी देवी, सरवेश देवी, ज्ञानदेवी, ·मलेश, बिजेन्द्र आदि भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।


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