Friday, July 21, 2017

श्री सिद्धदाता आश्रम एवं श्री लक्ष्मीनारायण दिव्यधाम में हजारों ने किया शिव का अभिषेक



फरीदाबाद(abtaknews.com)असीम श्रम करने के बाद गंगाजल लेकर अपने आए कांवडियों को अपने अराध्य का अभिषेक कर जो आनंद मिलता है, वह बेमिसाल है। उसकी किसी अन्य से तुलना नहीं की जा सकती है। यह कहना है कि अनंतश्री विभूषित इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य महाराज का। वह श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव के अभिषेक के बाद मौजूद कांवडियों एवं शिवभक्तों को प्रवचन कह रहे थे। 

स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रावण माह में समुद्र मंथन के बाद निकले विष को जब लोकरक्षा के लिए शिव भगवान ने पी लिया तो उनको ताप बढ़ गया। जिसे शांत करने के लिए उनका गंगाजल से अभिषेक किया गया। तभी से शिवरात्रि को मनाने की परंपरा शुरु हुई। उन्होंने कहा कि हमें भगवान शिव से लोककल्याण की सीख लेनी चाहिए कि उन्होंने देवों और सृष्टि के तमाम जीवों को बचाने के लिए विष का पान कर लिया। जबकि हम केवल अपने अपने में उलझे हुए रहते हैं। उन्होंने कहा कि शिव की कांवड लेकर आने वाले कांवडिए तमाम कष्टों को सहन करते हुए पहुंचते हैं और अपने ईष्ट शिव को प्रसन्न करने के लिए अभिषेक करते हैं। उनके इस आनंद की कोई समानता नहीं है। लेकिन हमें यह भाव केवल श्रावण तक ही न रखें, बल्कि पूरे जीवन में इसी प्रकार कष्टों को सहन कर धर्म मार्ग पर चलने की सीख लेनी चाहिए। समाज के लिए कष्टों को भी सहन करें, लेकिन समाज निर्माण में सहयोग करें। तभी धर्म का अर्थ पूर्ण होगा।
श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने दिव्यधाम में भगवान शिव के मूर्त रूप का अभिषेक किया। इसके बाद कांवडिए गुरुभक्तों ने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की एवं भगवान का अभिषेक किया। इस मौके पर हरिद्वार एवं गौमुख से सैकड़ों कांवडि़ए यहां पहुंचे एवं हजारों भक्तों का तांता पूरे दिन लगा रहा। जहां वैदिक मंत्रोच्चारण से वातावरण दिव्य बना रहा।

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