Saturday, July 15, 2017

लोक संस्कृति के माध्यम से ही नये भारत का उदय संभव ; कप्तान सिंह सोलंकी

चण्डीगढ़,15जुलाई,2017(abtaknews.com)हरियाणा के राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि भारत सरकार के प्रयासों से भारत एक भारतीय एक के कथन की तरफ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। एक नये भारत का निर्माण करने के लिए लोक संस्कृति का विकसित होना बहुत जरूरी है,क्योकि लोक संस्कृति के माध्यम से ही नये भारत का उदय संभव है। इसलिए लोक संस्कृति को विकसित करने के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने भारत का सांस्कृतिक मानचित्र योजना को अमलीजामा पहनाने का कार्य किया है। इतना ही नहीं भारत सरकार ने इस योजना के लिए 470 करोड रुपए का बजट भी तय किया है। राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी आज कुरुक्षेत्र में मैक के प्रांगण में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला,जिला प्रशासन व विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान के सहयोग से आयोजित भारत का सांस्कृतिक मानचित्र के तहत थानेसर की सांस्कृतिक प्रतिभा खोज एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम का शुभांरभ करने के दौरान बोल रहे थे। इससे पहले राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के सयुंक्त सचिव प्रणव खुल्लर, भारत सांस्कृतिक मानचित्र की राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य डॉ. रामेन्द्र सिंह, अतिरिक्त उपायुक्त पार्थ गुप्ता, एनजेडसीसी पटियाला के निदेशक फुरकान खान,आरएसएस के प्रदेश विभाग प्रचारक नरेन्द्र ने थानेसर ब्लॉक के कलाकारों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान थानेसर ब्लाक से ग्रामीण आंचल की महिलाओं ने परंपरागत लोक गीतो और जंगमजोगियों ने शिव की महिमा का गुणगान कर राज्यपाल का स्वागत किया। इसके बाद राज्यपाल ने दीप शिखा प्रज्जवलित कर विधिवत रूप से कार्यक्रम का शुभांरभ किया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने विश्व विख्यात पदमश्री वसीफुद्दीन डागर, विश्व विख्यात कत्थक नृत्यंागना नलिनी कमलिनी, राज्य पुरस्कार सम्मानित विश्व विख्यात गायक सरदूल सिकन्दर को शाल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। राज्यपाल ने भारत सांस्कृतिक मानचित्र योजना के लिए सांस्कृतिक मंत्रालय भारत सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत बेशक राजनीतिक दृष्टि से आजाद हो गया है,लेकिन सांस्कृतिक दृष्टि से अभी आजादी बाकी थी। लेकिन भारत सरकार के प्रयासों से अब देश की सांस्कृति को मजबूत करने के प्रयास शुरू कर दिए गए है। जब देश की संस्कृति समृद्ध होगी तभी नवीन भारत का सपना पूरा हो सकेगा। कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर 5 हजार 153 वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण ने गीता के संदेश के माध्यम से जीवन शैली के बारे में बताने का प्रयास किया। भारत की प्राचीन संस्कृति पूरी दुनिया में निराली है। इस सांस्कृति का पूरी दुनिया अनुसरण कर रही है। क्योकि भारत की ही संस्कृति ऐसी है जो पूरे विश्व को एक सूत्र में पिरो सकती है और सभी समस्याओं का निदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने प्राचीन संस्कृति को पंचायत स्तर, ब्लाक स्तर, जिला, राज्य और राष्ट्र स्तर पर विकसित करने के लिए 470 करोड़ रुपए का बजट तय किया है। इससे कलाकारों व छिपी प्रतिभाओं को एक मंच मिलेगा। जब कलाकार एकत्रित होंगे तो निश्चित ही कला के माध्यम से देश की सम्पूर्ण संस्कृति का विकास होगा। जिससे देश को नई दिशा और नई पहचान मिलेगी। राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य डॉ. रामेन्द्र सिंह ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों से देश के 5 ब्लाकों में से थानेसर ब्लॉक का चयन पायलेट प्रोजेक्ट के तहत किया गया है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी ने सांझे प्रयास किए है। इस कार्यक्रम में भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रणव खुल्लर, पदमश्री वसीफुद्दीन डागर, विश्व विख्यात कत्थक नृत्यंागना नलिनी कमलिनी, राज्य पुरस्कार सम्मानित विश्व विख्यात गायक सरदूल सिकन्दर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस कार्यक्रम के अंत में संयुक्त सचिव प्रणव खुल्लर व डॉ. रामेन्द्र सिंह ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट किया इसके अलावा सभी मेहमानों को भी शाल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। भारत संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रणव खुल्लर ने कहा कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने देश के कोने-कोने में छिपी प्रतिभाओं को मंच देने और कलाकारों के हुनर का तरासने के उद्देश्य से मिशन मंत्रालय की स्थापना करने का निर्णय लिया है। सरकार ने इसके लिए 470 करोड रुपए का बजट भी स्वीकृत किया है। देश में अभी भी लाखों कलाकार ऐसे है जिनकों न तो मंच मिला और न ही सम्मान मिला है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा के प्रयासों से इस योजना को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सांस्कृतिक मानचित्र के तहत कलाकारों का एक लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। इसके बाद सभी कलाकारों को लेकर एक डक्यूमेंटेशन तैयार करके कलाकारों को मान-सम्मान देने का कार्य किया जाएगा। इस योजना के तहत देश के 5 ब्लाकों का चयन किया गया है। जिसमें थानेसर ब्लाक को भी शामिल किया गया है। इस योजना के तहत पंचायत,ब्लाक, जिला,राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर पर कलाकारों का आयोजन किया जाएगा। विश्व विख्यात गायक सरदूल सिकन्दर ने कहा कि भारत का सांस्कृतिक मानचित्र योजना का आगाज करने से कलाकारों के चेहरे पर खुशी लौट आई है। सरकार की इस योजना को गली-गली में छीपे कलाकारों को एक मंच और पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत शब्द के मायने भाव,राग और ताल है। इन सबको मिलाकर भारत का निर्माण संभव है। राग,ताल और भाव के संगम से निकलने वाली तरंगों से आत्म संतुष्टि मिलती है। प्रत्येक मनुष्य सुख-दुख में संगीत का मनन करता है। इसलिए भारत सरकार ने इस योजना को शुरू करके एक सराहनीय कदम उठाया है। विश्व विख्यात कत्थक नृत्यांगना नलिनी कमलिनी ने कहा कि कलाकार ही समाज के आयने को सामने रखता है। कलाकार की उन्नति से ही देश की उन्नति संभव है। कलाकार हमेशा आशावादी होते है और जो व्यक्ति आशावादी होते है वह निश्चित ही समाज की प्रगति के लिए लाभदायक सिद्ध होते है। जिस देश में कलाकारों को सम्मान नहीं मिलता उन कलाकारों की स्थिति हर क्षेत्र मे ठीक नहीं होती और जिस देश की संस्कृति समृद्ध होती है। उस देश की पूरे विश्व में एक अलग पहचान होती है। जिसमें भारत देश का नाम शामिल है। भारत सरकार ने भारत संास्कृतिक मानचित्र योजना शुरू करके छीपी प्रतिभा को खोजने और कलाकारों को सम्मान देने का कार्य किया है,जो आज के समयानुसार सबसे बडी जरूरत है। राष्ट्रीय कमेटी के सदस्य डॉ. रामेन्द्र सिंह ने कहा कि थानेसर ब्लाक से अलग-अलग क्षेत्रों के करीब 1000 कलाकारों के आवेदन पत्र प्राप्त हो चुके है। इन सभी कलाकारों के लेखे जोखे को अपडेट कर दिया गया है और यह लेखा -जोखा भारत सरकार के पास भेजा जाएगा। भारत सरकार की संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों से पहली बार थानेसर ब्लाक के कलाकारों को राज्यपाल प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी के समक्ष अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला। इस मंच पर सत्यनारायण गु्रप के कलाकारों ने जंगमजोगी का रूप धारण कर शिव विवाह की प्रस्तुति देकर सबको भावविभोर कर दिया। इस प्रस्तुति के साथ रानी देवी गु्रप ने हरियाणा की परंपरा से जुडे लोक गीत को रखा, इस लोक गीत के बाद शिव कुमार ग्रुप ने गुग्गा गायन,छात्राओं ने घूमर लोक नृत्य, लोक कलाकार गुलाब सिंह ने रागनी और बांसुरी वादक डॉ. मुनीष कुकरेजा ने बांसुरी से कान्हा को याद करने का प्रयास किया। इन कलाकारों की प्रस्तुति को दर्शकों ने खुब सराहा।

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