Monday, October 3, 2016

ग्राम पंचायतों ने मांगों को लेकर जंतर मंतर पर किया प्रदर्शन


फरीदाबाद, 3 अक्तूबर(abtaknews.com) : ग्राम पंचायतों को अपने हक के लिए एकजुट होकर लडऩा होगा। यह विचार जंतर मंतर दिल्ली में राष्ट्रीय पंचायतीराज संगठन द्वारा आयोजित धरने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विधान परिषद के पूर्व सदस्य सुनील सिंह ने कहे। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी के सपनों का भारत बनाने के उद्देश्य से वर्ष 1993 में 73वां और 74वां संशोधन किया गया, जिसके लागू करने की जिम्मेदारी  राज्य सरकारों पर डाल दी गई, परंतु 23 साल बीत जाने के बाद भी राज्य सरकारे पंचायतीराज संस्थानों को सशक्त बनाने से कतराती है। उन्होंने कहा कि वास्तव में पंचायती संस्थानों को सशक्त बनाने की सोच राज्य सरकारों के एजेंडों में ही नहीं है। संविधान में 73वां और 74वां संशोधन केवल इसलिए किया गया, क्योंकि देश की 70 प्रतिशत जनता ग्रामीण क्षेत्र मेंं रहती है। ग्राम स्वराज कायम करने की दृष्टी से बनाया गया पंचायतीराज एक्ट लालफीताशाही के शिकंजे में फंसकर रह गया है। उन्होंने प्रदर्शन कारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विधान मंडल और संसद सदस्यों की नीयत साफ नहीं है और नौकरशाही के स्वार्थों के चलते पंचायतीराज संस्थान अधिकार विहिन है जब तक पंचायतराज संस्थानों को प्रशासनिक और वित्तिय अधिकारी संपन्न नहीं बनाया जाता तब तक गांवों की तस्वीर नहीं बदलेगी, न किसान खुशहाल हो पाएगा। उन्होंने कहा कि सत्ता के विकेंद्रीकरण करने के लिए केंद्र सरकार को आगे आना होगा और संविधान में संशोधन कर पंचायतों को सशक्त बनाने का अधिकार जो राज्यों को सौंपा है उसे वापिस ले और रेल, डाक, आयकर विभाग की भांति पंचायतों के अधिकारों पर भी राज्य सरकार को कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संगठन पंचायतों को सुदृढ़ बनाने में निरंतर संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गई तो देश के 2 लाख 48 हजार प्रधान व पंचायत प्रतिनिधि शीतकालीन सत्र में संसद का घेराव करेंगे। इस प्रदर्शन में प्रधानों, पंचायत, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।


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