Friday, June 9, 2017

विधवा सीमा दर्द भरी दास्तां सुनाते सुनाते बोली दुनियां में उडान भरने दें बच्चियों को, ना हों मेरे जैसे हाल


फरीदाबाद 9 जून,2017(abtaknews.com)11 साल की उम्र में हुई शादी, 14 साल की उम्र में बनी मां, 17 साल की उम्र में पति ने छोडा और 24 साल की उम्र में हो गई विधवा - ये दर्द भरी कहानी है फरीदाबाद की 29 बर्षीय सीमा की है। कबीरपंथी सीमा आज कबीरदास जयंती पर दास्तां सुनाते हुए रो - पडी। सीमा ने कबीरदास जयंती पर आयोजित हुए कार्यक्रम में सत्यम शिवम सुंदर गाने पर शोलो नृत्य कर सबका मन जीत लिया और अपने लिये हजारों सहानुभूतियां बटोरी। नाबालिक रहते हुए सीमा तीन बच्चों की मां बनी और फिर पति द्वारा छोड दिये जाने पर कोठियों में बाई का काम कर अपने बच्चों को पालने पोषने लगी। अपनी जिंदगी के साथ हुए खिलवाड से दुखी सीमा ने लोगों से अपील की कि अपनी बेटियों को उडान भरने दें कम उम्र में शादी कर उनकी जिंदगी बर्बाद न करें।
 29 बर्षीय सीमा के उस वक्त आखों से आंसू छलक गये जब फरीदाबाद के सैक्टर 12 स्थित कन्वेंशन हॉल में कबीरदास की जयंती पर सत्यम शिवम सुंदर गाने पर शोलो नृत्य करने के बाद मीडिया को अपनी आप बीती सुनाने लगी, इस कार्यक्रम में केबिनेट मंत्री विपुल गोयल और नगर निगम उप महापौर  सहित कई अधिकारीगढ मौजूद थे। गमों से लड रही सीमा ने सत्यम शिवम सुंदर गाने पर शोलो नृत्य कर सबको आश्चर्य चकित कर दिया और दिखा दिया कि हौंसले बुलंद हों तो हर कठिनाई आसान हो जाती हैं। 
इस बारे में सीमा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 11 साल की उम्र में उसके माता पिता ने उसकी शादी कर दी, शादी के कुछ समय बाद 14 साल की बाली उम्र में ही मां बन गई, बेटी को जन्म देने के बाद दो बच्चों को और जन्म दिया। कम उम्र में ग्रहस्थी संभालने वाली सीमा को उसके पति ने 12 साल पहले छोड दिया इस वक्त अकेली रही सीमा का न तो उसके माता पिता ने साथ दिया और न ही ससुराल वालोंने। सीमा ने अपने बच्चों की परवरिस के लिये कोठियों काम करना शुरू किया और अपने बच्चों को पढाने लिखाने लगी, इसी बीच 24 साल की उम्र उसके पति की मौत हो गई, और जिस उम्र में लडकियों की शादी की जाती है उस उम्र तक पहुंचते पहुंचते सीमा सुहागन से विधवा बन चुकी थी। सीमा को इस दौरान फरीदाबाद डा. भीमराव अम्बेडकर एजुकेशनल सोसाईटी चलाने वाले ओ पी धामा और उनकी पत्नी का साहरा मिला और धीरे - धीरे जिंदगी से लडते लडते वो अब 29 साल की आयु में पहंच गई। सीमा ने पूरी आपबीती बताने के बाद समाज के लोगों से अपील की कि बेटियों को जीने दें उन्हें दुनियां में उडान भरने दें कम उम्र में उनकी शादी कर उनका आजादी न छीनें। वहीं डा. भीमराव अम्बेडकर एजुकेशनल सोसाईटी चालने वाले ओपी धामा की माने तो उन्हें लडकी की परेशानियों के बारे में पता चला तो उन्होंने अपनी एजुकेशनल सोसाईटी में उसे जगह दी और उसके अंदर छुपी हुई प्रतिभा को देखते हुए एक प्लेटफॉर्म दिया।

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