Monday, June 5, 2017

विश्व बैंक की परियोजना के अंतर्गत वाईएमसीए विश्वविद्यालय का चयन, सात करोड़ का अनुदान


फरीदाबाद, 5 जून,2017(abtaknews.com) वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद का चयन विश्व बैंक से सहायतार्थ तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी-3) के अंतर्गत हुआ है तथा विश्वविद्यालय को सात करोड़ रुपये आवंटित हुए है। इस परियोजना को केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय परियोजना क्रियान्वयन इकाई की देखरेख में ‘केन्द्रीय क्षेत्र योजना’ के रूप में क्रियान्वित किया जा रहा है।तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के तीसरे चरण में चयन पर प्रसन्नता जताते हुए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि वाईएमसीए विश्वविद्यालय अपने विकास में चरण में है, जिसमें यह परियोजना विश्वविद्यालय के विकास के लिए वरदान साबित होगी। उन्होंने कहा कि वाईएमसीए विश्वविद्यालय में प्रयोगशालाओं को अपग्रेडेशन, शोध सुविधाओं के विस्तार तथा अन्य ढांचागत सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ कर्मचारियों व संकाय सदस्यों के प्रशिक्षण को लेकर कार्य किया जाना है, जिससे विश्वविद्यालय गुणात्मक तकनीकी शिक्षा प्रदान करने के मामले में और अधिक सशक्त बनेगा। 

प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय के काफी कम समय में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल की है। विश्वविद्यालय को नैक द्वारा ‘ए’ ग्रेड प्राप्त हुआ है तथा राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ-2017) की नवीनतम रैंकिंग में विश्वविद्यालय को राज्य के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में स्थान दिया गया है। कुलपति ने परियोजना समन्वयक डॉ विक्रम सिंह तथा डॉ मनीष वशिष्टि के प्रयासों की सराहना की तथा परियोजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत मिलने वाले फंड के सही प्रयोग सुनिश्चित किया जाये ताकि विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।

कुल सचिव डॉ. संजय कुमार शर्मा ने परियोजना के अंतर्गत चयन पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय के विकास में मदद मिलेगी और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता में भी सुधार आयेगा।विश्व बैंक से सहायतार्थ इस परियोजना के क्रियान्वयन के अंतर्गत विश्वविद्यालय को सीधे फंड प्राप्त करने की सुविधा होगी तथा इस फंड का प्रयोग अकादमिक स्तर में सुधार, विभिन्न संकाय पदों पर भर्ती, कर्मचारियों व संकाय सदस्यों के प्रशिक्षण, अनुसंधान सुविधाओं में सुधार तथा विद्यार्थियों के अध्ययन को मूल्यांकन करने संबंधी प्रणाली विकसित करने पर किया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी) इंजीनियरिंग संस्थानों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए केन्द्र सरकार तथा विश्व बैंक का एक संयुक्त प्रयास है। देश में तकनीकी शिक्षा में उत्कृष्टता लाने के उद्देश्य से क्रियान्वित इस दीर्घकालीन परियोजना को तीन चरणों में बांटा गया था, जिसका पहला चरण 2003 में प्रारंभ हुआ और 2009 तक चला। इसका दूसरा चरण 2010 में प्रारंभ होकर 2016 तक चला और तीसरे चरण 2017 से प्रारंभ हुआ है, जिसकी अवधि 14वें वित्त आयोग (2019-20) के साथ संबद्ध है। 

loading...
SHARE THIS

0 comments: