Tuesday, June 13, 2017

स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ समाज का द्योतक


फरीदाबाद, 13 जून,2017(abtaknews.com ) :  स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ समाज का द्योतक है। स्वस्थ्यता से मानसिक विकृति उत्पन्न नहीं होती और यह तभी संभव है जब व्यक्ति अपनी दिनचर्या में कुछ समय योग प्राणायाम के लिए निकाले। यह बात आर्य कन्या गुरूकुल ट्रस्ट हसनपुर एवं आर्य समाज सैक्टर-19 फरीदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे योग के द्वारा चश्में से मुक्ति प्रयास शिविर में साधकों को संबोधित करते हुए आचार्य अमन ङ्क्षसह शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि भागदौड़ की इस जिंदगी में व्यक्ति एक मशीन बनकर रह गया है यदि किसी भी मशीन को बिना आराम दिए चलाते रहे तो उसमें नुक्सान होता है वही हालत मानव शरीर की होती है। लोगों के आज खान-पान, व्यवहार-आचार में परिवर्तन आया है, व्यक्ति सबसे आगे निकलने की दौड़ दौड़ रहा है, लेकिन वह यह भूल जाता है कि इसके कारण उसे कितनी बीमारियों ने घेर लिया है या फिर घेरने के लिए तैयार खड़ी है। इससे उसे मानसिक तनाव, डिप्रेशन तथा बैठे-बैठे खाते रहने से अनेक पेट की बीमारियां चल रही है। उन्होंने कहा कि योग और प्राणायाम हमारी पुरानी संस्कृति है। ऋषि मुनि इसी के बलबूते अपनी आत्मा को परमात्मा से मिलाने की क्षमता रखते थे लेकिन आज व्यक्ति भाई-भाई से, पडोसी-पडोसी से मिले का समय नहीं निकाल पा रहा है। हमें योग को अपनाने की आवश्यकता है, क्योंकि शरीर स्वस्थ है तो सबकुछ ठीक है।


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