Tuesday, June 27, 2017

भ्रष्टाचार विरोधी मंच व निग्मायुक्त के बीच मीटिंग रही बेनतीजा


फरीदाबाद, 27 जून,2017(abtaknews.com ) फरीदाबाद नगर निगम में व्याप्त महाभ्रष्टाचार के विरोध में चल रहे आंदोलन के 42वें दिन अनशनकारी बाबा रामकेवल के आमरण अनशन के दबाब में अन्ततः निग्मायुक्त सोनल गोयल की पहल पर भ्रष्टाचार विरोधी मंच व निग्मायुक्त के बीच आज दोपहर बाद बातचीत हुई।  मंच की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डा. ब्रहमदत्त पदमश्री व समाज सेवी वरूण श्योकंद और निगम प्रशासन की ओर से निग्मायुक्त के इलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे।  बैठक में मंच ने मांग रखी की कि निगम के सिस्टम को ठीक करने के लिए व भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी व लेखा विशेषज्ञ व सामाजिक कार्यकताओं को मिलाकर के एक विशेष जांच बनाने की निग्मायुक्त सिफारिश करें, जिस पर निग्मायुक्त ने मंच को इस बारे में सरकार को उचित सिफारिश करने का आश्वासन दिया और अब तक हुए सभी पत्राचार की प्रतियां मंच को देने के निर्देश अपने अधीनस्थ अधिकारियों को दिये। बैठक के बाद डा. ब्रहमदत्त ने एलान किया कि मांगों को पूरा किये जाने तक उनका आंदोलन न केवल जारी रहेगा बल्कि इस आंदोलन को और अधिक तेज किया जायेगा।  यह भी हो सकता है कि रतन लाल रोहिल्ला या वरूण श्योकंद जैसे मंच के कार्यकताओं में से कोई एक अनशनकारी बाबा जी के साथ आमरण अनशन शुरू कर दे।
 मंच की ओर से पिछले दिनों निगम के अतिरिक्त आयुक्त के द्वारा जारी किये गये तथ्यहीन ब्यान पर कड़ा एतराज जताते हुए यह भी स्पष्ट किया गया कि उनका संघर्ष निग्मायुक्त सहित किसी व्यक्ति विशेष के विरूद्ध न होकर के भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों से है।  उन्होंने निग्मायुक्त को कहा कि निगम प्रशासन शांतिपर्वूक आंदोलन को डिस्टर्ब करने का प्रयास न करें और रोहिल्ला सहित अवकाश लेकर आंदोलन का सहयोग कर रहे निगम कर्मियों को प्रताड़ित करने का प्रयास न करें अन्यथा ऐसे किसी भी प्रशासनिक कार्यवाही का कड़ा प्रतिरोध किया जायेगा।
बैठक में हुए विचार-विमर्श का ब्यौरा देते हुए डात्र ब्रहमदत्त व वरूण श्योकंद ने बताया कि निग्मायुक्त ने बैठक में स्वीकार किया कि नगर निगम में सिस्टम ठीक नहीं और भारी पैमाने पर सुधार किये जाने की जरूरत है, लेकिन वह अपने स्तर पर इन सुधारों को करने की स्थिति में नहीं है, अतः वह स्वयं मंच के द्वारा उठाए गए सभी मामलों की जांच करवाने के लिए अपनी ओर से सरकार को सिफारिश कर चुकी है, जिसकी प्रति मंच को दी जा चुकी है। इस पर मंच प्रतिनिधियों ने निग्मायुक्त को बताया कि उन्हें ऐसे किसी पत्र की प्रति नहीं दी गई है और रतन लाल रोहिल्ला को अभी तक तबादला आदेश तक डिलीवर नहीं किये गये हैं तो निग्मायुक्त ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों का लताड़ लगाई।   जब निग्मायुक्त को यह बताया गया कि तबादला आदेश दिये बिना त्रुटिहीन आदेशों के आधार पर रोहिल्ला को रिलीव कैसे कर दिया गया तो निग्मायुक्त निरूतर हो गई।  डा. ब्रहमदत्त ने बैठक में स्वीकार किया कि सरकारी कर्मियों का तबादला एक निरंतर चलने प्रक्रिया है, लेकिन रोहिल्ला के आदेशों में भ्रष्टाचार के विरूद्ध बोलने पर उसका मुंह बंद करने की बू आ रही है। यह निगम की खुशकिश्मती है कि रोहिल्ला जैसा व्यक्ति निगम का अधिकारी है, जिसे हत्तोसाहित करने की बजाए सम्मानित किया जाना चाहिये।

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