Friday, May 26, 2017

गुरुकुल की तरह’ पेड़ों की छांव में बच्चों को मिलता है ज्ञान, निशुल्क शिक्षा को समर्पित सविता दत्त की अनोखी मुहिम


savita-dutt-free-education-give-to-street-childrens-faridabad

फरीदाबाद (abtaknews.com)26 मई,2017; भारतीय संस्कृति एवं शिक्षा के जड़ें कहे जाने वाले गुरुकुल पद्धति पर विगत 13 सालों से पेडों की छाव में बच्चो को शिक्षा दी जा रही है।  चमक धमक और मोटी फीस वसूली करने वाले निजी स्कूलों को मात देने वाला इकोफ्रेंडली स्कूल चल फरीदाबाद में ही चलता है, जिसमें पढने वाले 50 - 100 नहीं बल्कि 500 से भी अधिक विद्यार्थी है जिन्हें मुफ्त में शिक्षा के साथ - साथ किताब कॉपियां और यूनीफार्म दी जा रही है। ये स्कूल फरीदाबाद के तीन अलग अलग स्थानों पर चलाये जा रहे हैं जिसका मुख्य स्कूल सेक्टर 21 ए में है जो कि 12 वीं कक्षा तक चलता है। इस स्कूल को शुरू करने वाली कोई संस्था नहीं बल्कि 73 बर्षीय महिला सविता दत्त है जो कि अपनी सरकारी नौकरी को छोडकर गरीब बच्चों को शिक्षित करने का वीणा उठाये हुए है। समाजसेवी महिला सविता दत्त ने 7 बच्चों से 2003 में सेक्टर 21 ए के पार्क में पेडों के नीचे स्कूल शुरू किया था, जिसे आज प्रकाश दीप का नाम दे दिया गया है। 
73 वर्षीय सविता दत्त का इकोफ्रेंडली स्कूल। जहां रोज करीब 300  बच्चे यूनिफार्म में स्कूल आते हैं। शहर के सेक्टर-21ए के पार्क में रोज सुबह 8 से 1.30 बजे तक गुरुकुल की तरह’ पेड़ों की छांव में बच्चों की क्लास लगती हैं। स्कूल का रिजल्ट भी शत-प्रतिशत रहता है। इस तरह के दो और स्कूलों में अलग-अलग 200 - 100 बच्चे पढ़ते हैं। 2003 में सविता ने बस्तियों में रहने वाले सात बच्चों को इक_ा किया। घर के सामने बने पार्क में पढ़ाना शुरू किया। लोग उन पर हंसते और मजाक बनाते। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। धीरे-धीरे बच्चे खुद उनके पास आने लगे। वे कहती हैं कि प्राचीन समय में भी तो बच्चे गुरुकुल में पेड़ों की छांव में पढ़ते थे। वे भी बच्चों को इकोफ्रेंडली माहौल में पढ़ा रही हैं। सविता की सोच पूरे देश में इस तरह के स्कूल खोलने की है। जिससे कोई भी बच्चा सिर्फ इस वजह से क्वालिटी एजुकेशन से दूर रहे कि वह से अच्छे प्राइवेट स्कूल में एडमिशन नहीं ले सकता।

शिक्षाविद सविता दत्त का स्कूल तीन जगह चलता है। सेक्टर-21ए के पार्क के अलावा दूसरा स्कूल सेक्टर-21सी में फ्लाईओवर के नीचे है। यहां करीब 100 बच्चे पढ़ते हैं। सेक्टर-21डी में हुडा के निर्माण केंद्र में पेड़ों के नीचे तीसरा स्कूल चलता है। यहां करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं। वे बताती हैं कि बारिश में दिक्कत तो होती है, लेकिन हमारा उद्देश्य है कि बच्चों को प्राकृतिक माहौल में शिक्षा दी जाए। बारिश के दौरान बच्चों को जल्दी छुट्टी दे दी जाती है। ज्यादा गर्मी के मौसम में स्कूल जल्दी लगाते हैं। सिर्फ बड़े फेस्टिवल को छोडकऱ कोई छुट्टी नहीं दी जाती ताकि बारिश के दौरान छुट्टी देने की वजह से जो पढ़ाई प्रभावित होती है, उसे कवर किया जा सके।

इकोफ्रेंडली स्कूल की संस्थापक समाजसेवी सविता दत्त नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस में बतौर रिसर्च आफिसर कार्यरत थीं। उन्होंने बताया कि सविता के अनुसार स्कूल नर्सरी से 12वीं तक इंग्लिश मीडियम है। एक घर किराए पर लिया है। जहां बच्चों को कंप्यूटर सिखाया जाता है। बोर्ड की क्लास में बच्चों को ओपन स्कूल से एडमिशन दिलाया जाता है। पढ़ाने को 10 से 15 वेल एजुकेटेड वालंटियर्स हैं। वे बच्चों को इंग्लिश, मैथ, साइंस पढ़ाते हैं। पढ़ाने के लिए 21 टीचर हैं। 12वीं के बाद बच्चों को आगे पढ़ाई कराने में मदद की जाती है।


loading...
SHARE THIS

0 comments: