Monday, October 10, 2016

शिवपाल के आगे बौने साबित हुए अखिलेश यादव



लखनऊ( संदीप पाल) आखिरकार मुलायम सिंह यादव के परिवार और सपा सरकार में झगड़े की जड़ रहे कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो ही गया और इस विलय से यह भी साफ हो गया कि परिवार और सरकार में जो रूतबा सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव का है वह अखिलेश यादव का भी नहीं है।
भाले ही आज अखिलेश यादव सपा के चेयरमैन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री क्यों न हो,
कौमी एकता दल का सपा में विलय 21 जून को हुआ था। इस विलय के साथ ही  समाजवादी पार्टी में भूचाल आ गया था। विलय में मध्यस्थता करने वाले कैबिनेट मंत्री बलराम यादव को अखिलेश यादव ने सरकार से बाहर का रास्ता दिखा दिया था।  इसके बाद विवाद इतना बढ़ा की 25 जून को केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाकर इस वियल के प्रस्ताव को ूएक सिरे से खारिज कर दिया गया था। उसके बाद से तमाम अटकलें लगती रही की सपा पार्टी बचेगी या इसमें दो फाड़ हो जाएंगे। अन्तत: गत गुरुवार 6 अगस्त को शिवपाल ने साफ कर दिया कि नेताजी कौमी एकता दल का विलय सपा में करा चुके हैं। यह सबकी सलाह से हुआ है और अब कौमी एकता दल समावादी पार्टी का हिस्सा है। इस पर सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि पहले हम नम्बर एक पर थे अब पता नहींँ
 इसके बाद  सीएम अखिलेश यादव के न चाहने पर भी अमर सिंह को पार्टी का नेशनल जनरल सेके्रटरी बनाया गया। इसके बाद सीएम अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच विवाद के दौरान अखिलेश ने 'बाहरी लोगों की दखलंदाजीÓ वाक्य का इस्तेमाल भी किया था। आजम खान और रामगोपाल यादव भी अमर के विरोधी थे। अपराधिक छवि के लोगों को अपने व पार्टी से दूर रखने की सोच रखने वाले सीएम अखिलेश उस समय और झटका लगा जब पत्नी के कत्ल के आरोपी अमनमणि त्रिपाठी और एनआरएचएम के आरोपी मुकेश श्रीवास्तव को न केवल सपा में शामिल किया। बल्कि उन्हे विधानसभा चुनाव में टिकट देने की बात करते हुए उनके बचाव मे कहा कि दोनों के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। वह अभी अपराधी सिद्ध नहीं हुये हैं। इस सबसे हताश सीएम ने कहा कि अब उन्हे अदृश्य शक्तियों से लडृना होगो।

सदस्य से सीधे नेशनल जनरल सेक्रेटरी...
- 16 जुलाई को सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को फिर से बनाया क्या था। अमर सिंह को मेंबर बनाया क्या था।
- अब नेशनल जनरल सेक्रेटरी बनने के बाद अमर पार्टी में ज्यादा पावरफुल हो जाएंगे।
आजम और रामगोपाल के विरोध के चलते नहीं लिया था फैसला
- सपा सूत्रों की मानें तो अब तक मुलायम ने आजम खान और रामगोपाल यादव के विरोध के चलते अमर सिंह पर फैसला रोक रखा था।
- लेकिन, सपा में कलह और सुलह के दौरान रामगोपाल के रोल को देखते हुए मुलायम के लिए ये फैसला आसान हो क्या था।
- हालांकि, अखिलेश भी अमर सिंह को नेशनल जनरल सेक्रेटरी बनाने के विरोध में बताए जाते हैं।
अब 6 लोग राष्ट्रीय महासचिव के पद पर
- सपा में अमर सिंह को मिलाकर अब 6 नेशनल जनरल सेक्रेटरी हो गए हैं।
- आजम खान, रामगब
गोपाल यादव, रवि प्रकाश वर्मा, नरेश अ ग्रवाल, विशंंभर निषाद और सुरेंंद्र नागर के अलावा अब अमर सिंह भी इस लिस्ट का हिस्सा बन गए हैं।
क्या कहना है एक्सपर्ट का?
- सीनियर जर्नलिस्ट रतनमणि लाल का कहना है, "अमर सिंह को राष्ट्रीय महासचिव बनाने का मतलब है कि अब मुलायम अपने भरोसेमंद लो"ों को आसपास रखना चाहते हैं।"
- "मुलायम समझ चुके हैं कि अ"र अखिलेश की पार्टी में चली तो कुछ भी नहीं बचे"ा। मुलायम समझ रहे हैं कि न तो अब चुनाव जीता जा सकता है और न ही ऐसे पार्टी बचाई जा सकती है।"
-" यही वजह है कि वे अखिलेश यादव, राम"ोपाल यादव और आजम खान की परवाह भी नहीं कर रहे हैं।"

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