Tuesday, May 2, 2017

झील में गिरी पत्नी को बचाने पति ने लगाई छलांग, 3 घंटे जिंदगी मौत से जूझते रहे, पुलिस ने बचाया



फरीदाबाद (abtaknews.com)खूनी झील में करीब तीन घंटे तक एक पत्थर को पकडकर मौत से लडती रही एक महिला,  मौत का भयानक मंजर सूरजकुंड की अरावली पहाडियों के बीचों बीच बनी कृत्रिम खूनी झील का है। जहां हेमा रानी नामक महिला अपने पति और भाई के साथ रविवार की शाम बंदरों को केले खिलाने गई हुई थी, तभी उसे डैथ वैली के नाम से मशहूर खूनी झील की याद आई और उसे देखने के लिये चली गई, झील के पास पहुंचते ही महिला झील की ओर आकर्षित होने लगी और पति के मना करते करते भी महिला खूनी झील में फिसल गई। 100 फुट गहरे पानी झील में गर्दन तक डूबी हुई महिला एक पत्थर को पकड कर करीब 3 घंटे तक लटकती रही, इस बीच पति और भाई ने उसे बचाने की भरपूर कोशिश की मगर कामयाब न हो सके, तेज आंधी बादलों के बीच चमकती बिजली घनघोर अंधेरे की पहाडियों में मदद करने के लिये कोई नजर नहीं आ रहा था, इस दौरान भाई ने पुलिस को फोन किया और हरियाणा पुलिस के जवानों ने मौके पर पहुंचे पौने घंटे कडी मसक्कत से महिला की जान बचाई,,लटकी हुई और बचाते हुए पुलिस कर्मियों की इन तस्वीरों को देखकर आपके भी रोंगटे खडे हो जायेंगे।
 
सूरजकुंड ही अरावली पहाडी में डैथ वैली यानि कि खूनी झील के नाम से मशहूर झील ने अबतक करीब दो दर्जनों से ज्यादा लोगों को निगल लिया है अपनी ओर लुभाती हुई झील लोगों को मौत का न्योंता देती है और इसी निमंत्रण को पाकर लोग न चाहते हुए भी झील की ओर खिंचे चले आते हैं इसी खिंचाव का जीता जागता उदाहरण रविवार की शाम को देखा गया। जब फरीदाबाद सेक्टर 29 हाउसिंग बोर्ड निवासी हेमा रानी पति ईश्वर और भाई अनुज के साथ गाय को आटा और बंदरों को केले खिलाने के लिए गई हुई थी। वहां घूमने के दौरान हेमा को अचानक खूनी झील की याद आई और वो अपने पति से जिद करके झील देखने चली गई। हेमा ने बताया कि झील के पास पहुंचते ही उसे पता नहीं क्या हुआ कि वो झील की ओर खिंची चली गई उसे लग रहा था कि जैसे उसके पैरों को पकड कर कोई झील में खींच रहा है, पति और भाई के मना करने पर वह झील के करीब पहुंच गई। इस बीच अचानक उनक पैर फिसला और वह झील में गिर पड़ीं। डूब रहीं हेमा के हाथ में पानी से बाहर निकला हुआ एक पत्थर आ गया, जिसे उसने पकड़ लिया। गहरी झील के पानी में गर्दन तक डूबी हुई हेमा रानी ने बताया कि उन्हें ऐसा लग रहा था कि कोई उन्हें पकड कर झील की ओर नीचे खींच रहा है, इस दौरान रात के करीब 8 बज चुके थे मौसम पूरी तरह खराब था आसमान में बिजली चमक रही थी पहाडियों में सन्नाटे के बीच घनघोर अंधेरा छाया हुआ था जिसमें उन्हें पूरा यकीन हो गया था की आज वो नहीं बचेंगी।

हेमा रानी को पानी में डूबता देख ईश्वर ने पानी में छलांग लगा दी। स्विमिंग नहीं आने के कारण ईश्वर भी डूबने लगे, उन्होंने किसी तरह खुद को बचाया और बाहर आ गए। ईश्वर और अनुज ने अपनी पैंट और शर्ट को उतारकर उन्हें आपस में गांठ बांधकर जोड़ा और रस्सी की तरह बनाकर उसे हेमा को पकड़वाने की कोशिश की। घंटों प्रयास करने के बाद भी सफलता न मिली तो उन्होंने सुनसान पहाडी में बचाओ बचाओं की आवाजें लगाना शुरू कर दियआवाल सुनकर पहुंचे भाई अनुज ने 8 :15 बजे पुलिस को सूचना दी । सूचना पर सूरजकुंड थाने में तैनात एसआई रणधीर साथी पुलिसकर्मियों शमशेर व संदीप के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने मौके पर हालात का जायजा लिया। अंधेरा होने के कारण मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई थी। पुलिस ने रस्सी से रोप-वे तैयार किया, जिसके सहारे पुलिस टीम का एक सदस्य हेमा तक पहुंच सका और उनको सकुशल बाहर ले आया। पानी से बाहर निकलते ही हेमा रानी बेहोश हो गई। उनको तुरंत ही उपचार के लिए पुलिस की गाड़ी में बीके हॉस्पिटल लाया गया। 

मौके पर पहुंचे एसआई रणधीर सिंह ने बताया कि अरावली पर्वत एरिया में जिस कृत्रिम झील पर हादसा हुआ। झील की गहराई करीब 100 फुट से भी ज्यादा है। झील से निकलने का रास्ता नहीं था, हेमा करीब तीन घंटे तक पत्थर के सहारे पानी में लटकी रही। 45 मिनट की मशक्कत के बाद उसे रस्सी के सहारे बाहर निकाला जा सका। अगर उनका हाथ पत्थर से छूटता तो जान जा सकती थी। मगर उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए महिला को आखिर बचा लिया।जिंदगी और मौत के बीच घंटों जद्दोजहद के बाद जिंदा बची हेमा और उसके पति व भाई का कहना है कि हादसे के दौरान उन्हें बचने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी अगर इस बीच पुलिस के जवान मौके पर नहीं पहुंचते तो हेमा का बचना मुश्किल था,, मौत को करीब से देखने वाले परिवार ने लोगों से आह्वान किया है कि डैथी वैली को देखने का शौक रखने वाले कृप्या यहां न जायें, क्योंकि यह एक खूनी झील है जहां से बचाना आसान नहीं है।

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