Friday, May 5, 2017

नाबार्ड द्वारा जलसंरक्षण जागरूकता पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

पलवल 05 मई,2017(abtaknews.com ) प्रकृति के द्वारा मानवता के लिए प्रदत जल संसाधन एक अनमोल उपहार है जिसके बिना धरती पर जीवन संभव नहीं है। इसलिए इसका दुरूपयोग करना प्रकृति के प्रति अपराध है। उक्त विचार पलवल जिले के रतीपुर गांव में नवनिर्मित ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक एस.डी. आर्य ने नाबार्ड द्वारा चयनित 40 जलदूतों के एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।
इस शिविर का आयोजन राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)के जिला विकास प्रबंधक निर्मल कुमार द्वारा जल संरक्षक जागरूकता अभियान के तहत जलदूतों के प्रशिक्षण के लिए किया गया। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक निर्मल कुमार ने जलदूतों की भूमिका बताते हुए कहा कि 40 जलदूतों के माध्यम से  पलवल तथा फरीदाबाद के सभी गांवों में 15 मई, 2017 से 15 जून,2017 तक जलसंरक्षण जागरूकता का व्यापक कार्यक्रम चलाया जाएगा जिसमें किसानों व युवाओं को जोड़ा जाएगा।
इस अभियान में संबंधित विभागों, बैंकों, गैर सरकारी संगठनों, पंचायती राज संस्थाओं, कृषि विकास केन्द्रों जैसे विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से जल संचयन और उसके कुशल प्रबंधन के लिए विभिन्न तकनीकों को अपनाने की पे्ररणा दी जाएगी।
सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक पी.एस. फौगाट ने शिविर को सम्बोधित करते हुए कहा कि नाबार्ड द्वारा जलदूतों के माध्यम से जल संरक्षण की मुहिम सराहनीय है। उन्होंने कहा कि हम सब का दायित्व है कि हमे हवा और पानी को लेकर पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बने। इसके लिए सरकार एवं संस्थाए ही नहीं बल्कि सभी को इस अभियान को सफल बनाने में अपनी अहम भूमिका निभानी चाहिए।
कृषि विज्ञान केन्द्र मिंडकौला के प्रभारी डॉ. वी.के. शर्मा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति सुबह उठने से रात्रि सोने तक विभिन्न कार्यों में जल के दुरूपयोग को रोक कर जल संचय में योगदान दे। इस अवसर पर उन्होंने बरसात के पानी के संचयन, कम पानी वाली फसलों की खेती करने, भूमि समतलीकरण, नालियों को पक्का बनवाने, टपका सिंचाई आदि के द्वारा जल की प्रत्येक बंूद के सदुपयोग पर बल दिया।
नाबार्ड द्वारा चयनित मास्टर ट्रेनर राजेन्द्र सिंह और विनोद बेनीवाल ने जल संचय जागरूकता कार्यक्रम के लिए प्रशिक्षण के दौरान जलदूतों को जल संचयन  तथा गांवों में उपलब्ध जलसंसाधनों की मैपिंग करने व ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने की विस्तृत तकनीकी जानकारी दी।  

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