Wednesday, April 12, 2017

पाकिस्तान द्वारा कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा मामले में सुषमा स्वराज ने दिया बयान


पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा भारतीय नागरिक श्री कुलभूषण जाधव को दिए गए मृत्यु दंड (11 अप्रैल, 2017) के मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा राज्यसभा में कहा कि


  1. पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर, मैं दोहराती हूं मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर एक भारतीय नागरिक श्री कूलभूषण जाधव को दिए जाने वाले मृत्यु दंड संबंधी रिपोर्टों के बारे में सदन की चिंताओं में शरीक होने के लिए मैं खड़ी हुई हूं।
  2. मैं सदन को सूचित करना चाहती हूं कि श्री जाधव ईरान में व्यापार कर रहे थे और उनका अपहरण करके उन्हें पाकिस्तान ले जाया गया था। वास्तविक परिस्थितियां अस्पष्ट हैं और उनके बारे में तभी जाना जा सकता है जब काउंसलर की पहुंच उन तक होने दी जाए। जब उनके अपहरण की सूचना मिली थी, उसी समय से इस्लामाबाद में हमारा उच्चायोग लगातार पाकिस्तानी अधिकारियों से आग्रह करता रहा है कि श्री जाधव तक पहुंच दी जाए। यद्यपि अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार पहुंच प्रदान की जाती है और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में इस नियम का पालन किया जाता है लेकिन पाकिस्तान की सरकार ने यह अनुमति नहीं दी। इससे स्वयं पता चल जाता है कि श्री जाधव के खिलाफ मामले में कितना दम है। माननीय सदस्यों को याद होगा कि एक वरिष्ठ पाकिस्तानी नेता ने इस मामले में पर्याप्त सबूतों के बारे में स्वयं शक जाहिर किया था।
  3. उपसभापति महोदय, इस वर्ष की शुरूआत में पाकिस्तान सरकार ने जांच प्रक्रिया के लिए सबूत हासिल करने और अन्य सामग्रियों के लिए हमारा सहयोग मांगा था। इस प्रक्रिया में उन्होंने वरिष्ठ भारतीय अधिकारी के खिलाफ हास्यास्पद आरोप लगाए, जिसका इस मामले से कोई संबंध नहीं था। इसके बाद उन्होंने कह दिया कि काउंसलर पहुंच प्रदान करने का अर्थ हमारी बात को स्वीकार करना है। इसके बावजूद बात आगे बढ़ने की उम्मीद में हमारा जवाब रचनात्मक था। हमने स्पष्ट किया था कि तथ्यों की पड़ताल और पाकिस्तान में श्री जाधव की उपस्थिति संबंधी परिस्थितियों को समझने के लिए श्री जाधव तक काउंसलर पहुंच एक आवश्यक शर्त होगी।
  4. इस संपर्क के बाद, यह अभूतपूर्व है कि कल एक निर्णय की अचानक घोषणा कि गई जिसमें इस मामले में मृत्यु की सजा सुना दी गई जबकि भारत खुद पूर्व के संपर्क में कह चुका है कि सबूत पर्याप्त नहीं हैं। मामले में उस समय और विसंगति पैदा हो गई जब मृत्यु दंड की घोषणा के तीन घंटे बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय द्वारा भारतीय उच्चायोग को एक आधिकारिक पत्र मिला जिसमें सशर्त काउंसलर पहुंच के पाकिस्तानी प्रस्ताव को दोहराया गया था। इसे तथाकथित न्यायिक प्रक्रिया की असंगत प्रकृति स्पष्ट होती है, जिसके कारण निर्दोष अपह्रत भारतीय के खिलाफ बिना सुनवाई के फैसला सुना दिया गया।
  5. इस मामले में हमारी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है। श्री जाधव द्वारा किए जाने वाले किसी गलत काम का कोई सबूत नहीं है। अगर कुछ है तो इसके पीछे वे उस षडयंत्र की शिकार हैं जो भारत पर आरोप लगाने के लिए तैयार किया गया है ताकि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को प्रोत्साहन और समर्थन देने की जगजाहिर गतिविधियों से अंतर्राष्ट्रीय ध्यान को हटाया जा सके। इन हालात के मद्देनजर हम इस सजा के संबंध में हम यही कह सकते हैं कि अगर सजा दी गई तो यह सोची-समझी हत्या होगी।
  6. उपसभापति महोदय, कल विदेश सचिव ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त को अपनी स्थिति बता दी थी। मैं स्पष्ट रूप से कहती हूं कि भारत सरकार और भारत की जनता इस संभावना को बहुत गंभीरता से लेती है कि पाकिस्तान में एक निर्दोष भारतीय नागरिक को मृत्यु की सजा का सामना करना पड़ रहा है जिसके लिए न तो किसी प्रक्रिया का पालन किया गया और कानून, न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों की घोर अवहेलना की गई। मैं पाकिस्तान सरकार को सावधान करती हूं कि वे अगर इस मामले में आगे बढ़ते हैं तो हमारे द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने वाले प्रभावों पर गौर करें।
  7. उपसभापति महोदय, मैं सदन को बताना चाहती हूं कि मैं श्री जाधव के मातापिता के संपर्क में हूं और हम इस कठिन परिस्थिति में उन्हें अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं। सदन द्वारा एकजुटता प्रकट करने से इस घड़ी में उन्हें और साहस मिलेगा।    

loading...
SHARE THIS

0 comments: