Wednesday, June 28, 2017

मध्यमवर्गीय परिवार की महिला रंगकर्मी के अभिनय का सशक्त हस्ताक्षर है ''मुझे अमृता चाहिए ''

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फरीदाबाद (abtaknews.com) 28 जून,2017; मध्यमवर्गीय परिवार की एक लड़की दिनचर्याओ  की समस्यायों से जूझती हुई स्वयं को किस तरह एक महिला रंगकर्मी के रूप में स्थापित कर पाती है इन्ही सभी को दर्शाता नाटक  ''मुझे अमृता चाहिए '' समाज में महिलाओ की दिशा और दशा का दर्शाता है। पांच दिवसीय संभार्य थियेटर फेस्टिवल के समापन पर प्रस्तुत ''मुझे अमृता चाहिए '' की दमदार प्रस्तुति ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया।अपने सशक्त अभिनय के दम पर नाटक मण्डली के सभी कलाकारों ने अपने अपने भावपूर्ण  अभिनय से सभी को आनंदित कर दिया।  ''मुझे अमृता चाहिए '' महिला सशक्तिकरण का संदेश तो देती है इसी के साथ साथ वर्तमान में युवतियों को बहुत बड़ी प्रेरणा भी दी है। इस सभी के लिए संभार्य फाउंडेशन की टीम को बहुत बहुत साधुवाद। 

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सेक्टर 12 स्थित कनवेंशन सेंटर में चल रहे पांच दिवसीय संभार्य थियेटर फेस्टिवल के आखिरी दिन मुझे अमृता चाहिए नाटक का मंचन किया गया। नाटक ने महिला सशक्तिकरण की छाप छोड़ी और लड़कियों को कठिन परिस्थितियों में हिम्मत न हारने की राह दिखाई। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप मेंं मिलन रेस्टूरेंट के हेमंत, मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर के चीफ एडवाइजर महेश जोशी व प्रमोद मनोचा मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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लेखक योगेश त्रिपाठी द्वारा लिखित और इश्वर शून्य द्वारा निर्देशित नाटक मुझे अमृता चाहिए में एक लडक़ी के जीवन को दिखाया गया है। वह लडक़ी किस तरह से अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करती है और अंत में उसे कामयाबी भी मिल जाती है। दरअसल कहानी एक लडक़ी से शुरू होती है जिसकी शादी नहीं हो रही होती है। घर में मां बाप परेशान है। इसी बीच लडक़ी को एक थियेटर में काम करने का मौका मिल जाता है। थियेटर करते करते उसका आकर्षण रंगमंच की तरफ हो जाता है। वह रंगमंच से प्यार करना शुरू कर  देती है। वहीं दूसरी तरफ उसके घर वाले थियेटर से परेशान हो जाते है। वह उसे रोकते भी है लेकिन बाद में उसके पापा उसे नाटक करने देने की इजाजत दे देते है। नाटक करते वह लडक़ी अपनी मेहतन के बल पर एक बेहतरीन अदाकारा बन जाती है और अपनी मंजिल को छू लेती है। नाटक में जिस तरह से लडक़ी के किरदार को दिखाया गया वह काबिले तारीफ था। नाटक का मंचन संवाद फरीदाबाद ग्रुप द्वारा किया गया। जिसमें इशा पांडे, शिवानी, इश्वर शून्य, अमीर खान, रवशरण कौर, विनय कुमार, रजन गुप्ता, आशीष कुमार, अपर्णा ने बेहतरीन एक्टिंग की।

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नाटक में लाइटिंग का काम अभिजीत व साउंड पर अनस खान थे। इस दौरान संभार्य फाउंडेशन के मैनेजिंग डॉयरेक्टर अभिषेक देशवाल ने कहा कि संभार्य इसी तरह से कल्चर को बढ़ावा देने के लिए साल में कम से कम दो बार  थियेटर फेस्टिवल करता रहेेगा। उन्होंने ये भी कहा कि थियेटर करने के लिए सरकार कोई जगह मुहैया नहीं करवाती है।
इसलिए शहर के कलाकार जल्द ही एक बड़ा आंदोलन भी करेंगे ताकि कलाकारों की आवाज सरकार तक पहुंच जाए। इस मौके पर स्टूडेंट्स वेलफेयर असोसिएशन के प्रधान चिराग मोहना, समरसता मंच के अध्यक्ष गंगाधर त्यागी, एबीवीपी के  प्रदेश संगठन महामंत्री शैलेंद्र, इंजीनियर रोहित शेहरावत, दामोदर भरद्वाज, ब्रिज भारद्वाज, अनिल चेची आदि मौजूद थे।
ब्रिज नाटक मंडली द्वारा 22,23,24 जुलाई को नगर निगम सभागार में नाट्य मंचन फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें दिल्ली एनसीआर के मंजे हुए कलाकार अपने अभिनय से शहर के रंगमंच प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन करेंगे।
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3 comments:

  1. Commendable play good act by all artists. It helps one to grow one's skills and reflect the society through drama. Keep it up amd repeat the performance with some new act. Congrats to director ishwar shoonya and his team.

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  2. Ravsharan kaur u did pretty well in this play. Hope u do good in future too. Acting skills will help u to grow your inner values and creativity as well

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  3. This comment has been removed by the author.

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