Saturday, September 24, 2016

कवि सम्मेलन में श्रोताओं को कवियों ने किया प्रसन्न


फरीदाबाद 24 सितंबर(abtaknews.com)। भारत सरकार के उपक्रम एवं देश की प्रमुख तेल कंपनी इंडियन ऑयल कारपोरेशन फरीदाबाद के अनुसंधान एवं विकास केन्द्र द्वारा १४ से २९ सितंबर तक मनाए जा रहे हिन्दी पखवाड़े के अंर्तगत २३ सितंबर को राष्ट्र कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती के अवसर पर कंपनी के सर्वो सभागार में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। देश के उच्च कोटि के ओजस्वी कवियों ने अपनी देशभक्ति, हास्य, व्यंग्य एवं वीर रस की काव्य रचनाओं से श्रोताओं को अभिभूत किया। इंडियन ऑयल कारपोरेशन आर एंड डी सेंटर फरीदाबाद के कार्यकारी निदेशक एस.एस. वी. रामाकुमार ने कवियों को पुष्पगुच्छ व शॉल भेट करके सम्मानित किया। कवियों ने राष्ट्र कवि दिनकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा दीपशिखा प्रज्जवलित करके कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पंवार ने की तथा संचालन कवि मनजीत सिंह ने किया।
मेरठ से पधारे डॉ. हरिओम पंवार ने देश प्रेम की काव्य लगन को अपनी कविता के इन शब्दों में बयां किया-
मैं भी गीत सुना सकता हूं, शबनम के अभिनंदन के।
मैं भी ताज पहन सकता हूं, नंदन वन के चंदन के।
लेकिन जब तक पगडंडी से संसद तक कोलाहल है।
तब तक केवल गीत लिखूंगा जन-गण-मन के कृन्दन के।
भोपाल से आई कवियत्री एवं गजल गायिका अंजुम रहबर ने जिंदगी की सच्चाई भरी रचना को कुछ यूं गाकर सुनाया-
मजबूरियों के नाम पर सब छोडऩा पड़ा, दिल तोडऩा कठिन था, मगर तोडऩा पड़ा।
दिल्ली से पधारे कवि महेन्द्र अजनबी ने दिल्ली के दर्द का बखाना करते हुए अपनी कविता इन शब्दों में प्रस्तुत की-
 दिल्ली है दिल वालों की, लोग झूठ कहते हैं, मैं शर्मिंदा हूं कि ऐसे दरिंदे मुझ में रहते हैं।
कभी संजय-गीता, कभी दंगे, कभी तंदूर की खौफ कहानी हूं, गुरूर टूट गया कि ऐसे देश की राजधानी हूं।
राजस्थान के बारा, कोटा से पधारे कवि सुरेन्द्र यादेवेन्द्र ने अमर शहीद हनुमन्थप्पा के हमारे बीच से चले जाने की व्यथा को देशद्रोहियों की करतूतों पर प्रहार करते हुए कविता पेश की-
उसने बर्फ से बाहर आ जब जे.एन.यू. में अफजल जिंदाबाद सुना, भारत मुर्दाबाद का नारा, पाकिस्तां आबाद सुना, भारत की धरती पर जब भारत को मुर्दाबाद कहा, इन नारों को सुनकर वीर हनुमन्थप्पा जिंदा नही रहा।
कानपुर से पधारे कवि डॉ. सुरेश अवस्थी ने देश के कुछ लोगों की घटिया सोच को बयां करते हुए कविता पढ़ी-
आजादी के अर्थ हमें कुछ इतने भा गए, सन-४७ से चले थे एके-४७ तक आ गए, गांधी बापू से चले थे आसाराम बापू तक आ गए, महारानी लक्ष्मीबाई से चले थे जलेबीबाई तक आ गए।
फरीदाबाद के जाने माने कवि सरदार मनजीत सिंह ने कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए एक बेटी के प्रति पिता की वेदना बयां की-
है जलती आग सीने में, नही डरता सिकंदर से,
मगर हूं बाप बेटी का, डरा रहता हूं अंदर से।
इस कवि सम्मेलन में इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आर एंड डी) की उपमहाप्रबंधक (एचआर) निशि एम. खुराना, मुख्य प्रबंधक (एचआर) ज्ञानेश कुमार, महाप्रबंधक (एचआर) अशोक जम्बोर, प्रबंधक (कारपोरेट कम्यूनिकेशन) मैरी जोसैफ, कंपनी की राजभाषा कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष एवं औद्योगिक महाप्रबंधक ए.के. सहगल, प्रशिक्षण प्रबंधक हरीश भाटिया व अधीक्षक सोनिया झिंगन, भाजपा के जिला अध्यक्ष एडवोकेट गोपाल शर्मा, उद्योगपति श्री राम अग्रवाल तथा शिक्षा विभाग से डॉ. जय सिंह सहित जिला के कई अन्य उपस्थित गणमान्य श्रोताओं ने इन काव्य रचनाओं का भरपूर आनंद लिया। 

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