Wednesday, August 30, 2017

पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर रामचंद्र छत्रपति, पत्रकारों की प्रेरणा बनकर हो गए अमर



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सिरसा (abtaknews.com) कोई भी पत्रकार छोटा बड़ा नही होता । बस वो अपने ज़मीर को गिरवी न रखे । आज बाबा राम रहीम के बारे में आप सब टीवी पे देख रहे है । और अखबारों में पढ़ भी रहे है । मसल पॉवर और अकूत सम्पति होने के बावजूद बाबा एक पत्रकार को झुका नही पाये । ये उस पत्रकार की दृढ़ इच्छा सकती ही थी कि सब कुछ जानते हुये भी अपने एक छोटे से अख़बार "पूरा सच" में पूरा सच लिखने की कोशिश की । पत्रकार को बाबा के गुण्डों के हाथ जान गंवाना पड़ा । आज जो खबरे निकल के आ रही है वो पूरा सच के सम्पादक की देन थी । करोड़ो अनुयायी करोड़ो की सम्पति सारे दुनियावी ऐशो आराम के साधन होने के बावजूद आज बाबा काल कोठरी में रात काटने को मजबूर है । जब तक पत्रकारिता को मिशन समझने वाले लोग जिन्दा रहेंगे तब तक मुल्क में छोटे मझोले अखबार जिन्दा रहेंगे । क्योंकि पत्रकारिता को मिशन समझने वाले पत्रकार समझौता नही करते है । और बड़े समाचार पत्रो और मीडिया घरानो में खबरे खुश करने के लिये छापी जाती है जबकि छोटे समाचार पत्रों में खबर सरकार से इन्साफ दिलाने के लिए छापी जाती है । जहाँ भी रहे अपने मिशन से भटकिये नही । असली पत्रकारिता वो ही होती है कि आप सरकार के अच्छे कामो को अवाम तक पहुँचाये और जब भी सरकार कुछ गड़बड़ी करे तो उसे भी अवाम तक पहुँचाये । चापलूसी करके आप दौलत कमा सकते है । इज्जत नही कमा सकते । "पूरा सच" के एडिटर को सच्ची श्राद्धाजंलि ये ही होगी कि हम जहाँ भी गरीब मजलूम पे जुल्म और अन्याय हो तुरन्त उसके खिलाफ आवाज़ उठाये । चाहे जुल्म और अन्याय करने वाला कितना भी ताक़तवर हो । हमें घुटने नही टेकने चाहिये ।
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