Friday, April 28, 2017

स. बलवंत सिंह मथारू ने ईजाद की सूक्ष्य सिंचाई तकनीक


फरीदाबाद 28 अप्रैल,2017(abtaknews.com ) प्रदेश में खेती के लिए भविष्य में होने वाली पानी की समस्या से निपटने के लिए फरीदाबाद के रिकार्डधारी स. बलवंत सिंह मथारू (80 वर्ष) ने माइक्रो इरीगेशन (सूक्ष्म सिंचाई तकनीक) को ईजाद करके फिर से एक नया इतिहास रचा है। 80 वर्षीय स. बलवंत सिंह मथारू का दावा है कि सूक्ष्य सिंचाई तकनीक से जहां 75 प्रतिशत पानी की बचत होगी वहीं प्रदूषण की रोकथाम के साथ-साथ फसलें भी बेहतर होगी। गौरतलब है कि प्रदेश में लगातार भूजल स्तर गिर रहा है। खासतौर से दक्षिण हरियाणा के गुरूग्राम, नूंह, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, भिवानी, फतेहाबाद, फरीदाबाद और सिरसा सहित कई अन्य जिलों में भी बोरवेल सूख रहे है। गेहूं, जौ, सरसों के साथ-साथ अन्य फसलों में परंपरागत तरीके से यानी खुले पानी में सिंचाई करने के कारण पानी की बर्बादी हो रही है। वहीं कृषि मंत्री ओ.पी. धनखड़ के अनुसार आगामी 20-25 वर्षाे में पानी पानी की कमी के चलते खेती के लिए पानी की समस्या गंभीर हो जाएगी, जिसके लिए हमें तैयार रहना होगा। श्री मथारू द्वारा ईजाद की गई तकनीक से कम पानी की लागत से बेहतर फसलें उगाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि जब किसान बीज को खेतों में बीजते है, तब ऊपर से पानी डालने पर कई बार बीज पानी के साथ ही बह जाते है, इससे काफी बीज निकल जाते है तथा आगे चलकर फसल को नुकसान होता है, लेकिन अगर हम फव्वारे से पानी डालें तब यह नहीं होता है अपितु बीज और भी अंदर दब जाते हैं और सब बीजों में फुटाव निकलता है। उन्होंने बताया कि ट्यूबवैल से पानी देने से कहीं अधिक फायदा इस फव्वारे से पानी देने से होता है। फसलों को बचाने के लिए किसान कीटनाशक फसलों पर डालते है, उन कीटनाशकों को भी इस फव्वारे में डालकर छिडक़ाव किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इन फव्वारों को सब तरफ घूमाने के लिए रेडियल मूवमेंट भी लगाए जाते है तथा इसे कहीं भी घुमा कर ले जाया सकता है। इसे मोटर चलित भी किया जा सकता है और इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है। इस फव्वारे को कम्प्यूटरीकृत भी किया जात सकता है, जिससे कि इसके फायदे और भी बढ़़ जाएंगे। इसमें जैसे भी चाहे बदलाव किए जा सकते है, जैसे कि इसमें लाईट जोडक़र सुंदर भी किए जा सकते है, जिससे इसे जब रात में भी चलाया जाए तो लाईटों से रोशनी भी हो सके। श्री मथारू के अनुसार इसकी रेंज 20 फुट तक है, इसे बढ़ाया भी जा सकता है, जितनी भी बढ़ाना चाहे उसी रेंज का कम्प्रेशर चाहिए। इसका आकार 4 इंज से शुरू होकर 5, 6 तथा इससे भी ज्यादा बढ़ाया जा सकता है। श्री मथारू ने बताया कि ये फव्वारा 12 टुकड़ें में बना पड़ा है, इस तरह से इन सारे टुकड़ों को जोडक़र 30 फुट तक ले जाया जा सकता है, चाहे तो इसे एलशेप में भी सिंचाई किया जा सकता है। 100 प्रतिशत तक काम करता है, इसकी मदद से हम 500 गज तक की सिंचाई 15 से 20 मिनट में कर सकते है। ज्ञातव्य हो कि श्री मथारू इससे पूर्व सबसे ऊंचा गन्ना लगाने के साथ-साथ ट्रे में सब्जियों उगाने को लेकर भी कई प्रकार के पुरस्कार पा चुके है और वह लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में भी उनका नाम दर्ज है। उनका कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि इस तकनीक को अपनाकर किसान जहां कम पानी में बेहतर फसलें उगा सकते है वहीं पर्यावरण प्रदूषण को भी रोकने में अपना योगदान दक सकते है। 


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