Saturday, October 8, 2016

देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्‍तर में 1 प्रतिशत की वृद्धि


6 अक्टूबर, 2016 को समाप्‍त सप्‍ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 118.431 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 75 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 125 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 98 प्रतिशत है।इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम हैजो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावॉट से अधिक की स्‍थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं। 
  
क्षेत्रवार संग्रहण स्‍थिति 

उत्‍तरी क्षेत्र 
उत्‍तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेशपंजाब तथा राजस्‍थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैंजो केन्‍द्रीय जल आयोग (सीडब्‍ल्‍यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 13.5बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 75 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 85 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 82 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम  है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।  

पूर्वी क्षेत्र 
पूर्वी क्षेत्र में झारखंडओडिशापश्‍चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 16.03 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 85 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 71 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 7प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 

पश्‍चिमी क्षेत्र 
पश्‍चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्‍ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 22.87 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 84 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 61 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 80 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर हैलेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से बेहतर है। 
 
मध्‍य क्षेत्र 
मध्‍य क्षेत्र में उत्‍तर प्रदेशउत्‍तराखंडमध्‍य प्रदेश तथा छत्‍तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 38.87 बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 91 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 76 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 72 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर हैलेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है। 

दक्षिणी क्षेत्र 
दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी)तेलंगाना (टीजी)एपी एवं टीजी (दोनों राज्‍यों में दो संयुक्‍त परियोजनाएं)कर्नाटककेरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैंजो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 27.4बीसीएम हैजो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 53 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 34 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 76 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुये संग्रहण से बेहतर हैलेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कम है। 

 पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें हिमाचल प्रदेशत्रिपुराउत्तराखंडकेरल और तमिलनाडु शामिल हैं।

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