Wednesday, October 5, 2016

बर्नो में भारत चेक संयुक्‍त कार्य दल की चौथी बैठक


मध्‍य और पूर्वी यूरोप के साथ आर्थिक गतिविधि बढ़ाने के लिए भारतीय अधिकारियों और उद्यो‍गपतियों के एक उच्‍चस्‍तरीय शिष्‍टमंडल ने चेक गणराज्‍य के समकक्षों को विदेशी निवेशकों को प्रत्‍साहित करने विशेषकर उच्‍च टेक्नोलॉजी, पूजीगत सामान और इंजीनियरिंग में भारत के अग्रणी कार्यक्रम ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

चेक गणराज्‍य और अन्‍य पूर्वी और मध्‍य यूरोप के देशों के साथ सक्रिय सहयोग के लिए भारत भारी इंजीनियरिंग तथा एडवांस मैन्‍युफैक्‍चरिंग के क्षेत्र में 2013 से भारत-चेक कार्य दल के अंतर्गत काम कर रहा है। भारत-चेक कार्यदल की चौथी बैठक बर्नो में हुई। इस बैठक का आयोजन 3से 6 अक्‍टूबर 2016 के बीच एमएसवी बर्नो फेयर के आयोजन के साथ रखा गया था। बैठक में द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति और भविष्‍य में सहयोग की दिशा तय की गई।

भारतीय शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व भारी उद्योग सचिव श्री गिरिश शंकर ने किया। शिष्‍टमंडल में कंपनियों , संस्‍थानों तथा इंजीनियरिंग और संबंधित क्षेत्रों के छोटे और मझोले उद्योगों के प्रतिनिधि थे। बैठक में चेक गणराज्‍य में भारत के राजदूत श्री कृष्‍ण कुमार भी मौजूद थे। चेक गणराज्‍य की ओर से टैट्रा, जेडएलके, बोनोट्रांस, टी मशीनरी के प्रतिनिधि मौजूद थे।

संयुक्‍त कार्यदल की बैठक के बाद श्री शंकर ने कहा कि हम पूर्वी यूरोप से टेक्‍नोलॉजी हस्‍तांतरण चाहते हैं। भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग ने चेक गणराज्‍य में अपनी स्थिति अच्छी बना ली है। यह व्‍यापार आंकड़ों से स्‍पष्‍ट होता है। चेक गणराज्‍य को 523 मिलियन डॉलर भारतीय निर्यात में इंजीनियरिंग का हिस्‍सा 413 मिलियन डॉलर हैं।

उन्‍होंने कहा कि भारत इंजीनियरिंग तथा रक्षा सहित उच्‍च टेकनोलॉजी में प्रत्‍येक्ष विदेशी निवेश के लिए सक्रियता से कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में सरकार ने विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश नीतियों को उदार बनाया है, प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और निवेशकों को कारोबारी सहजता का आश्‍वास दिया गया है। उन्‍होंने कहा विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश की सीमा बढ़ाने और देश में वस्‍तु और सेवा कर कानून लाने से वैश्विक निवेशकों का भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के प्रति विश्‍वास बढ़ा है।

अपने प्रस्‍तुतीकरण में ईईपीसी के अध्‍यक्ष श्री टी.एस. भसीन ने कहा कि मूल्य श्रृंखला के संदर्भ में भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग काफी आगे बढ़ा है, लेकिन अभी और किए जाने कीजरूरत है। उन्‍होंने कहा कि विश्‍व बाजार में स्‍पर्धा में बने रहने के लिए छोटे और मझोले आकार के उद्योग भी अत्‍याधुनिक टेकनोलॉजी चाहते हैं। 

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