Monday, May 8, 2017

अनुसंधान के लिए वाईएमसीए विश्वविद्यालय का सीईईआरआई पिलानी के साथ हुआ समझौता


फरीदाबाद, 8 मई,2017(abtaknews.com )प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ परस्पर सहयोग के लिए निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद ने वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) के केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (सीईईआरआई), पिलानी के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग तथा पारस्परिक हित के अन्य क्षेत्रों में संयुक्त रूप से अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता किया है।

समझौता ज्ञापन पर सीएसआईआर केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान, पिलानी के निदेशक डॉ. शांतनु चौधरी तथा वाईएमसीए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने हस्ताक्षर किये। सीएसआईआर-सीईईआरआई इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में देश का एक प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान है।कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने उच्चतर शिक्षा में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-सीईईआरआई देश के शीर्ष संस्थानों में से एक है और वाईएमसीए विश्वविद्यालय तकनीकी शिक्षा में उत्कृष्टता लाने के लिए ऐसे पारस्परिक समझौतों के लिए निरंतर तत्पर है।इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीश वशिष्ठ ने कहा कि यह समझौता दोनों संस्थानों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा क्योंकि दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों व संकाय सदस्यों को परस्पर काम करने के अवसर मिलेंगे।
 उन्होंने बताया कि समझौते के अनुसार दोनों संस्थानों के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों व विद्यार्थियों के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एप्लाइड फिजिक्स, इमेज प्रोसेसिंग, वीएलएसआई डिजाइन  व टैक्नोलॉजी, हाई स्पीड विजन सिस्टम, डिजिटल सिस्टम  डिजाइंस, इंटरनेट आफ थिंग्स, वायरलेस कम्युनिकेशन्स, रिकंफिग्रेशन कम्प्यूटिंग, माइक्रोवेव इंजीनियरिंग, नैनो-टैक्नोलॉजी, इंट्रूमेंटेशन व कंट्रोल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम तथा रेडियो फ्रीक्वेंसी माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल के क्षेत्र में परस्पर अकादमिक सहयोग शामिल हैं।समझौते के अंतर्गत पारस्परिक गतिविधियों में संयुक्त रूप से प्रयोजित अनुसंधान व परामर्श परियोजनाओं, सम्मेलन, कार्यशाला तथा पाठ्यक्रम, पीएचडी विद्यार्थियों का पर्यवेक्षण तथा प्रयोगिक सुविधाओं को साझा करना भी शामिल हैं।

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