Friday, October 7, 2016

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक


चण्डीगढ़, 7 अक्तूबर(abtaknews.com )हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश में अवशेष जलाने की बुराई पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इस रणनीति में सैटेलाइट के माध्यम से अवशेष जलाने की घटनाओं की निगरानी करना, किसानों को शिक्षित करना और कानून के तहत दण्डात्मक उपाय करना शामिल करना है। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की पहल पर राज्य सरकार ने धान की पुआल (फूस) के उपयोग के लिए भी एक कार्य योजना तैयार की है। 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2016 के दौरान अब तक गेहूं का फूस जलाने के 48 मामलों को मुकद्दमा चलाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्ष 2015 के दौरान भी बोर्ड ने कुरुक्षेत्र और फरीदाबाद में  विशेष पर्यावरण न्यायालयों में उल्लंघन करने वालों के विरूद्घ 48 शिकायतें दर्ज करवाई थीं, जिनमें से 24 मामलों में उल्लंघनकर्ताओं के विरूद्ध निर्णय हो चुका है तथा 22 मामले लम्बित हैं। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने पूरे प्रदेश में बचे हुए फूस को जलाना प्रतिबन्धित करते हुए वायु (प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 19 (5) के तहत 16 सितम्बर, 2003 को एक अधिसूचना जारी की थी। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपने क्षेत्रीय अधिकारियों के माध्यम से इसे लागू कर रहा है तथा नियमित आधार पर विशेष पर्यावरण न्यायालय में फोटोग्राफिक तथा वीडियोग्राफिक साक्ष्यों के साथ उल्लंघनकर्ताओं के विरूद्ध मामले दर्ज करवा रहा है।

उन्होंने बताया कि सभी उपायुक्तों को इन प्रावधानों को सख्ती से लागू करने तथा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों, तहसीलदारों और पटवारियों जैसे राजस्व क्षेत्र के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को ऐसे कार्यों के हानिकारक प्रभावों के बारे में किसानों को  शिक्षित करने और उन्हें मनाने के लिए गांवों में सरपंचों और पंचों को अनिवार्य दिशा-निर्देश तथा वैधानिक चेतावनी जारी करने के लिए कहा गया है। सभी उपायुक्तों को ग्राम सचिवों तथा पटवारियों को यह भी निर्देश देने की सलाह दी गई है कि वे गेहूं के ठूठ या धान की पुआल तथा अन्य कृषि अवशेष खुले खेतों में जलाने की घटनाओं को, ऐसी घटनाएं होने के 30 मिनट के अंदर उनके ध्यान में लाएं। यदि वे बिना किसी उपयुक्त कारण के ऐसा करने में असफल रहते हैं तो इसे ड्यूटी में कोताही समझा जाएगा और उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 

उन्होंने बताया कि हालांकि हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड धान वाले क्षेत्रों में पुआल जलाने की निगरानी के लिए हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केन्द्र (एचएआरएसएसी)से जुड़ा हुआ है। अब इसने गेहूं उगाने वाले प्रदेश के 10 प्रमुख जिलों में वर्ष 2017 के लिए इस केन्द्र के माध्यम से गेहूं के ठूंठ जलाने की घटनाओं की निगरानी करने का निर्णय लिया है। बोर्ड द्वारा प्रभावी निगरानी के लिए प्रदेश में होने वाली ऐसी गतिविधियों पर उपग्रह चित्रों तथा अन्य सूदूरवर्ती साक्ष्यों के रूप में एचएआरएसएसी से दैनिक रिपोर्ट मांगी जाएगी। प्रभावी निगरानी के लिए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी दैनिक आधार पर इसरो से प्राप्त उपग्रह चित्र रिपोर्टों या आंकड़ों को संाझा करने का आग्रह किया गया है। 

उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में पुआल या फूस आधारित बॉयोमास बिजली परियोजना के लिए एक पॉयलट परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया गया है। परियोजना की स्थापना तथा बॉयोमास के भण्डारण के लिए सरकारी या पंचायती भूमि का उपयोग किया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि कृषि विभाग उद्यमियों या इसकी एजेन्सियों द्वारा इसे खरीदने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने के लिए पंजाब की तर्ज पर रीपर, रेकर और बेलर के लिए एक योजना तैयार करेगा। बिजली कम्पनियां भी एचईआरसी दरों या इससे अधिक दरों पर बॉयोमास बिजली परियोजनाओं से बिजली खरीदेंगी। कृषि विभाग बॉयोमास का प्रयोग करने वाले जैव उर्वरक प्लांटों की स्थापना के लिए सहायता देगा और ऐसे प्लांटों से जैव उर्वरक खरीदने तथा सब्सिडी उपलब्ध करवाने के लिए एक योजना तैयार करेगा। 

उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव ने इस विषय पर कृषि, पर्यावरण, शहरी स्थानीय निकायों, नगर एवं ग्राम आयोजना, जनसम्पर्क और नवीकरणीय ऊर्जा विभागों के साथ समीक्षा बैठकें की हैं। इन बैठकों में समुदाय स्तर पर प्रवर्तन, जागरूकता पैदा करने, बॉयोमास, रिजनरेशन प्लांटों, सब्सिडी उपायों तथा आपूर्ति उपायों समेत फूस जलाने को रोकने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई। कृषि विभाग को व्यापक ढंग से इस मुद्दे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने की सलाह दी गई थी। शहरी स्थानीय निकायों, हरेडा तथा नगर एवं ग्राम आयोजना विभागों को भी उनके अपने स्तर पर कार्य योजना तैयार करने के लिए कहा गया था कि वे फूस जलाने की समस्या से निपटने तथा शहरी कचरा प्रबन्धन में किस प्रकार से सहायता कर सकते हैं। 

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड फूस जलाने पर प्रतिबंध तथा स्वास्थ्य पर इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में प्रिंट तथा इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से कटाई सीजन के दौरान जागरूकता पैदा कर रहा है। यह नियमित आधार पर हरियाणा में प्रमुख शहरों की परिवेश वायु गुणवत्ता की निगरानी तथा वायु गुणवत्ता पर इस तरह की घटनाओं के प्रभावों की समीक्षा भी कर रहा है। बोर्ड ने चार निरंतर परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी केन्द्र स्थापित किये हैं, जिनमें से तीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हैं। बोर्ड ने प्रदेशभर में ऐसे 9 और केन्द्र लगाने की योजना बनाई है, जिनमें सात एनसीआर जिलों में लगाए जाने की संभावना है। 

राज्य सरकार ने प्रदेश में कृषि अवशेषों को जलाये जाने को रोकने के संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) के आदेशों के क्रियान्वयन एवं समीक्षा के लिए कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय कमेटी भी गठित की है। वित्त, पर्यावरण, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, गृह और शहरी स्थानीय निकाय विभागों के प्रधान सचिव या अतिरिक्त मुख्य सचिव  इस कमेटी सदस्य होंगे। कृषि विभाग के निदेशक कमेटी के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। 

सरकार ने इस संबंध में एनजीटी के आदेशों के क्रियान्वयन के लिए उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटियां भी गठित की हैं। इन कमेटियों के सदस्यों में कृषि विभाग के उपनिदेशक, पंचायत विभाग के विकास अधिकारी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के तहसीलदार या नायब तहसीलदार, उप पुलिस अधीक्षक और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शामिल हैं। जिला कमेटी द्वारा कृषि विकास अधिकारी या कृषि निरीक्षक, पटवारी, पंचायत सचिव, ग्राम चौकीदार एवं नम्बरदार, सरपंच ग्राम पंचायत और पुलिस कर्मियों के माध्यम से एनजीटी के निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा। कृषि अवशेष या धान की पुआल के जलाए जाने को रोकने के संबंध में जारी आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कमेटी की सितम्बर से नवम्बर और अप्रैल से जून तक कटाई मौसम के दौरान साप्ताहिक बैठक आयोजित की जाएगी। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को चालू मौसम के दौरान कृषि अवशेष या धान की पुआल के जलाए जाने पर रोकने पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने पुआल को जलाए जाने को रोकने तथा इसके कारण पर्यावरण एवं लोगों के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले हानिकारक प्रभावों के बारे लोगों को शिक्षित करने के लिए अपने व्यापक अभियान एवं जागरूकता कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। 

उन्होंने बताया कि बोर्ड पुआल को जलाए जाने पर लगाए गए प्रतिबंध और इसके दुष्प्रभावों के बारे जागरूक करने के लिए प्रिंट एवं इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से विज्ञापन जारी कर रहा है। इसके अतिरिक्त, पंचायत कार्यालयों, कृषि मंडियों और स्वास्थ्य केन्द्रों जैसे सभी महत्वपूर्ण एवं प्रासंगिक स्थलों पर होर्डिंगज़ लगाई जा रही हैं। बोर्ड से चालू मौसम के दौरान पुआल को जलाए जाने को रोकने में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कृषि एवं राजस्व विभागों तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों या कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र या पुरस्कार देने की भी योजना बनाई है। इस कार्य में श्रेष्ठï योगदान देने वाले गैर-सरकारी संगठन या सिविल सेवा संगठन या निजी व्यक्ति के लिए अलग से पुरस्कार शुरू करने की भी योजना है।  किसानों को पुआल को जलाने से स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण पर पडऩे वाले दुष्प्रभावों और इस पर लगाए गए प्रतिबंध के कानूनी प्रावधानों के बारे शिक्षित करने के लिए कृषि एवं पंचायत विभागों के सहयोग से जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित या अभियान चलाए जाएंगे। 

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