Thursday, May 25, 2017

न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के ज्ञापन से न्यायपालिका में हो रहे हैं बड़े सुधार!



फरीदाबाद 25 मई,2017(abtaknews.com) न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट एल.एन. पाराशर का संघर्ष रंग लाने लगा है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं मुख्य न्यायाधीश को दिए ज्ञापन में रखी गई मांगों पर सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है। इससे देश भर के वकीलों में खुशी की लहर है और माना जा रहा है कि न्यायपालिका में से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सरकार एक आयोग का गठन भी करने जा रही है।
एडवोकेट एल.एन. पाराशर ने बताया कि देश भर की अदालतों में काम करने वाले चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी जजों द्वारा किए जा रहे शोषण से बेहद परेशान थे। इसको लेकर न्यायिक सुधार संघर्ष समिति द्वारा ज्ञापन में एक मुद्दा यह भी उठाया गया था कि जजों द्वारा कोर्ट में काम कर रहे चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का शोषण बंद किया जाए क्योंकि अधिकांश जज कार्यालय में काम करने वाले चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों से अपने घर का काम करवाते थे और उनसे अपने घर पर खाना बनवाने से लेकर बर्तन मंझवाने तक का काम करते थे। लेकिन अब न्यायिक सुधार संघर्ष समिति की मांग को मानते हुए भारत सरकार के निर्देश पर हरियाण पंजाब हाईकोर्ट के अंतर्गत जितने भी कोर्ट हैं उनके सभी न्यायिक अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वह 30 जून से पहले अपने घरों पर होम पीयून नियुक्त कर लें, अब से पहले कार्यालय के कर्मचारियों से ही घर के काम कराये जाते थे। लेकिन अब अलग से घरेलू कामों के लिए चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को नियुक्त किया जाएगा, इससे देश भर की कोर्ट में काम करने वाले चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एल.एन. पाराशर ने कहा कि समिति के तत्वाधान में न्यायापालिका के सुधार को लेकर लगातार संघर्ष किया जाएगा एवं सरकार से मांग की जाएगी कि अच्छे जजों को प्रमोशन दी जाए एवं भ्रष्टाचारियों के खिलाफ तुरंत जांच एवं कार्यवाही का प्रावधान हो। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका में बढ़ते काम के बोझ को लेकर वह सरकार से मांग कर चुके हैं कि नए जजों की नियुक्तियां की जानी चाहिए और उसी अनुपात में कोर्ट के कर्मचारियों को भी बढ़ाया जाना चाहिए। इससे निश्चित तौर पर न्याय व्यवस्था को गति मिलेगी और न्यायपालिका में सुधार हो सकेगा। श्री पाराशर ने यह भी कहा कि उनकी लड़ाई न्यायपालिका से नहीं है अपितु न्याय के हित में है और न्याय के हित में ही देश की न्यायपालिका का हित छिपा हुआ है। जब तक लोगों का विश्वास न्यायपालिका पर बना रहेगा तब तक इस देश की एकता, अखंडता और विकास को कायम रखा जा सकता है। लेकिन अगर न्यायपालिका में कुछ गलत लोगों के कारण पूरी न्यायपालिका की छवि प्रभावित होती है तो निश्चित तौर पर इसका भारी नुकसान पूरे देश को भुगतना पड़ सकता है। इसलिए वह हमेशा से ही आवाज उठाते रहे हैं कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार समाप्त होना चाहिए और अच्छे जजों को प्रमोशन मिलनी चाहिए। भ्रष्ट जजों को बर्खास्त किया जाना चाहिए। जजों के भ्रष्टाचार को लेकर आयोग बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा प्रेक्टिस में आने वाले नये वकीलों के लिए सम्मान भत्ता का प्रावधान किया जाना चाहिए और इसके चलते भारत सरकार को प्रत्येक नए वकील के लिए तीन वर्ष तक 10000 का सम्मान भत्ता दिया जाना चाहिए। जिससे नये वकील सम्मान के साथ इस पेशे को अपने जीवन में अपना सके, इससे निश्चित तौर पर एक अच्छे एवं स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार हो सकेगी।
श्री पाराशर ने कहा कि वह हरियाणा के केबिनेट मंत्री विपुल गोयल के समक्ष युवा वकीलों को सम्मान भत्ता दिए जाने की आवाज उठा चुके हैं और माननीय मंत्री द्वारा उन्हें भरोसा दिया गया है कि हरियाणा सरकार द्वारा नये वकीलों के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और अगर भारत सरकार भी इसी तरह सकारात्मक जवाब देते हुए युवा वकीलों के हित में 10000 रुपए प्रतिमाह के सम्मान भत्ते की घोषणा कर देती है तो इससे निश्चित तौर पर एक बेहतर न्यायपालिका एवं न्याय व्यवस्था को कायम करने में मदद मिलेगी।


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