Monday, July 10, 2017

आत्मरक्षा के लिए की थी नरेश ने जुनैद की हत्या, नेताओं से खपा, आगामी चुनाव में करेंगे बहिष्कार

पलवल 10 जुलाई,2017(abtaknews.com)जुनैद हत्याकांड के मु य आरोपी नरेश के पकडे जाने पर एक तरफ जहां पुलिस ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी तरफ उसके गांव भमरौला में पुलिस और नेताओं की कार्यप्रणाली को लेकर रोष बना हुआ है। आरोपी नरेश के भाई सुरेश ने बताया कि हम दोनों भाई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र में एक निजी सिक्योरटी एजेंसी के माध्यम से सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते है। 22 जून को जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन हम दोनों भाई दिल्ली के शिवाजी ब्रिज स्टेशन से गाजियाबाद से मथुरा जाने वाली ईएमयू शटल में सवार हुए थे, स्टेशन पर अधिक भीड होने के कारण हम दोनों भाई अलग-अलग डिब्बों में चढ़ गए। सुरेश ने बताया कि जब शटल पलवल पहुंचा तो मैंने फोन करके नरेश से पूछा कि वह कहां है, तो उसने बताया कि असावटी स्टेशन पर झगडा हो जाने के कारण वह (नरेश) वहीं उतर गया था। सुरेश ने बताया कि रात्रि करीब नौ बजे नरेश गांव में आया तो उसके सिर में चोट लगी हुई थी और लहुलुहान था। जब उससे चोट के बारे में पूछा तो उसने बताया कि ट्रेन में एक बुजुर्ग के लिए सिट को लेकर कुछ मुस्लिम युवकों से विवाद हो गया था। जिस पर उन मुस्लिम युवकों ने अपने गांव खंदावली में फोन कर कुछ अपने साथियों को बुलवा लिया था और उन्होंने आते ही ट्रेन के डिब्बे में बैठे लोगों पर चैन और बैल्टों से हमला बोल दिया। इस हमले में कई लोगों को चोटें आई, मेरे सिर में भी चोटें आईं। एक युवक ने मुझे मारने की नियत से जब मुझ पर चाकू से वार किया, तो अपने बचाव में मैंने उससे चाकू छीनकर उस पर वार कर दिए। असावटी स्टेशन पर यह झगडा हुआ था। झगडे के बाद दो बाईक सवार युवक उसे जटौला गांव में छोड गए थे। क्योंकि जटौला में हमारे मामा रहते हैं। रात नौ बजे के करीब नरेश घर पर आ गया। डर की वजह से उसने अपना इलाज डॉक्टर से न कराकर स्वंय डिटोल से साफ कर दवाई लगा ली और एक जुलाई को वह घर से बिना कुछ बताए ही चला गया। नरेश के पिता इंदर सिंह ने बताया कि सात जुलाई को सवा नौ बजे सीआईए ऊंचा गांव की एक टीम दिल्ली आई और मुझे व मेरे बेटे सुरेश को पकडकर ले आई। पुलिस ने हमसे नरेश के बारे में पूछताछ की तो हमनें बताया कि इस बारे में हमें कुछ नहीं पता। डर की वजह से नरेश घर छोडकर चला गया है। उसने बताया कि 5-6 जून को उसके लडके नरेश ने पूर्व सरपंच सहजराम को फोन किया और पूछा कि पुलिस घरवालों को तो परेशान नहीं कर रही है, यदि कर रही है तो मैं फलां जगह हूं आकर मुझे ले जाओ और पेश कर दो। उन्होंने बताया कि हमनें पुलिस को उसके द्वारा बताए गए स्थान महाराष्ट्र के जिला धूले अंर्तगत साकरी का पता बता दिया। जहां से पुलिस ने उसे गिर तार किया है। नरेश की माता संतरा देवी ने बताया कि मेरे बेटे ने जानबूझ कर कोई हत्या नहीं की है। बल्कि अपनी आत्मरक्षा की थी। जब मेरे बेटे पर चाकू से वार किया गया था और वह मर जाता तब क्या होता। आत्मरक्षा करना गुनाह है क्या? एक 55 साल के बुजुर्ग से सीट को लेकर हुए विवाद में झगडा हुआ बताया हैं। क्या एक बुजुर्ग की मदद करना गुनाह है? गांव के पूर्व सरपंच सहजराम ने पुलिस और नेताओं की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि पुलिस इस मामले में एक तरफा कार्रवाही कर रही है और नेता भी वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। आने वाले समय में नेताओं का इलाके की तरफ से बहिष्कार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने एकतरफा मुकदमा क्यों दर्ज किया? हमारे बच्चे को भी चोटें आई हैं, उसकी तरफ से भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्होंने बताया कि रोजाना ड्यूटी आने-जाने वाला क्या कोई हथियार लेकर चलते है। पुलिस को इस मामले की गहनता से जांच करनी चाहिए कि हथियार कहां से आए। उन्होंने बताया कि पता चला है कि जब ट्रेन में झगडा हो रहा था तो मुस्लिम युवकों ने फोन करके अपने जिन साथियों को बुलवाया था, उन्हीं के पास चैन, बैल्ट आदि हथियार थे, जिन्होंने आते ही ट्रेन के डिब्बे में बैठी सवारियों पर हमला बोल दिया। पुलिस को इस मामले में मृतक जुनैद व उसके साथ बैठे अन्य साथियों के फोनों की कॉल डिटेल निकलवानी चाहिए। जिनसे यह पता चल सके कि फोन किस किस को किया था और कौन-कौन आए थे। जो भी आए थे, उन्हीं के पास चैन व चाकू जैसे हथियार थे। इसके अलावा मृतक जुनैद व उसके साथी खंदावली के थे और उनका स्टेशन बल्लभगढ़ था तो वे बल्लभगढ़ क्यों नहीं उतरे ? असावटी तक क्यों आए? इन सब बिंदूओं पर पुलिस को गौर करना चाहिए और गहनता से जांच कर इस मामले में शामिल उन आरोपियों को भी गिर तार कर उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करना चाहिए।

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