Friday, October 7, 2016

सरस्वती पुनरुद्धार परियोजना पर वाईएमसीए यूनिवर्सिटी फरीदाबाद में सेमीनार


चण्डीगढ़, 7 अक्तूबर(abtaknews.com) हरियाणा में सरस्वती पुनरुद्धार परियोजना के तहत एक व्यापक अनुसंधान योजना पर कार्य किया जा रहा है, जिसके राष्ट्रीय एवं अंतर्राट्रीय स्तर की शोध संस्थाओं और विश्वविद्यालयों को परियोजना के अंतर्गत पुरातत्व, पर्यावरण अध्ययन, जलवायु बदलाव, नदी प्रौद्योगिकी, जल संचयन, सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन जैसे विषय पर शोध करने के लिए आमंत्रित किया जायेगा।

यह जानकारी हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री प्रशांत भारद्वाज ने आज वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद में ‘सरस्वती की कहानी विज्ञान की जुबानी’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए दी। इस अवसर पर बल्लबगढ़ से विधायक श्री मूलचंद शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने की। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ संजय कुमार शर्मा भी उपस्थित थे।

श्री भारद्वाज ने कहा कि परियोजना के अंतर्गत विभिन्न विषयों में शोध की अपार संभावनाएं है, जिसमें विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका रहेगी। हाल में आस्ट्रेलियाई प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल से मुलाकात का जिक्र करते हुए श्री भारद्वाज ने बताया कि सरस्वती नदी के पुनरुद्धार में आस्ट्रेलिया ने मदद की पेशकश की है, जिसमें सरस्वती के प्रवाह के साथ-साथ नदियों की सफाई पर कार्य किया जा सकता है। सरकार की कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में सरस्वती नदी पर अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की भी योजना है। इसी प्रकार, जींद के निकट राखीगढ़ी में दक्षिण कोरियाई विश्वविद्यालय द्वारा हडप्पा कालीन सभ्यता के पुरातात्त्वीय शोध पर कार्य चल रहा है। इसके अलावा, जापान व ऑस्ट्रिया से भी सरस्वती परियोजना से जुड़े विषयों पर शोध को लेकर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सरस्वती परियोजना को वैज्ञानिक शोध और पर्यटन के अवसरों के रूप में देख रही है और आने वाले दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

श्री भारद्वाज ने बताया कि हरियाणा प्रदेश के गठन के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों के अंतर्गत फरवरी, 2017 में राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लगभग 20 देशों से वैज्ञानिकों को आमंत्रित किया जा रहा है। इसके अलावा, प्रदेश के प्रतिष्ठित अनुंसधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों से भी वैज्ञानिक हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष वर्ष 2018 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सरस्वती महोत्सव का आयोजन किया जायेगा। इसके साथ-साथ सरस्वती नदी को लेकर चेतना लाने के लिए कालेज एवं विश्वविद्यालय स्तर पर गोष्ठियों का आयोजन भी किया जा रहा है।

श्री भारद्वाज ने बताया कि सरस्वती धरोहर परियोजना को लेकर केन्द्र सरकार द्वारा गठित सात राज्यों की समन्वय समिति सरस्वती पुनरुद्धार के साथ-साथ इसमें पर्यटन की संभावनाएं भी तलाश रही है, जिसमें बांदीपुर ग्लेशियर से कच्छ तक एक टूरिज्म कोरिडोर विकसित करने पर भी चर्चा है। इस प्रकार, सरस्वती धरोहर परियोजना में पूर्णत: वैज्ञानिक शोध को आगे लेकर चल रहे है।

सरस्वती नदी को लेकर वैज्ञानिक एवं भूगर्भीय खोजों को तथ्य के साथ प्रस्तुत करते हुए श्री भारद्वाज ने बताया कि सरस्वती पुनरुद्धार परियोजना केवल एक नदी तक सीमित नहीं है, अपितु एक 4000 हजार वर्ष पुरानी सभ्यता की परिचायक है, जो अपने साथ समृद्ध सभ्यता समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोधों एवं सैटेलाइट चित्रों की मदद से यह सिद्ध हो चुका है कि सरस्वती एक पौराणिक धारणा नहीं अपितु एक विलुप्त नदी है और इसका हडप्पा या सिन्धु सभ्यता के निर्माण में बड़ा योगदान था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक मूलचंद शर्मा ने हरियाणा को यमुना और सरस्वती नदियों का प्रदेश बताया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा फरीदाबाद शहर में लोगों को यमुना नदी से पेयजल आपूर्ति के लिए प्रयास किये जा रहे है और वर्ष 2018 तक शहर की सडक़ और सीवरेज की समस्या का पूर्ण रूप से निदान कर दिया जायेगा। श्री शर्मा ने औद्योगिक क्षेत्र में कार्यबल उपलब्ध करवाने में वाईएमसीए विश्वविद्यालय के योगदान को अहम बताया।

इससे पूर्व अपने स्वागतीय भाषण में कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने सरस्वती को सभ्यता, संस्कृति और विज्ञान से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कहा कि सरस्वती पुनरुद्धार परियोजना के विभिन्न क्षेत्रों में शोधकर्ताओं के लिए अनुसंधान के लिए अच्छे अवसर है, जिसका उन्हें लाभ उठाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में निदेशक, युवा कल्याण डॉ प्रदीप डिमरी ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। संगोष्ठी का संयोजन पर्यावरण विज्ञान की सहायक प्रोफेसर डॉ. रेनूका गुप्ता ने किया।

loading...
SHARE THIS

0 comments: