Saturday, September 17, 2016

वित्त अनुशासन एवं स्पर्धा की भावना को बरकरार रखना अत्यंत आवश्यक ;- अरूण जेटली


फरीदाबाद (abtaknews.com ):  देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व सशक्त बनाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत संबंधित व सक्षम अधिकारियों में वित्त अनुशासन एवं स्पर्धा की भावना को बरकरार रखना अत्यंत आवश्यक है। यह उद्गगार केंद्रीय वित्त मंत्री भारत सरकार अरूण जेटली ने सैक्टर-48 स्थित राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान परिसर में आयोजित प्रशिक्षु वित्त अधिकारियों के चतुर्थ दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्यातिथि संबंधित करते हुए प्रकट किए। उन्होंने दीपशिखा प्रज्जवलित करके समारोह का शुभारंभ किया। श्री जेटली ने यहां पर स्थापित की गई आचार्य चाणक्य मुनि की प्रतिमा का अनावरण भी किया। उन्होंने विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत वित्त प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त कुल 181 प्रशिक्षु वित्त अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र व मैडल भेंट किए। 

अरूण जेटली ने कहा कि आज का युग वित्त स्पर्धा का युग है। इसके अंतर्गत निजी क्षेत्र ने भी काफी तरक्की की है और आधुनिक तकनीकीपूर्ण सुविधाओं का प्रयोग करके अपनी अलग पहचान बनाई है। इसी प्रकार सरकारी क्षेत्र में भी वित्त अधिकारियों को श्रेष्ठ संसाधन जुटाए जाने जरूरी है ताकि वे भी इसे चुनौती स्वरूप लेकर उनसे स्पर्धा करने में कामयाब हो सके। श्री जेटली ने इस संस्थान परिसर में एक आधुनिक स्तर का आडिटोरियम बनवाने के संबंध में उच्च अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां शुरू करने बारे निर्देश दिए। श्री जेटली ने कहा कि प्रशिक्षुओं के लिए दीक्षांत समारोह एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इसके फलस्वरूप वे स्वयं को अपने क्षेत्र में और अधिक सक्षम व पारंगत महसूस करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त वित्त अधिकारियों के नव बौद्धिक कौशल के फलस्वरूप देश की अर्थ व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। 

राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान के निदेशक हर्ष कुमार  का कहना है कि इस संस्थान में निजी और सरकारी कर्मचारी दोनो के लिए वित्तिय व कास्ट आडिट तथा कई अन्य प्रकार के कोर्स कराये जाते है। आज दीक्षान्त समरोह में इन कोर्सो को पूरा करने वाले लोगों को वित्त मंत्री द्वारा डिग्री व मेडल प्रदान किए गए। हिन्दी दिवस पखवाडा होने के बावजूद पूरे कार्यक्रम में अंग्रेजी का बोलबाला होने पर वे कोई संतोषजनक जबाव नहीं दे पाएं। 


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