Tuesday, July 4, 2017

आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारी बैठे अनिश्चित कालीन धरने पर


फरीदाबाद 4 जुलाई,2017(abtaknews.com ) जीएसटी लागू होने के बाद आबकारी एवं कराधान विभाग के कर्मचारियों के पदों में पदोन्नित न करने से गुस्साये फरीदाबाद आबकारी एवं कराधान विभाग के सभी अधिकारी व कर्मचरियों ने सेक्टर 12 कायालय के सामने अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया है। धरने पर बैठै आबकारी एवं कराधान विभाग के कर्मचारियों ने पूरे विभाग का कार्य ठप कर दिया है और मांग की है कि जब देश के अन्य प्रदेशों की तर्ज पर हरियाणा में भी कर्मचारियों के पदो को पदोन्नित नहीं कर दिया जाता तब तक ये अनिश्चित कालीन धरना जारी रहेगा, इस बीच सरकार को होने वाले राजस्व के नुक्सान की जिम्मेदार स्वयंं हरियाणा सरकार होगी। जुलाई से लागू हुए देश के सबसे बडे और एक ही टैक्स जीएसटी से पहले आबकारी एवं कराधान विभाग के कर्मचारियों के पदो को पदोन्नित करने की बात की गई थी मगर जीएसटी लागू होने के बाद देश के कई प्रदेशों में विभाग के कर्मचारियों के पदो में इजाफा कर दिया है मगर हरियाणा में कर्मचारियें के पद ज्यों कि त्यों रखे गये हैं, जिससे गुस्साये आबकारी एवं कराधान विभाग के कर्मचारियों ने पूरे प्रदेश में अनिश्चित कालीन हडताल शुरू कर दी है। जिसका फरीदाबाद में भी देखा गया है जहां आबकारी एवं कराधान विभाग से संबंधित गाडियां जो अक्सर सडकों पर नजर आती थी आज वो कार्यालय के बाहर ही खडी दिखी, औैर जिस कार्यालय में अधिकारी व कर्मचारी कार्य करते हुए दिखते थे वो आज उसी कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर हरियाणा सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए नजर आये। बता दें कि फरीदाबाद आबकारी एवं कराधान विभाग के सभी कर्मचारी अनिश्चित कालीन हडताल पर चले गये हैं। 
हडताल करने के कारणों के बारे में आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार उनके साथ धोखा कर रही है जीएसटी लागू होने से पहले उनके पदों की पदोन्नित होने की बात पास की गई थी, उनके पद बदले जाने थे जिन्हें बदला नहीं गया है जबकि देश के हिमाचल, कर्नाटक और राजस्थान सहित कई प्रदेशों में विभाग के पदों को पदोन्नित कर बदल दिया गया है। अधिकारियों का कहना है उनका अनिश्चित कालीन धरना पूरे प्रदेश में जारी है जो कि जब तक रहेगा तब तक सरकार उनकी मांग पूरी नहीं करती, इस बीच आबकारी एवं कराधान विभाग का सारा काम काज ठप रहेगा और जो राजस्व का नुक्सान सरकार का होगा उसकी जिम्मेदार स्वयं सरकार ही होगी।

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