Friday, May 26, 2017

भारत में क्वालिटी एसोरेंस सिस्टम में 11 वें और हरियाणा में अव्वल बीके अस्पताल बीमार



फरीदाबाद (abtaknews.com ) 26 मई,2017 ; भारत में नेशनल क्वालिटी एसोरेंस सिस्टम में 11 वां और हरियाणा में प्रथम आने का सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाला फरीदाबाद का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल अधिकारियों की अनदेखी के चलते अपनी दुर्दशा पर आँशु बहा रहा है।इतना ही नहीं आज अस्पताल के हालात ऐसे हो गए है इलाज करना तो दूर कोई मरीज अस्पताल में प्रवेश करने में भी कतराने लगे है लेकिन करें क्या गरीब लोगो के पास इस अस्पताल  में इलाज कराने आलावा कोई और दुसरा विकल्प नहीं है। हमारी टीम ने अस्पताल में जाकर रियल्टी चैक किया तो अस्पताल के हालात बद  से बदत्तर नजर आये। 

फरीदाबाद का वही बादशाह खान अस्पताल है जिसे पिछले दिनों सफाई और अस्पताल के रख रखाव को लेकर हरियाणा में पहला और जबकि भारत वर्ष में 11 वां स्थान प्राप्त करने का गौरव मिला था तब यहाँ आने वाले मरीजों को यह अहसास होता था की यह सरकारी नहीं कोई प्रायवेट अस्पताल है लेकिन आज दिखाई जा रही यह तस्वीरें साफ़ तौर पर यह बयान करती है की वह गौरव अस्पताल प्रबंधको ने ईनामों की सूचि में एक और सर्टिफिकेट लेने के लिए कुछ समय के लिए वह सारी चीजे की थी जबकि इसमें दुसरा पहलू यह भी है की यहाँ पूर्व में तैनात रहे पीएमओ डाक्टर वीरेंदर यादव के यहाँ से ट्रांसफर किये जाने किये जाने के बाद हुआ है। 

शहर के सबसे बडे अस्पताल में ओपीडी से लेकर महिला प्रसूति वार्डो तक गंदगी ने अपना घर बना लिया है शौचालयों का हाल तो पूछिये मत साहिब जच्चा-बच्चा को शौचालय छोड बाहर खुले में शौच  के लिए जाना पड़ता है। साफ सुथरा रहने वाला अस्पताल देखते देखते कैसे  कुछ ही दिनों में गंदगी में डूब गया।  आईये आपको दिखाते हैं अस्पताल परिसर की ओपीडी से लेकर तीसरी मंजिल तक डस्टबीन कूड़े  ढेर में तब्दील हो गए है। कोई सफाई कर्मचारी कूडा उठाने को तैयार नहीं है, जिसका खामियाजा अस्पताल में आने वाले मरीजों को उठाना पड रहा है, जच्चा- बच्चा वार्ड का आलम ये है कि पिछले कई दिनों से न तो कोई कूडा उठाने आया है और न ही कोई झाडू पौंछा लगाने आया है और यहाँ पर कई - कई दिनों तक बैडसीटे भी नहीं बदली जाती है। यहाँ के मरीज शिवानी, अंजू और रविता ने अबतक न्यूज़ टीम को बताया कि वह खुद ही अपने हांथो से यहाँ झाड़ू लगानी पड़ती  है और कई बार तो यहाँ के सफाई कर्मचारियों पैसे देकर सफाई कराई है।उन्हें यह नहीं पता की वह यहाँ इलाज कराने आई है या बीमार होने।  

अस्पताल में आये महिला शांति और राजपाल पुरुष मरीजों का यह कहना है की इससे पहले जब वो आये थे तो पीएमओ विरेन्द्र यादव के समय में अस्पताल के अंदर न तो गंदगी थी और न ही किसी प्रकार के ईलाज करवाने में कोई परेशानी। उनके जाने के बाद तो अस्पताल की बद से बदतर हालत हो गई है, इतना ही नहीं अस्पताल की महिला कर्मचारी शांति देवी तो भावुक होकर भगवान से दिन रात सिर्फ साहब डा. विरेन्द्र यादव के आने की प्र्राथना कर रही हैै। फरीदाबाद के सिविल अस्पताल में इन दिनों कोई भी अधिकारी पीएमओ की कुर्सी पर नहीं है जिसके चलते कर्मचारी और डॉक्टर अपनी मन मर्जी से कार्य कर रहे हैं जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पड रहा है।
अस्पताल के सीएमओ ने मीडिया से बात करने से साफ मना कर दिया और अपने पीएन से यह कहलवा दिया की साहब कैमरे पर आकर कुछ भी नहीं कहेंगेहै। 

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