Friday, July 7, 2017

भ्रष्टाचार विरोधी मंच ने हजारों करोड़ रूपये की 21 घोटालों की दूसरी सूची भी मुख्यमंत्री को भेजी

फरीदाबाद,7 जुलाई,2017(abtaknews.com)फरीदाबाद नगर निगम मुख्यालय पर सिविल सोसायटी व निगम अधिकारी रतन लाल रोहिल्ला के 53 दिनों से चल रहे आंदोलन को मिल रहे जनसमर्थन के बावजूद भ्रष्टाचार विरोधी मंच के द्वारा गत 27 मई को सरकार को भेजे गए फरीदाबाद नगर निगम के 21 घोटालों की जांच के लिए एक ओर तो सरकार ने मंच की मांग के अनुसार विशेष जांच दल (एस.आई.टी.) का गठन अभी तक किया नहीं, वहीं मंच ने निगम के 21 घोटलों की दूसरी सूची चार्जशीट के रूप में राज्य के मुख्यमंत्री, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री, विभाग के प्रधान सचिव, निदेशक और निग्मायुक्त को प्रेषित कर दी है। मंच ने दावा किया है कि दूसरी सूची में उल्लेखित घोटालों की ईमानदार व विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम से जांच करवाई जाती है तो अरबों रूपये के घोटालों का पर्दाफाश हो जायेगा और निगम के अनेकों अधिकारी और यहां तक कि आयुक्त स्तर तक के अधिकारी भी कटघरे में होंगें। मंच ने दावा किया है कि पिछले दो दशक में निगम के खजाने को बड़े-बड़े अधिकारियों के द्वारा बेरहमी से लूटा गया है और यही लोग अब एस.आई.टी. के गठन में बाधा बन रहे हैं। मंच ने मांग की है कि एस.आई.टी. का गठन या तो सेवानिवृत न्यायधीश की अध्यक्षता में हो या फिर अशोक खेमका या शत्रुजीत कपूर जैसे ईमानदार अधिकारियों की अध्यक्षता में किया जाए। अभी अन्य बहुत से मामले और भी हैं, जिनकी जानकारी एकत्रित की जा रही है और शीघ्र ही सरकार को तीसरी चार्जशीट भी प्रेषित कर दी जायेगी। मंच ने दावा किया है कि हाल ही में थोड़ी सी बारिस में पूरे निगम क्षेत्र का डूबना, कुछ समय के बाद नवनिर्मित सड़कों का टूट जाना और नगर निगम की एक भी व्यवस्था के व्यवस्थित न होना ही निगम में व्याप्त महाभ्रष्टाचार को प्रमाणित करने के लिए काफी है हालांकि मंच के पास घोटालों व अनियमितताओं से सम्बन्धित प्रमाण हैं और कुछ के मामलों की पुष्टि निगम के रिकार्ड से की जा सकती है, जिन्हें आर.टी.आई. तक में भी निगम अधिकारी पोल खुलने के डर से उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। मंच ने यह भी मांग की है कि जिस अधिकारी ने सिस्टम में रहते हुए भी भ्रष्ट तत्वों के विरोध में आवाज उठाने की हिम्मत दिखाई है उसे संपूर्ण संरक्षण देते हुए उसके विरूद्ध की गई उत्पीड़न की कार्यवाही समाप्त की जाए और इस अधिकारी सहित ऐसे अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित भी किया जा मंच के संयोजक डा. ब्रहमदत्त पदमश्री, वरूण श्योकंद व रतन लाल रोहिल्ला ने आज यहां यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूसरी चार्जशीट में जिन घोटालों का उल्लेख किया गया है उनमें सूरजकुंड रोड़ के पास टी.पी. स्कीम नं. 4 का एक हजार करोड़ घोटाला, निगम के अधीन आने वाले 37 गांवों में से काफी गांवों के जोहड़ों व अधिकतर गांवों की देह शामलात की अरबों रूपये जमीनों पर अधिकारियों की मिलीभगत से करवाए गए कब्जे, स्मार्ट सिटी परियोजना में पिछले दरवाजे से उच्च वेतनमान पर की गई भर्तियां, मनोरंजन व जनजागरण के नाम पर किये गये अनाप-शनाप खर्चे, विज्ञापन कम्पनी को दिये गये ठेके में घपलेबाजी, सीवर के मेनहोलों की गाद निकालने व सीवर लाईनों की सफाई के लिए हायर की गई सुपर शाकर मशीनों के करोड़ो रूपये का घोटाला जिसके कारण पूरा शहर थोड़ी सी बारिस में बरसात के पानी मंे जलमग्न हो गया, फर्नीचर की खरीद फरोख्त में भारी हेराफेरी यहां तक कि घरेलू आईटम डबल बेड व गद्दों तक की खरीद फरोख्त तक करना, 69 लाख के सर्विस टैक्स की वसूली से सम्बन्धित मामला, कम्पयूटर आदि की खरीद फरोख्त में बरती गई भारी अनियमिततायें, बीते वर्षों में और वर्तमान में भी बिना टैंडर आमंत्रित किये केवल क्योटेशन के आधार पर क्रय किये गये सामान (जिसे नगर निगम की भाषा में पैटी परचेज/कन्टीजेन्ट परचेज कहते हैं) व क्योटेशन के आधार पर करवाए गए विकास कार्यों से सम्बन्धित महाघोटाला, आडिट रिपोर्ट के प्रति उदासीन रवैये के कारण अनेकों वर्षों से लम्बित चले आ रहे 652 से अधिक आडिट पैरों के निपटान न होने के कारण फाईलों में बंद बड़े अनेक घोटाले व अनियमिततायें, निगम के एकाउटिंग सिस्टम को ठीक करने के लिए हरियाणा सरकार के वित सचिव के 9 मई 2013 के आदेशों की पालना न करना, सरकार के स्तर पर की जाने वाली पदोन्नति में नियमों की अनदेखी करना, फरीदाबाद नगर निगम में कार्यरत लोकल आडिट स्कीम के अधिकारियों के द्वारा आडिट करने में की जा रही लापरवाही, अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध वर्षों से लम्बित जांचों का निपटान न होना, आर.टी. आई एक्टिविस्ट वरूण श्योकंद की शिकायत को दरकिनार कर 155 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों से सम्बन्धित बहुत बड़े घोटाला, सिस्टम की कमी के कारण सम्पति कर, पानी व सीवर के बिलों में हो रही भारी अनियमितताए, ंनिगम क्षेत्र में हो रहे अवैध कब्जों व अवैध पार्किंग के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार, 3150 करोड़ रूपये की जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण योजना के तहत रैन हारवेस्टिंग, जलापूर्ति रैनीवेल स्कीम, डबुआ कालोनी व बापू नगर में बनाए गए मकानों से सम्बन्धित घोटाला और फरीदाबाद नगर निगम के स्टाफ क्वार्टरों में अवैध कब्जा कर अनेकों वर्षों से रह रहे लोगों के कारण निगम को हो रहे भारी वित्तीय नुकसान आदि शामिल हैं

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