Wednesday, July 12, 2017

गंदे पानी के बीच पढऩे और खाने पर मजबूर स्कूली बच्चे, संत नगर का जर्जर सरकारी स्कूल

फरीदाबाद 12 जुलाई,2017(abtaknews.com)बेहतर शिक्षा का दावा करने वाली सरकार की पोल फरीदाबाद के संत नगर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला ने खोल दी है, जहां पूरे स्कूल में बरसाती पानी भरा हुआ है, इसी गंदे पानी और कूढे के ढेर के बीच छोटे - छोटे बच्चे पढने को मजबूर हो रहे हैं। भरा हुआ पानी इतना गंदा हो चुका है कि पानी में मच्छर और अन्य कीटाणु पनप चुक हैं जिससे छात्रों को बिमारियों का खतरा बना हुआ है। चौकाने वाली बात तो यह है बच्चों को इसी गंदगी के किनारे बैठकर मिड डे मिल का खाना खाना पड रहा है। जिन बर्तनों में बच्चे खाना खा रहे हैं वो थालियां सीवर और नालियों के जमा गंदे पानी में पड हुई हैं। 1980 में बना स्कूली भवन भी इतना जर्जर हो चुका है कि कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाबजूद भी न तो शिक्षा विभाग सुन रहा है और न ही सरकार को इनकी चिंता है। देश के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड की खबर कुछ दिन पहले ही मीडिया की सुर्खिया बन चुकी है।
फरीदाबाद स्थित संत नगर के राजकीय प्राथमिक स्कूल प्रांगण में इतना गंदा पानी भरा है कि छोटे बच्चे पढऩा तो दूर इस नदिया को पार कर स्कूल के कमरों में प्रवेश तक भी नहीं कर पा रहे हैं। कहने को तो यह बच्चों के खेलने का मैदान है, लेकिन यहां भरा गंदा पानी और कूढ़े के ढेर यह बताने के लिए काफी है कि इससे तो गंदे पानी का नाला ही ठीक है। इस गंदे पानी के तालाब को पार करके छोटे बच्चों के लिए स्कूल में प्रवेश करना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा तो आप ये तस्वीरें देख कर लगा सकते हैं। हमारे देश के नोनिहाल, जो पढऩे के लिए भी इस गंदगी और बिमारियों के बीच आते है और इसके लिए कोई और नहीं बल्कि सरकार जिम्मेदार है। एक तरफ सरकार लोगों से अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए कहती है और दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों की यह दशा। क्या यहीं है, आने वाला भविष्य, जिसका निमार्ण सरकारी स्कूलों में किया जा रहा है। गंदे पानी के जमाव के बीच पढऩे पर मजबूर इन बच्चों को मच्छरों के कारण इस मौसम में होने वाली बिमारियां कब घेर लें, इसका अंदाजा भी शिक्षा अधिकारियों को नहीं है। इतना ही नहीं एक तरफ ये बच्चे इसी सीवर और नालियों के गंदे पानी के बीच मिड-डे मिल का खाना खाने पर मजबूर है। तो वहीं दूृसरी ओर जिन थालियों में बच्चे खाना खाते हैं वो थालियां भी इसी गंदे पानी में पडी हुई नजर आ रही हैं। 1980 में बने इस स्कूल का भवन भी जर्जर हो चुका है और सडक़ से काफी नीचे पंहुच गया है। जर्जर भवन और उपर से जलभराव के कारण कभी यहां कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लगता है कि सरकार और प्रशासन हादसें के बाद ही गहरी नींद से जागेगें। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों का कहना है कि गंदे पानी के जमाव के कारण उन्हे यहां आने में काफी परेशानी होती है और कई बार तो वे गिर भी जाते है। उनका खेल मैदान गंदे पानी के तालाब का रूप ले चुका है। वहीं परिजन इसे सरकार और प्रशासन की कमी बता रहे है। उनका कहना है कि गरीब अपने बच्चों को कहां पढ़ायें। वहीं जब इस बारे में शिक्षा अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया तो वे अपने कमरों से ही नदारद मिलें। उनके कमरों में केवल पंखे जरूर चल रहे थे। बता दें कि कुछ ही दिन पहले गुस्साये परिजनों ने इस स्कूल के गेट से ताला लगा दिया था जिसकी खबर मीडिया की सुर्खियां बनी थी उसके बाद भी शिक्षा विभाग और सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया है।

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