Monday, October 17, 2016

फ्रंटियर एवं पंजाबी युवा मंच द्वारा आज फरीदाबाद का 67वां बर्थडे मनाया जाएगा


फरीदाबाद(abtaknews.com )  फ्रंटियर एवं पंजाबी युवा मंच द्वारा फरीदाबाद 67वां बर्थडे बड़ी धूमधाम से केक काटकर आज सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर बन्नूवाल में मनाया जाएगा। इस मौके पर बच्चों को टॉफी एवं मिठाईयां बांटी जाएगी एवं उस समय के एकमात्र शरणार्थी सरदार गुरचबन सिंह को सम्मानित भी किया जाएगा। फं्रटियर मंच के प्रदेश अध्यक्ष राजेश भाटिया ने जानकारी देते हुए बताया कि बंटवारे की आजादी में पाकिस्तान से उजडक़र आए लगभग 30 हजार शरणार्थियों ने अपनी मेहनत व मशक्कत से एनआईटी क्षेत्र का निर्माण किया। इन मेहनतकश लोगों ने उजडऩे के बाद 5 हजार से अधिक मकानों का निर्माण निश्चित अवधि से कम समय में पूरा कर एक रिकॉर्ड कायम करके दिखा दिया। शरणार्थियों ने मात्र 2 करोड़ 60 लाख रुपए खर्च कर 5196 मकानों का निर्माण किया था, जो आज एन.एच.1, 2, 3 एवं 5 कहलाती हैं। न्यू इंडस्ट्रीयल टाऊन का निर्माण भारत-पाक विभाजन की भयानक त्रासदी के गर्भ से हुआ। 17 अक्तूबर 1949 की सुबह लगभग 11 बजे तत्कालीन तालीमी संघ की संयुक्त सचिव आशा देवी के नेतृत्व में एन.एच.5 स्थित आइटीआई के नजदीक पहला फावडा मारकर एनआईटी शहर को बसाने का काम शुरू किया गया था। एनआईटी का डिजाइन जर्मन आर्किटेक्ट निरसन ने तैयार किया था। इसको आकार देने के लिए बनाए गए विकास बोर्ड में देश के पहले राष्ट्रपति पं. राजेन्द्र प्रसाद एवं योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष एल सी जैन जैसी अनेक हस्तियां शामिल थी। अनेक उतार-चढ़ाव झेलने के बाद आबाद हुए एनआईटी शहर में सोमवार को शहर की 67वीं वर्षगाठ एक यागदार के रूप में धूमधाम से मनाई जाएगी।

आज मनेगा फरीदाबाद का  जन्मदिन;-स्थापना दिवस फ्रंटियर एवं पंजाबी युवा मंच व जनता रामलीला कमेटी धूमधाम से मनाएगी। मंच के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद राजेश भाटिया की देखरेख में केक काटा जाएगा जहाँ शहर के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे ।राजेश भाटिया  के अनुसार पाक से उजड़ कर आए मेहनतकश लोगों ने दिन-रात मेहनत कर पांच हजार से अधिक मकानों का निर्माण निश्चित अवधि से कम समय में पूरा कर एक रिकॉर्ड कायम किया था। तत्कालीन पंजाब लोक निर्माण विभाग ने मकानों के निर्माण के लिए 4 करोड़ 64 लाख का बजट केंद्र सरकार से मांगा था। जिसके बाद शरणार्थियों ने आंकी रकम से आधी कीमत में शहर का निर्माण कर दिखा दिया जो अपने आप में रिकॉर्ड है। इन शरणार्थियों ने मात्र दो करोड़ 60 लाख रुपया खर्च कर 5 हजार 196 मकानों का निर्माण कर डाला जो आज एनएच-एक, दो, तीन व पांच कहलाता है।
शरणार्थियों की विशेष भूमिका;-फरीदाबाद को औद्योगिक नगरी के रूप में पहचान दिलाने में शरणार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभाजन के बाद सरकार इन्हें राजस्थान के अलवर व भरतपुर में बसाना चाहती थी, लेकिन शरणार्थियों का कहना था कि वहां उनका विकास नहीं हो सकता। नेहरू सरकार ने फरीदाबाद न्यू टाउनशिप की योजना बनानी शुरू की। शरणार्थियों का नेतृत्व सालार सुखराम ने किया। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद फरीदाबाद विकास बोर्ड के चेयरमैन बने। बोर्ड के पहले चीफ एडमिनिस्ट्रेटर सुधीर बोस बनाए। इसमें लेडी नाई, सालार सुखराम, सरदार गुरबचन सिंह आदि को सदस्य बनाया गया। इसके बाद शरणार्थियों के लिए मकान बनाने का काम शुरू हुआ।

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