Tuesday, October 11, 2016

राजनीति की सीमा के चलते नहीं जला रावण:- राजेश भाटिया



फरीदाबाद(abtaknews.com ) में आधी रात में कौन ले गया रावण  मेघनाथ  का सिर ,कौन हुआ रावण  और मेघनाथ  से शक्तिशाली । बुराई पर अच्छाई  की जीत और असत्य पर सत्य की विजय के इस दशहरे पर्व को  लोग रावण के दहन के रूप में जानते है इस पर पर्व को सदियों से मनाया जा रहा है । यही पर फरीदाबाद में भी सदियों से इसी रूप में मनाया जाता रहा है लेकिन इस दशहरे को आखिर क्या हुआ की आधी रात को कोई रावण और मेघनाथ  का  सिर ही ले गया क्या इसके पीछे का राज आईये जानने चलते है फरीदाबाद । 

जमीन पर बिना सिर के पड़े दिखाई दे रहे यह धड़ रावण और मेघनाथ  है आखिर ये दोनों धड़ बिना सिर के क्यों जमीन पर पडे है आखिर यह किसके शिकार हुए है आईये जानते है ,दरअसल में यह नजारा है एनआईटी फरीदाबाद के दशहरा मैदान का जहां पर सदियों से हर साल दशहरे के पर्व पर रावण और मेघनाथ का  दहन कर बुराई पर अच्छाई इस पर्व को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता रहा है । लेकिन इस बार इस पर्व को राजनीती की नजर लग गई यह गुटबाजी का शिकार हो गया जिसके चलते इस बार दशहरे में शहर  के लोगो को रावण और मेघनाथ के पुतले के दर्शन नहीं हो पाएंगे । 
मेले के आयोजको की माने तो उन्होंने हर बार की तरह इस बार भी मेले को लगाने के लिए प्रशासन से अनुमति ली हुई थी और कल हर बार लगने वाली जगह पर रावण और मेघनाथ के पुतले को लगाने के लिए गड्ढा कर किया लेकिन आधी रात को अचानक कुछ राजनैतिक लोगो के इशारे पर प्रशासन के कुछ लोगो को भेजा और रावण और मेघनाथ को लगाने से मना कर दिया उनके मुताबिक़ वह सदियों से पश्चिम की तरफ मुह कर रावण  को खड़ा करते है लेकिन उन्हें ऐसा नहीं करने दिया गया । आयोजको के मुताबिक़ उन्होंने इस बार कैबिनेट  मंत्री विपुल गोयल को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया था जिसके चलते स्थानीय विधाईका तथा मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा ने जलन के चलते  केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर के साथ मिलकर राजनीति के चलते इस मेले में खलल डाला है । वही उन्होंने आरोप लाग्या की  वह पूर्व विधायक चन्दर भाटिया के भाई है यह भी एक वजह है जिसके दोनों ने रणजीति की है और मेला राजनीती और गुटबाजी का शिकार  हुआ है । 
  
अजय नौनिहाल ,मेले के आयोजक ने बताया कि धार्मिक सामाजिक संस्थाओ के अंदर राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। वही मेला देखने आये गोगा और गौरव ने बताया कि आज जब वह सुबह आये तो रावण और मेघनाथ का सिर  न देखकर आश्चर्य चकित रह गए उनके मुताबिक यहाँ दशहरा बहुत ही सुन्दर मान्य जाता था लेकिन इस बार फरीदाबाद के लोगो के लिए यह दुखद समाचार है । 


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