Wednesday, June 21, 2017

तीन साल में 7 करोड़ के इलैक्ट्रोनिक्स सामान पर खर्च के बावजूद ऑनलाइन नहीं नगर निगम


फरीदाबाद, 21 जून,2017(abtaknews.com) एक ओर राज्य के मुख्यमंत्री ने नगर निगम में आम नागरिकों से सम्बन्धित जन्म मृत्यु पंजीकरण, शादी पंजीकरण, नक्शे स्वीकृत करने, फायर एन.ओ.सी., बिजनेस लाईसेंस, पानी व सीवर आदि सुविधाओं को आन-लाईन न करने को गंभीरता से लिया है वहीं भ्रष्टाचार विरोधी मंच ने फरीदाबाद नगर निगम के सिस्टम को हाईटेक करने के नाम पर निगम को करोड़ो रूपये की राशि का नुकसान करने का निगम प्रशासन पर आरोप लगाया है। आर.टी.आई. से प्राप्त जानकारी के आधार पर मंच के संयोजक अनशनकारी बाबा रामकेवल और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डा. ब्रहमदत्त ने बताया कि जनवरी 2014 से लेकर 20 मई, 2017 तक की अवधि में लगभग सात करोड़ रूपये के कम्पयूटर प्रिन्टर व अन्य इलैक्ट्रोनिक्स सामान की खरीद फरोख्त करने के बावजूद अभी तक नगर निगम की एक भी शाखा हाईटेक नहीं हुई है, जिससे स्पष्ट रूप से एक बहुत बड़ा घोटाला साबित हो रहा है।  उन्होंने आज यहां बताया कि फरीदाबाद नगर निगम में वर्ष 2008 से नगर निगम के कराधान विभाग के कम्पयूटराईजेशन करने का कार्य प्राईवेट ठेकेदारों/एजेन्सियों से करवाया जा रहा है, जिसकी एवज़ में हार्डवेयर, साॅफ्टवेयर और मेनपावर उपलब्ध करवाने के बदले में करोड़ो रूपये का भुगतान अनेकों कम्पनियों को किया जा चुका है।  उन्होंने अत्यधिक आश्चर्य व दुःख व्यक्त करते हुए कहा है कि करोड़ों रूपये की अदायगी के बावजूद कराधान विभाग का जो रिकार्ड वर्ष 2008 में बेहतर स्थिति में था, वह रिकार्ड आज बुरी अवस्था में पहंच चुका है यानि कि बेहतर परिणाम सामने आने की बजाय करोड़ों रूपये की अदायगी करने के बावजूद आउटपुट शून्य  है।  उन्होंने अत्यधिक दुःख भरे शब्दों में बताया कि यदि कोई करदाता अपने सम्पति कर की आनलाईन अदायगी करता है तो उसकी इन्ट्री निगम के कराधान विभाग के कर्मचारियों को मैन्युली करनी पड़ती है और ऐसा करके निगम प्रशासन सरकार की आंखों में धूल झोंक रहा है।

उन्होंने आरोप लगया कि ऐसी ही एक कम्पनी का ठेका गम्भीर अनियमितताओं के आधार पर तत्कालीन आयुक्त डा. सुप्रभा दहिया, के द्वारा वर्ष 2014 में रद्द कर दिया गया था।  उन्होंने आरोप लगाया है कि यह कम्पनी निगम के कुछेक अधिकारियों से मिलीभगत करके अपने रद्द हुए ठेके को बहाल करवाने की फिराक में है । उन्होंने आरोप लगाया है कि नगर निगम के कराधान विभाग के रिकार्ड की दुर्दशा करने के लिए उक्त कम्पनी सहित इसके बाद निगम में आई अन्य कम्पनियों के साथ-साथ निगम के वे अधिकारी भी समान रूप से जिम्मेवार हैं, जिन्होंने इन कम्पनियों की भली-भान्ति जांच पड़ताल किये बिना इन्हें निगम का ठेका दे दिया, जिसके दुष्परिणाम अब नगर निगम व आम जनता भुगत रही है। मंच ने महापौर सहित नगर निगम के सभी पार्षदोंगणों से कहा है कि वे जनता के पैसे की लूट पर अपनी चुप्पी तोड़े और खुलकर के सामने आए।  उन्होंने निग्मायुक्त से भी कहा है कि वह अपनी हठधर्मिता का त्याग करें, टकरावपूर्ण रवैया छोड़े और सच्चाई से राज्य सरकार को अवगत करवाते हुए विशेष जांच दल का गठन करवायें।

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