Tuesday, October 4, 2016

व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण बने शिक्षा का मुख्य आधारः अतुल कोठारी


फरीदाबाद, 4 अक्तूबर(abtaknews.com )वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद के विवेकानंद मंच द्वारा ‘व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा संस्कृति उत्थान न्याय के राष्ट्रीय सचिव श्री अतुल कोठारी मुख्य वक्ता रहे।श्री कोठारी ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में हरियाणा महिला कल्याण संघ की अध्यक्षा डॉ आलोक दीप विशिष्ट अतिथि थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने की। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ संजय कुमार शर्मा तथा काफी संख्या में संकाय सदस्य भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन निदेशक, युवा कल्याण डॉ प्रदीप डिमरी तथा सांस्कृतिक मामलों की अध्यक्षा डॉ सोनिया बंसल ने किया।

प्रसिद्ध शिक्षाविद् श्री अतुल कोठारी ने अपने संबोधन की शुरूआत ‘ओम’ उच्चारण से की तथा विद्यार्थियों को ‘ओमकार’ ध्वनि की प्रक्रिया एवं वैज्ञानिक महत्व से परिचित करवाया। श्री कोठारी ने कहा कि शिक्षा के लिए मन की एकाग्रता आवश्यक है। इसलिए, विद्यार्थियों को एकाग्रता के लिए ओम ध्वनि का उच्चारण करना चाहिए। श्री कोठारी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंगों से कुछ रोचक उदाहरण भी प्रस्तुत किये तथा विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण के लिए उपयोगी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का विकास जिस तरह से होता है, उसी तरह से उसके चरित्र का निर्माण होता है। 

श्री कोठारी ने भारतीय शिक्षा में बदलाव एवं उत्थान पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति हो तथा व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण हो। उन्होंने भारतीय संस्कार एवं संस्कृति के प्रसार के लिए मातृभाषा में शिक्षा पर भी बल दिया। कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने श्री कोठारी को स्मृति स्वरूप एक पौधा भेंट किया।
कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने अपनी स्वागतीय संबोधन में विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में चरित्र निर्माण को अहम बताया तथा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्याय के माध्यम से भारतीय शिक्षा प्रणाली में बदलाव के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहे श्री अतुल कोठारी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल आधार व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण ही होना चाहिए।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ आलोक दीप ने चरित्र निर्माण पर बल देते हुए कहा कि समाज में बढ़ते अपराध का मुख्य कारण चरित्र पतन है और अच्छे समाज के निर्माण के लिए अच्छे चरित्र का होना बेहद आवश्यक है। इसलिए भारतीय संस्कृति मंे संस्कारों को महत्व दिया गया है।

loading...
SHARE THIS

0 comments: