Thursday, June 22, 2017

मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के गृह क्षेत्र में भीख मांग कर परिवार पाल रहे विकलांग का टूटा आशियाना


फरीदाबाद 22 जून,2017(abtaknews.com) फरीदाबाद में केन्द्रीय सामजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के गृह क्षेत्र में विकलांग परिवार दर-दर की ठोकरे खा रहा है। सैक्टर-30 स्प्रिंग फिल्ड कालोनी में झुग्गी बनाकर परिवार के साथ रह रहे विकलांग के सिर पर एक ही छत्त थी, जिसे प्रशासन ने छीन लिया। पिछले दिनों हो रही है बरसात से बचने के लिये अब पूरा परिवार मंदिर की शरण ले रहा है। जहां से भगाने के लिये पुलिस कर्मी बार - बार उसे चेतावनी भी दे रहे हैं, बच्चे पढ़ रहे है, लेकिन न तो कहीं रहने का ठोर-ठिकाना है और न ही खाने का कोई इंतजाम। ऐसे में यह विकलांग दंपति भीख मांगकर अपना और अपने बच्चों का भरण पोषण कर रहे हैं।
वैसे तो समाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय विकलांगों के लिए उपकरण देने के लिए जगह-जगह कैम्प लगाता है और विकलांगों की ही संभव सहायता करने का दम भरता है। लेकिन इसी मंत्रालय के मंत्री के गृहक्षेत्र में एक विकलांग परिवार न्याय के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहा है। यह है वैरव नाथ जो पैरो से विकलांग है और भीख मांगकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा है। पिछले 20 साल से यह यहां सैक्टर-30 स्प्रिंग फिल्ड कालोनी में झुग्गी बनाकर परिवार के साथ रहा है। उसके दो बच्चे लडका व लडकी है, जो दोनो ही पढ़ते है। लेकिन निगम प्रशासन ने पुलिस की मदद से उसके आशियाने को ही ढाह दिया। अब वह सडक़ पर है और फिलहाल मंदिर में शरण लिए हुए है।
 विकलांग भैरव नाथ का कहना है कि वह पहले गुटखा आदि बेचने का कार्य करता था। लेकिन पुलिस ने उसका सामान फैंक दिया और उसे भगा दिया। अब वह मंदिरों के पास भीख मांग कर अपने परिवार का गुजारा चलाता है और पिछले 20 साल से यहां झुग्गी डालकर रह रहा है। उसे भी प्रशासन ने तोड दिया। अब वे जाए तो कहां जाएं। बच्चे मंदिर में ही सोते है और वहीं पढ़ते है। लडका रोहित सातवीं में और बेटी लक्ष्मी तीसरी में पढ़ती है। झुग्गी न रहने से उनके सामने सिर छ़ुपाने और खाना बनाने की समस्या पैदा हो गई है और बच्चे भी नहीं पढ़ पा रहे है। अधिकारियों वे मंत्रियों को चाहिए कि वे विकलांगों के पुर्नवास के लिए कोई नीति बनाए ताकि उन्हे रहने और काम करने का अवसर मिल सकें।
वहीं विकलांग भैरवनाथ के परिवार जनों कहना है कि उन्हे झुग्गी टूटने से बहुत परेशानी हो रही है। कभी बच्चे खाना खा लेते है तो कभी भृूखा ही सो जाते है। पढऩे में भी उन्हे परेशानी हो रही। सरकार उनकी भी सुध लें।



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