Tuesday, July 4, 2017

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर कमर्शियल सर्टिफिकेट सम्बंधित व्यापारियों में बंधी आस


फरीदाबाद(abtaknews.com) फरीदाबाद के व्यापारियों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का फरीदाबाद आगमन का बेसब्री से इंतजार है। इन व्यापारियों को आस लगी है कि मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान उन्हें कमर्शियल सर्टिफिकेट (सीएलयू) देंगे। गौरतलब है कि एसो. फॉर जस्टिस और भारतीय उद्योग व्यापार के जिलाध्यक्ष रामजुनेजा पिछले कई माह से इस मुद्दे को लेकर फरीदाबाद से चंडीगढ़ और चंडीगढ़ से हरियाणा भवन तक मुख्यमंत्री मनोहर लाल सहित कई आला अधिकारियों से मिल चुके है। यहां तक की बडखल की विधायिका एवं हरियाणा सरकार में मुख्य संसदीय सचिव श्रीमती सीमा त्रिखा ने भी व्यापारियों की इस मांग को जायज करार देते हुए उनका समर्थन किया और बकायदा मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात भी करवाई। मुख्यमंत्री श्री खट़टर ने व्यापारियों को विश्वास दिलाया कि उन्हें कमर्शियल सर्टिफिकेट अवश्य दिए जाएंगे और इसको लेकर उन्होंने विभागीय कार्यवाही को आगे भी बढ़ाया। फिलहाल फाईल अटार्नी जनरल तक पहुंच गई है, बस अब मुख्यमंत्री की मुहर लगनी बाकि है। व्यापारियों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री फरीदाबाद आएंगे और उनकी वर्षाे पुरानी इस मांग को पूरा करेंगे। इसको लेकर आज जवाहर कालोनी स्थित कार्यालय में भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल के जिलाध्यक्ष राम जुनेजा की अध्यक्षता में व्यापारियों की एक बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में सभी व्यापारियों ने इस मुद्दे को लेकर चर्चा की और मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर विचार विमर्श किया। व्यापारियों को संबोधित करते हुए रामजुनेजा ने कहा कि वर्षाे पुराने इस मुद्दे को लेकर जिस प्रकार से मुख्यमंत्री मनोहर लाल एवं मुख्य संसदीय सचिव श्रीमती सीमा त्रिखा ने प्रयास किए है, उससे व्यापारियों में एक नए उत्साह का संचार हुआ है। श्री जुनेजा ने कहा कि उन्हें उम्मीद बंधी है कि जिस दिन मुख्यमंत्री आएंगे उन्हें कमर्शियल लाईसेंस वितरित करेंगे। बैठक में विनोद आहुजा, मुकेश अरोड़ा, आनंद आहुजा, प्रदीप, कुलभूषण, सचिन चावला, संजीव ग्रोवर, बृजमोहन जी, श्याम विज, पवन भाटिया सहित अनेकों व्यापारी उपस्थित थे। ज्ञातव्य हो कि वर्ष 2011 में नगर निगम ने व्यापारिक प्रतिष्ठानों को कमर्शियल किए जाने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके तहत 738 व्यापारियों ने आवेदन किए थे, जिसमें से 25 व्यापारियों को लाईसेंस जारी किए गए थे, जबकि बाकि व्यापारियों द्वारा निगम को फीस देने के बावजूद भी यह प्रक्रिया रोक दी गई। इसके उपरांत वर्ष 2016 में एक लाईसेंस जारी किया गया था, जिसके लेकर व्यापारियों द्वारा इस मुद्दे को लेकर कार्यवाही तेज कर दी गई थी।


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