Thursday, May 4, 2017

एसवाईएल के मुददे को लेकर मंच के प्रदेशाध्यक्ष ने की प्रैस वार्ता



भिवानी 4 मई। मंच के प्रदेशाध्यक्ष जितेंद्र नाथ ने कहा कि एसवाईएल हरियाणा वासियों की जीवन रेखा है। यह मुददा वर्ष 1981 से लंंबित है। भौगोलिक दृष्टि से देखे तो भाखड़ा नंग डैम से वाया हिमाचल प्रदेश हरियाणा वार्डर मात्र 67 किलोमीटर की दूरी पर है। जबकि पंजाब से यह दूरी कही अधिक 124 किलोमीटर पड़ती है। यह बात आज उन्होंने भिवानी पीडब्ल्यूडी रैस्ट हाऊस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि एसवाईएल के नहर निर्माण को लेकर के प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी को 16 अपै्रल 2017 को एक प्रस्ताव बनाकर भेजा था।  जिसमेें उन्होंने एसवाईएल नहर मामले में आ रही दिक्कतों को दूर करने के  सुझाव दिये गए हैं। प्रधानमंत्री ने इसमें संज्ञान लेते हुए उस प्रस्ताव को जल संसाधन मंत्रालय भारत सरकार को भेज दिया है। 
उन्होंने कहा कि भाखड़ा डैम हिमाचल प्रदेश में पड़ता है तथा पानी का बहाव भी तेजी से नीचे की तरफ आता है क्योंकि समुद्र तल से भाखड़ा डैम की ऊंचाई 518-16 मीटर, नालागढ़ 372 मीटर पंचकुला कौशल्या डैम 364 मीटर, अम्बाला 264,य जनसुई हैड 241 मीटर है। ऐसे में यदि एसवाईएल का निर्माण पंजाब की बजाए हिमाचल प्रदेश से सीधे करवाते हैं तो प्रदेश सरकार को अधिक वहन नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विडम्बना यह है कि पंजाब प्रदेश की नाकामी के करण सतलुज नदी का 43 प्रतिशत  पानी अनुपयोगी होकर पाकिस्तान जा रहा है जो कि पंजाब सरकार द्वारा हरियाणा प्रदेश के हित में दिये गए निर्णय के बाद भी पंजाब सरकार ने एसवाईएल नहर के निर्माण किये जाने वाली भूमि को किसानों को वापस लौटा दी है। 
उन्होंने कहा कि यदि एसवाईएल का समाधान जल्द से जल्द नहीं हुआ तो देश का किसान बिना पानी के अपनी फसलों को कैसे सिंचित करेगा यह सोचने की बात है। इस अवसर पर अमित एडवोकेट, नरेंद्र दुर्जनपुर, कुलदीप फोगाट, समय सिंह पूर्व सरपंच, संजय रतेरा, कृष्ण ओला आदि मौजूद थे। 

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