Wednesday, May 31, 2017

ऋषिपाल अम्बावता पांचवी बार भारतीय किसान यूनियन अ के राष्ट्रीयअध्यक्ष नियुक्त


फरीदाबाद (abtaknews.com ) 31 मई,2017 ; आम्बावता तीन दसक से भी ज्यादा समय से किसानों केअधिकारों की लडाई लड रहे हैं इस लम्बे सफर में उन्होने देश के दर्जनों किसान नेताओं केसाथ आंदोलन किएऔर किसानों को अनेक अधिकार दिलवाएपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुरशास्त्रीचौचरणसिंहबी.पीङ्क्षसह और पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल जैसे जनहितैशीनेता उनके आदर्श हैं।
वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों से बेहद खफाअम्बावता कहते हैं कि देश केइतिहास में अब तक मोदी केवल झूठ का पुलिंदा हैं। उन्होने पिछले तीन वर्ष में देश की जनताको अच्छे दिन आने के झूठे सपने दिखाने के अलावा कुछ नहीं किया। मोदी ने तीन वर्ष मेंकेवल अडानीअम्बानीलाला रामदेव और व्यापारियों के लिए काम किया और देश की जनताको सिर्फ मूर्ख बनाया है। किसानों के भविष्य और देश की राजनीति के लिए चिंतित अम्बावताअब पूरे देश के किसानों को एक मंच पर लाकर उन मांगों को पूरा कराने की रणनीति तैयार कररहे हैं जिससे किसान खुशहाल हो। पेश हैं एक कार्यक्रम में उनसे खास बीत-चीत के प्रमुख अंश. . .

तीन साल बुरा हालदेश की जनता को भारी नुकसान
जीएसटी की आड़ में खुली लूट : अम्बावता
फरीदाबाद। केन्द्र की भाजपा सरकार जीएसटी की आड़ में देशवासियों की मेहनत की कमाईकोखुले आम लूटने की तैयारी कर चुकी है। भाजपा ने सोची समझी साजिश के तहत व्यापारीवर्ग को लाभ पहुंचाने के लिए टैक्सों को पहले से कई गुना बढा दिया है। आगामी समय मेंकिसानमजदूरनौकरी पेशा और मध्यम वर्गीय आम आदमी को खाद्यपेय पदार्थगाडियोंकी खरीददारी और अन्य सभी प्रकार की खरीद पर पहले से ज्यादा टैक्स देना पडेगा। सरकारने पूरे देश में जनमत जरूर हांसिल किया मगर तीन साल में देशवासियों को धोखे के अलावाकुछ नहीं दिया।
भारतीय किसान यूनियन (के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अम्बावता ने जीएसटी कोजनविरोधी बताते हुए कहा वर्ष 2013 में जब कांग्रेस सरकार जीएसटी लागू करना चाहती थी,तो इसी भाजपा सरकार ने सडकों पर उतरकर जीएसटी का विरोध किया थामगर अब उसीभाजपा ने जीएसटी में टैक्सों को पहले से कई गुना बढाकर लागू किया हैऔर देश के नेता चुपहैं ?
प्रश्न : देश खुशहाल कैसे होगा?
उत्तर : जब तक सरकार देश के किसान को खुशहाल नहीं करेगीदेश खुशहाल नहीं हो सकता।आज हर व्यक्ति मंहगाईबेरोजगारी और समस्याओं से परेशान है। भारत की 70 प्रतिशतजनता गांवों में रहती है। वहां  तो अच्छी शिक्षा है रोजगार और  खेती हो रही है। खेती मेंअधिक लागत  कम आय ने किसान को कर्जदार बना दिया है। गांव का 50 प्रतिशत आदमीबेराजगार और हताश है। ऐसे में वह शहर की ओर पलायन करने पर मजबूर है। जबकि शहर मेंलोग पहले ही बेराजगारीमंहगाई और बुखमरी से परेशान हैं। शहरों को स्लम तथा अवैधकब्जों ने घेर रखा है कोई खुशहाल जीवन हैऔर  कोई भाई-चारा। यदि किसान खुशहालहोगा तो अच्छा उत्पादन होगाग्रामीणों को रोजगार मिलेगाऔर लोग गांवों से पलायन नहींकरेंगे। गांवों में शिक्षारोजगार और बिजली दी जाए तो देश स्वतखुशहाल हो जाएगा।
प्रश्न : जीएसटी के विषय में क्या कहेंगे?
उत्तर : जीएसटी लागू होमगर सरकार ने बहुत अधिक टैक्स लगाए हैं। सरकार पुनविचारकरेऔर अधिक टैक्सों को कम करे अन्यथा जनता की मेहनत की कमाई टैक्सों में ही चलीजाएगी। जीएसटी लागू होने के बाद जब आप किसी होटल में
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