Thursday, September 15, 2016

हिंदी दिवस पर राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किये पुरस्‍कार वितरित


नई दिल्ली(abtaknews.com )भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा आज (14 सितंबर 2016) राष्ट्रपति भवन में हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में माननीय राष्ट्रपति के कर कमलों से पुरस्कार विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। माननीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह एवं माननीय गृह राज्‍य मंत्री श्री किरेन रीजीजू सहित अनेक गणमान्‍य व्‍यक्ति समारोह में उपस्थित थे।
अपने उद्बोधन में माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि हिंदी भाषा विविधता में एकता का प्रतीक है। हिंदी पुरातन भी है और आधुनिक भी। हिंदी भारतीयता की चेतना है। यही कारण था कि विभिन्न भाषा-भाषी लोगों ने हिंदी को ही पूरे भारतवर्ष की एकमात्र संपर्क भाषा माना और उसे ही आजादी की लड़ाई का माध्यम भी बनाया। हिंदी और अन्‍य भारतीय भाषाओं के बीच अनुवाद बढ़ाए जाने की आवश्‍यकता है। हिंदी का विकास देश की उन्‍नति के लिए आवश्‍यक है। ज्ञान विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं उद्योग आदि में हिंदी का प्रयोग कर हम और आगे बढ़ सकते हैं।
इस मौके पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदी दिवस आत्‍मावलोकन का दिवस है । यह दिन हमें अपनी प्रगति की समीक्षा एवं मूल्‍यांकन करने का अवसर देता है। उन्‍होंने यह भी कहा कि हिंदी की विविधता, प्राचीनता तथा वैज्ञानिकता को पूरा विश्‍व स्‍वीकार करता है। भाषा किसी भी राष्ट्र और समाज की आत्मा होती है, जिसमें वह देश संवाद करता है, अपनी भावाभिव्‍यक्ति करता है। भाषा और संस्कृति किसी देश की अस्मिता की प्रतीक होती है और सच यही है कि हिंदी विभिन्न भाषाभाषी आम भारतीयों के सुख-दुख, उनकी सोच और अभिव्यक्ति की भाषा है। हिंदी भारत की लोक संपर्क की भाषा होने के साथ साथ संस्‍कृति तथा जीवन मूल्‍यों की भाषा भी है। उन्‍होंने प्राथमिक शिक्षा के स्‍तर पर हिंदी तथा दूसरी भारतीय भाषाओं की पढ़ाई की आवश्‍यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि हमें हिंदी दिवस को संकल्‍प दिवस के रूप में मनाना चाहिए।
कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री श्री किरेन रीजीजू ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी एक सशक्‍त भाषा है और यह लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था की पूरक है। राजभाषा नीति के कार्यान्वयन में अब तक हमने जो प्रगति की है, उसे और गति देने की आवश्यकता है। हमारे देश में युवाओं की संख्या सर्वाधिक है। हमें अपनी युवा पीढ़ी को भाषाई स्वाभिमान और राष्ट्र प्रेम से जोड़ कर उन्‍हें अपने रोजमर्रा के जीवन में हिंदी एवं भारतीय भाषाओं का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करना होगा।
राजभाषा सचिव श्री अनूप कुमार श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का धन्यवाद करते हुए विश्वास दिलाया कि राजभाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधानों का अनुपालन कराने एवं सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए राजभाषा विभाग सतत प्रयासरत है और रहेगा। राजभाषा विभाग द्वारा एक वार्षिक कार्यक्रम जारी किया जाता है, जिसमें राजभाषा के कार्यान्वयन संबंधी लक्ष्‍य निर्धारित किए जाते हैं। वार्षिक कार्यक्रम के अनुपालन में हासिल की गई उपलब्धियां वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट के रुप में संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखी जाती हैं।
विदित हो कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा के निर्णय के अनुसार हिंदी भारत संघ की राजभाषा बनी।  इस उपलक्ष्‍य में राजभाषा विभाग प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह का आयोजन करता है, जिसमें विभिन्‍न क्षेत्रों में राजभाषा हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन को बढ़ावा देना है। समारोह में राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना के अंतर्गत मंत्रालयों/ विभागों/ सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों/ भारत सरकार के बोर्ड/ सोसायटी/ ट्रस्ट, राष्ट्रीयकृत बैंक तथा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों को राजभाषा हिंदी में बेहतर कार्य निष्पादन हेतु पुरस्कृत किया जाता है। भाषाई दृष्टि से राजभाषा हिंदी के उपयोग को ध्‍यान में रखते हुए भारत को क, ख तथा ग तीन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।

पुरस्‍कार विजेताओं;-- में राजभाषा कीर्ति पुरस्कार-वर्ष 2015-16 योजना के अंतर्गत 300 से कम स्टाफ संख्या वाले मंत्रालय/विभाग की श्रेणी में संसदीय कार्य मंत्रालय को प्रथम, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय को द्वितीय तथा वित्तीय सेवाएं विभाग को तृतीय पुरस्‍कार प्राप्‍त हुआ, वहीं 300 से अधिक स्टाफ संख्या वाले मंत्रालय/विभाग की श्रेणी में शहरी विकास मंत्रालय को प्रथम, अंतरिक्ष विभाग को द्वितीय तथा खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग को तृतीय पुरस्‍कार दिया गया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में  क्षेत्र में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड प्रथम, एनएचपीसी लिमिटेड द्वितीय तथा फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड तृतीय स्‍थान पर,  क्षेत्र में कोंकण रेलवे कार्पोरेशन लिमिटेड प्रथम, भारतीय कपास निगम लिमिटेड द्वितीय तथा भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम लिमिटेड तृतीय स्‍थान पर एवं  क्षेत्र में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एण्ड इंजीनियर्स लिमिटेड प्रथम, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड द्वितीय तथा गोवा शिपयार्ड लिमिटेड तृतीय स्‍थान पर रहे। भारत सरकार के बोर्डस्वायत्त निकाय/ट्रस्ट/सोसाइटी आदि के अंतर्गत  क्षेत्र में तेल उद्योग विकास बोर्ड, नोएडा प्रथम भारतीय विदेश व्यापार संस्थान, दिल्ली द्वितीय, सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र, नई दिल्ली तृतीय,  क्षेत्र में जवाहर लाल नेहरू पत्तन न्यासनवी मुंबई प्रथम, भाखड़ा ब्यास प्रबंध बोर्ड, चंडीगढ़ द्वितीय तथा रा.रा.पो.केंद्रीय आयुर्वेदीय कैंसर अनुसंधान संस्थानमुंबई तृतीय व  क्षेत्र में दामोदर घाटी निगम, कोलकाता प्रथम, केन्‍द्रीय विद्युत अनुसंधान संस्‍थानबेंगलूर द्वितीय समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, कोच्ची को तृतीय पुरस्‍कार दिया गया। राष्ट्रीयकृत बैंकों की श्रेणी में  क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक प्रथम, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर द्वितीय,  क्षेत्र में बैंक ऑफ इंडिया प्रथम, सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वितीय तथा  क्षेत्र में सिंडिकेट बैंक प्रथम एवं विजया बैंक द्वितीय स्‍थान पर रहे। पूरे देश में 436 नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों में उत्‍कृष्‍ठ कार्य निष्‍पादन हेतु  क्षेत्र में नराकास मथुरा प्रथम, नराकास भिलाई द्वितीय,  क्षेत्र में नराकास नागपुर(बैंक) प्रथम, नराकास चंडीगढ़(कार्यालय-1) द्वितीय व क्षेत्र में नराकास हैदराबाद(उपक्रम) प्रथम एवं नराकास हैदराबाद(बैंक) को द्वितीय स्‍थान प्राप्‍त हुआ। राजभाषा गृह पत्रिका पुरस्‍कारों में  क्षेत्र के अंतर्गत राष्‍ट्रीय जल विज्ञान संस्‍थान की पत्रिका जल चेतना को प्रथम, रेल मंत्रालय कीभारतीय रेल को द्वितीय,  क्षेत्र से स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया की प्रयास को प्रथम, माझगांव डॉक शिपबिल्‍डर्स की जल तरंग को द्वितीय एवं  क्षेत्र में राष्‍ट्रीय इस्‍पात निगम लिमिटेड की सुगंध को प्रथम, तथा गार्डनरीच शिपबिल्‍डर्स एंड इंजीनियर्स की पत्रिका राजभाषा जागृति‍ को द्वितीय पुरस्‍कार प्राप्‍त
हुआ।

राजभाषा गौरव पुरस्कार विजेताओं की एक अन्‍य श्रेणी में केंद्र सरकार के कार्मिकों के लिए राजभाषा गौरव मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना 2015 में डॉ रामनिवास मीणा, प्रो. रामकुमार सिंह को प्रथम पुरस्‍कार के रूप में एक लाख रुपए, डॉ अमलेश कुमार मिश्र को द्वितीय पुरस्‍कार के रूप में पचहत्‍तर हजार रुपए, श्री दिनेश कुमार शर्मा को तृतीय पुरस्‍कार के रूप में साठ हजार रुपए तथा डॉ चंद्रभान सिंह, डॉ. जे पी शर्मा एवं डॉ रणवीर सिंह को प्रोत्‍साहन पुरस्‍कार के रूप में तीस हजार रुपए प्रदान किए गए। भारत के नागरिकों के लिए राजभाषा गौरव मौलिक पुस्तक लेखन पुरस्कार योजना के तहत डॉ. राजेश्वरी प्रसाद चंदोला को प्रथम पुरस्‍कार के रूप में दो लाख रुपए, सुश्री जयश्री घोष, श्री सुनील कांत तांगड़ी को द्वितीय पुरस्‍कार के रूप में एक लाख पच्‍चीस हजार रुपए, डॉ. दुर्गा दत्‍त ओझा को तृतीय पुरस्‍कार के रूप में पचहत्‍तर हजार रुपए, सुश्री रश्मि अग्रवाल, श्री सत्यवीर सिंह, श्री सुबह सिंह यादव, श्री ओ पी यादव, डॉ. प्रेमचंद्र स्वर्णकार, डॉ. विनय कुमार शर्मा तथा श्री सुरेश कुमार को प्रोत्‍साहन पुरस्‍कार के रूप में प्रत्‍येक को दस हजार रुपए पुरस्कार स्‍वरूप दिए गए। विभिन्न गृह पत्रिकाओं में 2015-16 के दौरान छपे उत्कृष्ट लेखों के लेखकों हेतु राजभाषा गौरव पुरस्कार योजना में हिंदी भाषी में डॉ. वीरेंद्र कुमार प्रथम (बीस हजार रुपए), श्री कैलाश नाथ गुप्ता द्वितीय (अठारह हजार रुपए) तथा श्री रामहरि शर्मा तृतीय (पंद्रह हजार रुपए) स्थान पर रहे, वहीं हिंदीतर भाषी में डॉक्टर सदा बिहारी साहू ने प्रथम (पच्‍चीस हजार रुपए), श्री कृष्ण ठाकुर ने द्वितीय (बाइस हजार रुपए) तथा डॉ. सुनील पेशिन ने तृतीय (बीस हजार रुपए) पुरस्‍कार स्‍वरूप प्राप्त किए।

loading...
SHARE THIS

0 comments: