Wednesday, October 19, 2016

महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन राष्ट्र निर्माण को था समर्पित:- राज्यपाल देवव्रत



फरीदाबाद(abtaknews.com ) महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन राष्ट्र को समर्पित था। उनके जेहन में राष्ट्र निर्माण के सिवाय कुछ भी नहीं था। राष्ट्रवादी सोच ने उन्हें घर-घर तक पहुंचाने का प्रयत्न किया। उन्होंने शिक्षा की अलख जगाई। अंधविश्वास से दूर रहने के लिए लोगों को जागरूक किया। उनकी राष्ट्रभक्ति युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उक्त बातें हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने एनएच तीन स्थित डीएवी शताब्दी कॉलेज में आयोजित ‘इंपोटेंस ऑफ रेशनेलिटि’ पर कही। कॉलेज कैंपस में महर्षि दयानंद के 134वें निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में 9वें यादगार व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया था।

राज्यपाल ने कहा कि सभी को समाज की बेहतरी के लिए सोचना था। उन्होंने दयानंद सरस्वती से जुड़े किस्से सुना सभी की हौसला अफजाई की। उन जैसा बनने के लिए प्रेरित किया। मनुष्य निर्माण पर बल दिया। जिससे सभ्य समाज का निर्माण हो सके। सभ्य समाज से ही मजबूत भारत का निर्माण होता है। कैंपस में पहुंचने पर प्रिंसिपल डॉ. सतीश आहूजा ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. आहूजा ने कहा कि इस तरह के समारोह से समाज में जो कुरीतियां, अधंविश्वास, नैतिकता का हास आदि जो विसंगतियां है। इसके प्रति नजरिया बदलता है। युवा वर्ग को समाज में बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम के आयोजन में राष्ट्रीय चेतना शक्ति फरीदाबाद ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया। कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर व निदेशक हरियाणा अकेडमी ऑफ हिस्ट्री एंड कल्चर कुरूक्षेत्र ने कहा कि इस तरह के आयोजन से युवाओं को दयानंद सरस्वती जैसे व्यक्तित्व से सीखने का मौका मिलता है। उन्होंने दयानंद के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर बिजेंद्र कुमार पुनिया ने की। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद का जीवन समाज को समर्पित था। उन्होंने आजीवन समाज को बेहतर बनाने का प्रयास करते रहे। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय काम किया। राष्ट्रीय चेतना शक्ति के अध्यक्ष डॉ. सुखबीर सिंह सेवानिवृत आईएएस ने सभी का अभिनंदन किया। इस आयोजन में सम्मलित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। डॉ. सिंह ने बताया कि सभी को एकजुट होकर समाज की तरीके लिए काम करना चाहिए। आपसी भेदभाव, अंधविश्वास, जलन, ईष्र्या, द्वेष जो बढ़ रहा है। इनके समाधान के लिए वैज्ञानिक सोच व प्रत्येक व्यक्ति द्वारा विचार शक्ति का प्रयोग करके तर्कणात्मक रवैये द्वारा ही निपटा जा सकता है।

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