Tuesday, October 18, 2016

आंगनवाडी केन्द्र बने शोपीस, बच्चों को नहीं मिलता राशन, रख-रखाव भी ठीक नहीं




फरीदाबाद(abtaknews.com )बच्चों को पढाई के लिए आर्कषित करने के सरकार द्वारा गांवों में खोले गए आंगनवाड़ी केन्द्र मात्र दिखावा बनकर रह गए है। एक तो ये केन्द्र ऐसे स्थान पर जहां बच्चे तो क्या जानवर भी जाना पंसद नहीं करते और उपर से गंदगी का साम्राज्य है। राशन के नाम कभी कभार केवल दलिया व चावल ही दिया जाता है। सरकार की योजनाओं का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते अब लोगों ने अपने बच्चों को आंगनवाड़ी केन्द्रों में भेजना ही बंद कर दिया है। ऐसा ही एक आंगनवाडी केन्द्र गांव सागरपुर का है। जहां दस बच्चों के नाम तो लिखे है, लेकिन आता कोई नहीं है। लोगों का आरोप है कि पांच में से केवल एक ही बच्चे को चावल या दलिया ही दिया जाता है। जबकि सरकार की ओर से पूरा सामान आता है, जिसे कालाबाजार में बेच दिया जाता है।
   गांव सागरपुर के ग्रामीण  गीता, राजकुमारए केला व रेशमी ने बताया कि आंगनवाड़ी केन्द्र के मुख्य द्वार पर ही गड्डे खुदे हुए है और अन्दर का नजारा देखकर आप स्वयं अंदाजा लगा सकते है कि बच्चे कितने स्वस्थ वातावरण में रहते होगें। वैसे भी इस आंगनवाड़ी केन्द्र में बच्चों को राशन के नाम पर कभी कभार दलिया व चावल ही दिये जाते है और वह भी पांच बच्चों में से केवल एक को। सरकारी योजनाओं के बारे में स्वयं आंगनवाड़ी केन्द्र के कार्यकर्ताओं को ही पता नहीं है। न ही इनका लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है। यहां तक कि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भी लोगों को भटकना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना, बीमा योजना व लाडली योजनाओं का इन केन्द्रों में कार्यकत कार्यकताओं ने आज तक ग्रामीणों को बताया ही नहीं है। जिसके कारण ग्रामीण इनसे मिलने वाले लाभ से वंचित है। 


आगंनवाडी कार्यकर्ता शकुन्तला का कहना है कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में केवल 6 साल से छोटे बच्चों को ही राशन दिया जाता है। पांच में से केवल एक बच्चे को राशन देने और केवल चावल व दलिया देने की बात से इंकार करते हुए, उसने सातों दिनों का मीनू बता डाला। सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणो को पंहुचाने के बारे में उनके पास कोई कोई स्पष्ट जबाव नहीं था।


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