Tuesday, June 13, 2017

‘‘कली कली- खिली खिली’’ चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन समारोह



लखनऊ, (संदीप पाल)(abtaknews.com )परमेश्वर स्वयं फलक है। स्वयं तूलिका हैं स्वयं चित्रकार है। स्वयं दृष्टा है। विश्व चित्र को चित्रत कर , स्वयं उसे देखकर प्रसन्न होता है। समस्त प्रकृति उसका मनोरम चित्र है। इस भवना से प्रेरित होकर आनन्द ऋचा एवं मीनाक्षी श्रावनी ने ‘‘कली कली - खिली खिली’’ चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला एकादमी क्षेत्रीय कला वीथिका न0 - 1 एकता विहार, अलीगंज लखनऊ - 226024 में किया है। प्रदर्शनी 12 जून 2017 से 18 जून 2017, प्रातः 11.00 बजे से सायं 7.00 बजे तक अवलोकनार्थ खुली रहेगी। प्रदर्शित चित्रों मे उनकी अज्ञात सृजनशील सम्भावनाओं के मृदुल स्वरों का गुंजन स्पष्ट सुनाई देता है, जो कमल की पंखुड़ियों पर उषाकालीन आभा में झिलमिलाते ओस कणों की भांति सुन्दर है।
‘‘कली कली - खिली खिली’’ चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन सुतापा सान्याल एडीशनल डायरेक्टर जनरल आॅफ पुलिस्, ह्यूमन राइटस एण्ड महिला सम्मान उत्तर प्रदेश लखनऊ, ने दीप प्रज्ज्वलित करते हुए इन शब्द के साथ किया। किसी राष्ट्र की संस्कृति के स्तर का माप उसकी कला द्वारा होता है। कला संस्कृति का श्रंृगार है।
कुशल कला समीक्षक के रूप में प्रदर्शनी के चित्रों का सहृदयतापूर्वक निरीक्षण किया। उन्होंने चित्रों की परिकल्पना के विषय में आनन्द ऋचा व मीनाक्षी से पूछा भी और अपनी सद्भावना एवं प्रोत्साहनरूपी टिप्पणी के स्ट्रोक्स से उनकी कला संवेदना को जीवांत भी किया। कला अपनी सहज, पूर्ण और मुक्त लवलीनता में आनन्द का अनुभव कराती है। कला अपनी सम्पूर्ण दृष्टि के कारण सत् और असत् दोनों को स्वीकार करती है और उनके छोरो को गहराई, ऊचांई व सारे फैलाव में छूती है। कला सौदन्र्य की अभिव्यक्ति है। कलाकारों का रचानात्मक आवेग प्रदर्शित चित्रों में प्रस्फुटित का आतुर परिलक्षित होता है।चित्रकला प्रदर्शनी के उद्धाटन समारोह के अवसर पर वरिष्ठा पत्रकार शरत प्रधान, पूर्व आई. ए. एस अनीस अंसारी, पूर्व सी एम ओ लखनऊ डॉ ए के शुक्ला, वरिष्ठा उपाधयक्ष टी एम सी उत्तर प्रदेश सौरभ बंधोपाध्याय समेत तमाम जानीमानी हस्तियां उपस्थित थी |

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