Saturday, June 3, 2017

आंगनबाडी केन्द्र में रसोई गैस की जगह लकडियों से चूल्हे पर बन रहा है बच्चों के लिये खाना


फरीदाबाद 3 जून(abtaknews.com )फरीदाबाद के गांव समयपुर में आंगनबाडी  केन्द्र पर कर्मचारी भाजपा सरकार की उज्ज्वला योजना को पलीता लगाते हुए नजर आ रहे हैं, सरकार पूरे देश को कैरोसीन मुक्त करने व पर्यावरण को शुद्ध बनाने के लिये घर - घर तक रसोई गैस पहुंचाने के लिये प्रयासरत है, मगर यहां सरकार के नुमायंदे ही सरकारी योजनाओं को ठेंगा दिखा रहे हैं। जब मीडिया द्वारा समयपुर की आगनबाडी केन्द्र पर कवरेज की गई तो आंगनबाडी केन्द्र में मिट्टी का चूल्हा और प्रयोग की जाने वाली लकडी और अन्य सामिग्री दिखाई दी जिसे बच्चों के लिये बनाये ज रहे खाने में प्रयोग किया जा रहा है। देखने पर आसपास केन्द्र में कहीं भी रसोई गैस का अता पता नहीं था। इस बारे में आंगनबाडी वर्कर और गांव की सरपंच से बात की गई तो वो भी सबालों को टालते हुए दिखे और ग्रामीणों ने अरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र की योजनायें सरकारी कर्मचारियों के लिये सफेद हाथी हैं। दिखाई दे रहा ये चूल्हा और लकडी किसी गांव के घर परिवार की नहीं है बल्कि सरकारी आंगनबाडी केन्द्र की हैं, और ये केन्द्र फरीदाबाद के गांव समयपुर का है जहां सरकार के लाख कहने के बाद भी रसोई गैस की जगह लकडी और अन्य धुआं निकालने वाली ज्वलनशील सामिग्री मिली है, जिसका उपयोग बच्चों के लिये खाने बनाने में किया जाता है, केन्द्र सरकार पूरे देश को कैरोसीन मुक्त करने व पर्यावरण को शुद्ध बनाने के लिये घर - घर तक रसोई गैस पहुंचाने के लिये प्रयासरत है, मगर यहां सरकार के नुमायंदे ही सरकारी योजनाओं को ठेंगा दिखा रहे हैं। 
इस बारे में आंगनबाडी वर्कर अशोक कुमारी से बात की गई तो वो इस बात को मानने के लिये तैयार ही नही हुए कि आंगनबडी केन्द्र में चूल्हा और लकडी का ईधन पडा है और गैस चूल्हा दूर - दूर तक नहीं है, साथ ही उन पर ग्रामीणों द्वारा बच्चों के लिये आने वाले राशन को अपने घर में प्रयोग करने की बात को भी नहीं माना।
वहीं सरपंच कमलेश की माने तो वो खुद आंगनबाडी केन्द्र पर हर सफ्ताह निरीक्षण करती है उन्हें सब कुछ ठीक नजर आता है, साथ ही उन्होंने कहा कि जब कभी गैस खत्म हो जाती है तो लकडी का चूल्हा प्रयोग किया जाता है, एक तरफ आंगनबाडी वर्कर मानने को तैयार नहीं है कि वो लकडी प्रयोग करती हैं दूसरी ओर सरपंच ये मान रही है कि गैस खत्म होने पर लकडी का चूल्हा प्रयोग करते हैं। दोनों की अलग - अलग प्रतिक्रियायें कुछ ठीक न होने का संदेश दे रही हैं।
वहीं इस पूरे मामले में ग्रामीणों का अरोप है कि आंगनबाडी में वर्कर न तो बच्चों को पढाती हैं और न ही उन्हें खाना देती है जो भी खाने की सामिग्री आती है उसे या तो बेच देती है या फिर अपने घर में प्रयोग कर लेती हैं।
वहीं इस मामले में केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर से बात की गई तो उन्होंने सबाल को पलटते हुए कहा कि अभी तक सिर्फ 2 करोड परिवारों को गैस सुविधा मिल रही है 2018 तक सभी को मिलना शुरू हो जायेगी।

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