Monday, July 17, 2017

थाना प्रभारी ने पीडि़तों को धमकाकर थाने से किया बाहर

फरीदाबाद(abtaknews.com)एक तरफ पुलिस प्रशासन जनता से सौहादपूर्ण वातावरण बनाने एवं अपराधों की रोकथाम के लिए निरंतर सेमिनार एवं जागरुकता अभियानों का आयोजन करता रहता है वहीं दूसरी तरफ फरीदाबाद की व्यस्त एन-एच-5 मार्किट में एक वृद्धा के साथ हुई घटित घटना के बाद थाना एनआईटी प्रभारी द्वारा किए गए व्यवहार से पुलिस प्रशासन की कलई पूरी तरह से खुल गई। आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए थाना प्रभारी ने पीडि़त को धमकाते हुए यहां तक कह डाला कि वह उनके बाप की नौकर नहीं है। इस घटना से नाराज पीडि़त के परिजनों ने पुलिस कमिश्रर को लिखित में शिकायत देकर इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पुलिस कमिश्रर के हस्तक्षेप के बाद थाना एनआईटी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर नंबर 340 के तहत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 5बी-43 निवासी आशा रानी तलवार सावन का सोमवार होने के कारण शिवलिंग पर गन्ने का जूस चढ़ाने के लिए 5 नंबर के निरंकारी चौक पर गई थी। उसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक आशा रानी से हाथों में पहनी 5 तोले की सोने की चूडिय़ां, 2 तोले के कानों के कुंडल व पर्स लेकर फरार हो गए। इस घटना की जानकारी उन्होंने तुरंत अपने बेटे व पुलिस को दी। हैरानी की बात तो यह है कि घटनास्थल से महज आधा किलोमीटर पर थाना एनआईटी स्थित है, इसके बावजूद करीब 50 मिनट के बाद एक सिपाही आया है, जो पीडि़त को थाने लेकर गया। जहां थाना प्रभारी मित्रपाल ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही करने की बजाए उल्टा पीडि़त आशा रानी तलवार व उसके पुत्र के साथ दुव्र्यवहार किया और उन्हें यह कहते हुए भगा दिया कि उन्हें जहां शिकायत करनी है, वहां चले गए, मैं कोई तुम्हारे बाप का नौकर नहीं। थाना प्रभारी के इस कथन से पीडि़तों ने सेक्टर-21सी स्थित पुलिस कमिश्रर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने लिखित में शिकायत देकर अपनी आपबीती बताई। पुलिस कमिश्रर डा. हनीफ कुरैशी ने पीडि़तों को आश्वासन दिया कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर प्रभारी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। पुलिस प्रशासन द्वारा सीनियर सिटीजन के साथ किए गए दुव्यर्ववहार को लेकर क्षेत्र के लोगों में रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि पुलिस लोगों की सुरक्षा के लिए होती है परंतु पुलिस अधिकारी जब अपना कत्र्तव्य भूलकर पीडि़तों को ही धमकाने लगेंगे तो शहर कैसे सुरक्षित रहेगा।

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