Tuesday, October 18, 2016

विधवाओं का रैंप पर कैटवाक, सुलभ इंटरनेशनल की सोच को सैल्यूट


नई दिल्ली(abtaknews.com)  पुरुष प्रधान समाज में महिलायों के प्रति अलग नजरिया रखा गया है।  विधवा महिलाओं के प्रति  तो समाज की सोच ही अलग है तमाम पाबंदियां विधवा महिला पर लगाई गई। इन रूढ़िवादी परम्पराओ को विधवा भी यही धारणा बना लेती है कि अब उनके जीवन में ख़ुशी एवं रंग के कोई मायने नहीं रहे। सुलभ इंटरनेशनल संस्था ने विधवाओं के प्रति ऐसी सोच और परंपराओं को तोड़कर एक नई मुहीम शुरू की है। जिससे विधवा महिलाये भी समाज की मुख्य धारा से जुड़कर एक खुशहाल जिंदगी जी सके। 
सुलभ इंटरनेशनल के पाठक ने बताया कि इस फैशन शो में सभी प्रतिभागियो का मेकअप किया गया, उन्हें सजाया गया। इससे हमें बड़ी खुशी मिली।  केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। सुलभ इंटरनेशनल के प्रमुख बिंदेश्वरी पाठक द्वारा लिखित  भारत में विधवाएं-वृंदावन और वाराणसी का अध्ययन तथा सुप्रीम कोर्ट और वृंदावन की विधवाएं' नामक दो पुस्तकों का विमोचन भी हुआ। 
पहली बार जीवन में पहनी रंगीन साड़ी;-  वृंदावन से आई एक विधवा ने बताया कि जिंदगी में पहली बार उन्होंने रंगीन साड़ी पहनी है। बीस बरस पहले उनके पति का निधन हो गया था। उक्त विधवा  के अनुसार हमें नहीं मालूम क्या सही है और क्या गलत। हम वहीं करती हैं जो हमसे उम्मीद की जाती है। लेकिन अब समय बदल चुका है। पुरुषों और महिलाओं से एक जैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए है।

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