Friday, June 23, 2017

भ्रष्टाचार विरोधी मंच के सत्याग्रह में फंसकर छटपटा रहा है नगर निगम प्रशासन

 

फरीदाबाद, 23 जून,2017(abtaknews.com) भ्रष्टाचार विरोधी मंच के संयोजक और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डा. ब्रहमदत्त पदमश्री ने नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त पार्थ गुप्ता की इस बात का कड़ा प्रतिवाद किया है कि यमुनानगर स्थानान्तरित किये गये निगम अधिकारी रतन लाल रोहिल्ला ने अपने स्थानान्तरण से पूर्व निगम के घोटालों की बात उजागर नहीं की, बल्कि सच्चाई यह है कि तबादला से पहले के निगम कार्यालय के दस्तावेज, रोहिल्ला के द्वारा हरियाणा सरकार व निग्मायुक्त को लिखे गये पत्र, आडियो कैसेट, निगम की कर्मचारी यूनियन का पत्राचार और समाचार पत्रों की कतरनें यह साबित कर रही है कि रतन लाल रोहिल्ला का स्थानान्तरण भ्रष्टाचार के विरोध में आवाज उठाने और राजनेताओं व अधिकारियों के कहने पर गैरकानूनी काम न करने के कारण ही किया गया है।  विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर उन्होंने यह भी खुलासा किया कि सत्याग्रह पर बैठने के नाम पर नगर निगम प्रशासन के द्वारा रतन लाल रोहिल्ला को अवकाश स्वीकृत किया गया था और अपने अवकाश आवेदन पत्र में रोहिल्ला के द्वारा लिखा गया था कि वह सत्याग्रह की समाप्ति तक कार्यालय में उपस्थित नहीं हो सकेगा तो निगम प्रशासन के द्वारा अब सत्याग्रह को अनुचित कैसे ठहराया जा सकता है जबकि यह सत्याग्रह शांतिपर्वूक तरीके से निगम हित में और हरियाणा सरकार की भ्रष्टाचार को दूर करने की नीति के अनुरूप ही किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि शायद रतन लाल रोहिल्ला भारतवर्ष का इकलौता ऐसा सरकारी अधिकारी है जो सिस्टम के भ्रष्टाचार के विरोध में अपने ही विभाग के विरूद्ध सत्याग्रह  पर बैठ गया है, अत: सरकार को इसे प्रताडि़त करने की बजाए सम्मानित किया जाना चाहिये।
डा. ब्रहमदत्त ने आज यहां जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में बताया कि आन-रिकार्ड यह तथ्य है कि रोहिल्ला के नेतृत्व में वर्ष 2012 में 53 दिनों तक भ्रष्टाचार के विरोध में जोरदार आंदोलन हुआ, सरकार को कमेटी बनानी पड़ी, हरियाणा सरकार की ओर से राज्य के तत्कालीन वित सचिव संजीव कौशल ने दिनांक 9 मई 2013 को कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के निर्देश नगर निगम को दिये, जो कि आज तक भी लागू नहीं किये गये हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये सिफारिशें लागू हो जाती आज स्थिति कुछ और होती। इसके बाद भी सिस्टम में रहते हुए रोहिल्ला के द्वारा निरंतर भ्रष्टाचार का विरोध किया जाता रहा, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान निग्मायुक्त के समय में ही उसे 25 सितम्बर 2016 को राज्य के पुलिस महानिदेशक विजिलैंस के समारोहपूर्वक सम्मानित भी किया गया।  
उन्होंने बताया कि 25 जनवरी 2017 को राज्य के एक मंत्री के पी.ए. होने का दावा करने वाले व्यक्ति ने गलत काम न करने पर रोहिल्ला को धमकी दी गई, मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारियों को शिकायतें की गई, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गइ। इसके बाद 3 फरवरी रोहिल्ला को उसके मूल स्थापना अधिकारी के पद से हटा दिया गया और फिर 8 फरवरी को उस पर सरकारी डयूटी के दौरान जानलेवा हमला किया गया।  ईलाज के बाद 10 मार्च को डयूटी ज्वाईन की, स्वतंत्रतापूर्वक काम नहीं करने दिया गया, और छुट्टी पर जाने के लिए मजबूर किया गया। 22 मार्च 2017 को प्रस्तुत अवकाश आवेदनपत्र में रोहिल्ला ने स्पष्ट किया कि उसके उपर पुन: हमला करवाया जा सकता है, उसकी हत्या करवाई जा सकती है, उसपर झूठे मुकदमे दर्ज करवाए जा सकते हैं, उसका फरीदाबाद से बाहर स्थानान्तरण करवाया जा सकता है, उसे अनेकों तरह की मानसिक, सामाजिक, शारीरिक, राजनीतिक व प्रशासनिक प्रताडऩा का शिकार बनाया जा सकता है। इन सबके बावजूद अवकाश पर भेज दिया गया।  अपने अवकाश काल में भी इस अधिकारी के द्वारा मीडिया के माध्यम से निगम के भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठाई जाती रही।  इस बीच 15 मार्च 2017 को निगम की कर्मचारी यूनियन ने भी मुख्यमंत्री को एक पत्र प्रेषित कर रोहिल्ला के स्थानान्तरण की आशंका प्रकट करते हुए ईमानदार अधिकारी का तबादला न करने की अपील क
मंच संयोजक के अनुसार 8 मई 2017 को अवकाश के बाद ज्वाईन करने के बाद इस अधिकारी पर गलत काम करने के लिए दबाब बनाया गया लेकिन नाजायज दबाब न मानने पर ज्वाईनिंग के 4 दिन के बाद ही 12 मई 2017 को इनका ऐसी जगह स्थानान्तरण कर दिया गया है जहां इनका पद स्वीकृत ही नहीं है और नगर निगम प्रशासन स्वयं तबादला आदेशों को गलत ठहरा चुका है।  


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