Monday, September 5, 2016

फर्जी रेप केस में फंसाए गए पत्रकार को न्यायलय ने दी अग्रीम जमानत



फरीदाबाद-05 सितंबर(abtaknews.com) सामूहिक दुष्कर्म मामले में पीडिता की मदद करने वाले पत्रकार मोहन तिवारी को झूठे रेप केस में फंसाया गया था। जिसमें फरीदाबाद न्यायलय  के एडिशनल सेशन जज श्री कुलदीप सिंह की अदालत ने उन्हें अग्रीम जमानत दे दी है। 


क्या है मामला-- गैंग रेप  मामले में पीडिता द्वारा दी गई  शिकायत पर पुलिस कार्रवाई न होने पर उसकी मदद कर रहे पत्रकार मोहन तिवारी व पीडिता को महिला पुलिस थाने ने आरोपियों से सांठगांठ कर  झूठे मामले में फंसाना चाहा लेकिन न्यायालय ने पीडिता को पहले ही अग्रीम जमानत दे दी और आज पत्रकार मोहन तिवारी को भी अपने ऐतिहासिक फैंसले में जमानत देते हुए पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए फटकार लगाई।
दरअसल मामला यह है कि भूपानी थाना क्षेत्र निवासी पीडिता के साथ आरोपी रामपाल नर्वत निवासी खेडी, प्रवीण, तन्नू व ऋतु के सहयोग से 31 अक्टूबर, 2015 में पीडिता को उक्त सभी आरोपी पलवल में एक प्लॉट दिखाने के बहाने अल्टो कार से लेकर गए, रास्ते  में उसे नशीला पदार्थ देकर उसके साथ मथुरा के एक होटल में सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी अश£ील वीडियो भी बना ली। इस फिल्म का भय दिखाकर पीडिता को ब्लैकमेल करने लगे, जिसे कई महीने सहने के बाद साहस कर पुलिस को उक्त मामले की शिकायत दी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नही की उल्टा पीडिता से सुलह करने और मामले का निपटाने के लिए रिश्वत मांगी गई।
पीडिता ने परेशान होकर अपने जानकार पत्रकार मोहन तिवारी से मदद मांगी। मोहन तिवारी  पीडिता को पुलिस के कई उच्च पुलिस अधिकारियों के पास लेकर गए लेकिन नतीजे वही ढाक के तीन पात का मुहावरा सिद्ध हुआ। वहीं मामला मीडिया की सुर्खियां बनता देख आरोपी रामपाल ने अपनी एक रिश्तेदार महिला की लडकी को मोहरा बनाते हुए स्वंय सामूहिक बलात्कार पीडिता को और उसके सहयोगी पत्रकार मोहन तिवारी पर क्रास केस करवाने के लिए महिला पुलिस थाने के कर्मचारियों के सहयोग से रेप और रेप में सहयोग करने का झूठा मामला दोनो पर दर्ज करवा दिया।
जिस महिला की लडकी  ने झूठे आरोप लगाए उस लडकी की मां जो कि नहरपार की रहने वाली है उस पर वर्ष 2014 से पत्रकार मोहन तिवारी ने पैसे के लेनदेन का मामला न्यायालय में डाला हुआ था। उसी लडकी की मां ने वर्ष 2014 में भोपानी थाने में छेडछाड का मामला दर्ज करवाया था। जिसमें हाईकोर्ट ने भी पत्रकार मोहन तिवारी को अग्रिम जमानत यह कहते हुए दे दिया था कि मामला पैसे के लेनदेन का है और आरोप साजिस के तहत लगाए गए हैं। वर्ष 2014 वाले मामले में हाई कोर्ट ने केस को झूठा मानते हुए स्टे कर दिया था। जिसके बाद लडकी और लडकी की मां ने भी वर्ष 2015 में महिला थाने में पत्रकार मोहन तिवारी व उनकी बहन के उपर रैप व रैप में सहयोग करने की शिकायत की थी। जिसपर महिला पुलिस थाने से 14 अप्रैल, 2015 को एएसआई सुशीला देवी द्वारा पत्रकार मोहन तिवारी को नोटिस दिया था। जिसपर पत्रकार मोहन तिवारी ने अपने नोटिस के जवाब में अपना ब्यान हाई कोर्ट की आर्डर कॉपी लगाते हुए दर्ज कराया था। जिस पर महिला थाने ने मामले को सही मानते हुए लडकी द्वारा दी गई झूठी शिकायत पर कोई कारवाई नही की और लडकी को डांटकर भगा दिया।
इसके बावजूद भी महिला पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों के संज्ञान में उक्त सारा मामला होते हुए भी आरोपियों से सांठगांठ करके गैंगरेप पीडिता द्वारा दी गई शिकायत पर कोई कार्रवाई ना हो सके इस लिए उन लोगों ने साजिशन ऐसा किया था लेकिन इतने संगीन मामले में मुकदमा दर्ज होने पर भी फरीदाबाद न्यायालय ने ऐतिहासिक फैंसला देते हुए पत्रकार मोहन तिवारी को अग्रीम जमानत दे दिया। आखिर कर उपरोक्त दोषियो के खिलाफ गैंगरेप पीड़िता ने मुकदमा भी दर्ज करवा दिया है. लंबे संघर्ष के बाद पत्रकार मोहन तिवारी के सहयोग से पीड़िता को मिलने वाले न्याय का रास्ता परास्त हुआ है।  पत्रकार तिवारी ने इस फैंसले का स्वागत करते हुए इसे सत्य की जीत बताया है.

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